विवाद का कारण स्पष्ट नही पर कोई बता रहा नेता जी की लफ्फासी तो कोई बता रहा जनता है नेता जी की निष्क्रियता से नाराज
नेता जी की भाटगिरी करने वाला एक हाकर भी कपड़े फटते तक खाया मार
सूत्रों की माने तो ऊगली सुकरी गांव में विगत रात्रि आयोजित नेता जी के कार्यक्रम के दौरान भारी हंगामा और विवाद देखने को मिला,सूत्रों के अनुसार, यह कार्यक्रम नेता जी और जनता के बीच संवाद स्थापित करने का मंच था, लेकिन यह मंच देखते ही देखते जनता के आक्रोश का अखाड़ा बन गया। सूत्र बताते हैं कि नेता जी, जो हाल के चुनावों में विजयी होने के बाद पहली बार गांव में पहुंचे थे, मंच पर आकर अपनी ‘लंबी-चौड़ी फेंकने’ वाली शैली में भाषण शुरू करने वाले थे। लेकिन जनता का धैर्य उसी क्षण टूट गया। ग्रामीणों का आरोप था कि चुनाव जीतने के बाद नेता जी ने सुकरी की तरफ़ पलट कर भी नहीं देखा। गांव के विकास के लिए उन्होंने आज तक कुछ नहीं किया। जनता का यही आक्रोश नेता जी की लफ्फासी के सामने फूट पड़ा। बताया जाता है कि हालात इतने बिगड़ गए कि सभा में जल्द ही धक्का-मुक्की शुरू हो गई,सूत्रों की मानें तो यह सिर्फ़ नारेबाजी तक सीमित नहीं रहा। नेताओं और उनके कुछ करीबी समर्थको के साथ झूमा-झपटी की खबरें भी सुर्खिया बटोर रही हैं , विवाद के दौरान कई लोगों के शर्ट फट गए, और तो और नेता जी और उनके साथ आए कुछ खास समर्थकों की पगड़ी भी उछल गई।
भाषण दिए बिना लौटना पड़ा नेता जी को
सूत्र बताते हैं कि अव्यवस्था और जनता के आक्रोश को देखते हुए, नेता जी और उनके करीबियों ने मौके की नज़ाकत भांप लिए और निकल गए। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, नेता जी जनता को संबोधित किए बिना ही, अपने कार्यक्रम को छोड़कर वहाँ से लौटने को मजबूर हो गए। जनता का गुस्सा इतना ज्यादा था कि उनके सुरक्षाकर्मियों और निजी समर्थकों के लिए भी उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना मुश्किल हो रहा था।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, तत्काल ऊगली पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर 112 वाहन और ऊगली उप-निरीक्षक को भेजा। पुलिस बल ने हस्तक्षेप करते हुए, नेता जी को भीड़ से बचाकर सुरक्षा घेरे में लिया। सूत्रों ने पुष्टि की है कि नेता जी और उनके चहेतों को पुलिस ने सरकारी वाहन से दलबल के साथ विवाद स्थल से बाहर निकाला, जो एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के लिए शर्मनाक स्थिति थी।
हॉकर को नेता जी की भाटगिरी करना पडा भारी
सूत्र बताते हैं कि इस पूरे विवाद में एक और घटनाक्रम सामने आया जिसने माहौल को और गर्म कर दिया। सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में कुछ ग्रामीण ही नेता जी से अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे थे। एक समय पर ऐसा लगा भी कि ग्रामीण शांत हो रहे थे और वे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न भी होने देना चाहते थे। ठीक उसी वक्त, नेता जी के सामने नंबर बढ़ाने और भाटगिरी करने की फिराक में एक पेपर बाँटने वाला हॉकर बीच में आ गया। इस हॉकर ने आक्रोशित ग्रामीणों से बदतमीजी कर ली। हाकर की यह हरकत आग में घी डालने जैसी साबित हुई। आक्रोशित ग्रामीणों ने तत्काल ही अपनी सारी भड़ास इस हॉकर पर निकाल दी और उसकी जमकर पिटाई की। सूत्रों ने बताया कि हॉकर को कपड़े फटते तक मार खानी पड़ी। नेता जी और उनके चहेते इस माहौल की नज़ाकत को समझते हुए पहले ही निकल चुके थे, जिससे यह हॉकर ग्रामीणों के सीधे गुस्से का शिकार बन गया। उसको भाटगिरी महंगी पड़ गई और उसने अपनी चाटुकारिता का खामियाजा बुरी तरह पिटकर चुकाया।
नेता जी की खुली कलई, सियासत में मची खलबली
यह घटना केवल एक स्थानीय विवाद नहीं है, बल्कि यह नेता जी की निष्क्रिय कार्यप्रणाली के प्रति जनता के गहरे असंतोष का प्रमाण है। सुकरी की जनता का आरोप है कि नेता जी ने चुनाव जीतने के बाद मुंह नहीं दिखाया और अब लंबी चौड़ी फेंकने आए थे।
सूत्रों का कहना है कि इस घटना ने नेता जी की कलई खोल दी है। उनकी चुनावी जीत के बाद जनता से दूरी, निष्क्रियता, और सिर्फ भाषणों पर निर्भर रहने की रणनीति अब उनके लिए भारी पड़ गई है। ऊगली सुकरी की यह घटना जनप्रतिनिधियों को संदेश है कि जनता सिर्फ कोरे वादों या लंबी-चौड़ी बातों से संतुष्ट नहीं होगी, उन्हें धरातल पर काम चाहिए। यदि काम नहीं होगा, तो अगली सभा में ‘पगड़ी उछलना’ और ‘शर्ट फटना’ तय है।यह विवाद अब क्षेत्र की राजनीतिक सुर्खियों में छाया हुआ है और आने वाले दिनों में नेता जी की छवि और भविष्य की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
