अशोक शांडिल्य का भाई दद्दू वल्द धनसिंह ग्रामीणों को दे रहा खुली धमकी
दद्दू शाण्डिल्य ने धमकी देकर अप्रत्यक्ष रूप से ली गोली चलाने की जिम्मेदारी
पुलिस पर उठ रहे गंभीर सवाल
19 नवंबर को सिवनी की रेत खदान में हुए गोलीकांड ने अब एक बेहद गंभीर और नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर पहले से ही सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। प्राप्त रिपोर्ट और पुलिस के पास दर्ज एक गैर-संज्ञेय रिपोर्ट (NCR) के अनुसार, रेत ठेकेदारों को लगातार ब्लैकमेल करने और क्षेत्र में दहशत फैलाने के आरोपी अशोक शांडिल्य के भाई दद्दू वल्द धनसिंह शाण्डिल्य ने एक ग्रामीण को खुली धमकी दी है और अप्रत्यक्ष रूप से गोलीकांड की जिम्मेदारी भी ली है।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब क्षेत्र में लगातार यह खबरें प्रकाशित हो रही हैं कि रेत ठेकेदार अवैध ब्लैकमेलर, अपराधी तत्वों जैसे अशोक शांडिल्य, राजा चौहान, और राजा सोनी के कारण 2 अक्टूबर से अब तक अपनी करोड़ों की खदानों से रेत नहीं निकाल पा रहे हैं।
धमकी देते हुए अशोक के भाई दद्दू ने अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार किया की गोली उसने चलाया है
नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, देवगांव निवासी सुखदास आमाडारे (उम्र 52 वर्ष) ने 27 नवंबर, 2025 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। सुखदास ने बताया कि जब वह पंडियाछपारा से अपने घर जा रहा था, तो शाम करीब 5 बजे ग्राम बागडोगरी का दद्दू शांडिल्य मिला। दद्दू ने सुखदास को पुरानी बात को लेकर धमकाते हुए कहा, “अकेला घर का है, एक को गोली लगीं हैं समझ नहीं आया क्या।”
दद्दू ने न केवल मारने-पीटने की धमकी दी, बल्कि “देवगांव का कचरा मिटाने” की भी बात कही। पुलिस कार्यालय में दर्ज एनसीआर (जिसकी कॉपी कार्यालय के पास मौजूद है) में यह धमकी दर्ज है। दद्दू का यह बयान कि “एक को गोली लगीं हैं समझ नहीं आया क्या”—सीधे तौर पर 19 नवंबर की घटना से जुड़ा हुआ है।कानून के जानकारों की माने तो यह बयान केवल धमकी नहीं, बल्कि पुलिस को खुली चुनौती देते हुए गोलीकांड में अपनी या अपने गिरोह की संलिप्तता की अप्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति है। अब तो घटना के 10 दिन भी नहीं बीते हैं और गोली चलाने वालों के चेहरे खुद-ब-खुद बेनकाब होने लगे हैं।
सरकार को लग रहा करोड़ों का राजस्व चूना और पुलिस की ढीली कार्रवाई से हो रहे कई सवाल खड़े
रेत ठेकेदार कंपनी ने 2 अक्टूबर से वर्तमान दिनांक तक खदानों के लिए सरकार को लगभग चार करोड़ रुपए का राजस्व दिया है, लेकिन उपरोक्त ब्लैकमेलरों और गुंडई करने वालों के कारण वह रेत का एक कण भी नहीं निकाल पाई है। यह सीधा नुकसान सरकार के खजाने को हो रहा है।इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी के कर्मचारियों ने इन ब्लैकमेलरों की पहले ही शिकायत की थी, बावजूद इसके जब गोली चली, तो शिकायतकर्ता रेत कंपनी के कर्मचारियों को ही ‘गोली चलाने का आरोपी’ बनाकर जेल भेज दिया गया।वहीं, अशोक शांडिल्य, राजा चौहान, और राजा सोनी जैसे आरोपी, जिन पर 25 लाख रुपए की ब्लैकमेलिंग का आरोप है और जिनके कारण सरकार को करोड़ों का चूना लग रहा है, वे खुलेआम क्षेत्र में घूम रहे हैं। यह स्थिति सिवनी पुलिस की कार्रवाई पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
क्या सिवनी पुलिस अब भी मूकदर्शक बनी रहेगी?
दद्दू शांडिल्य द्वारा खुलेआम दी गई धमकी ने अब पुलिस के लिए यह पता लगाना मुश्किल नहीं है कि गोली किसने चलाई थी। इसके बावजूद, पुलिस द्वारा शिकायतकर्ता सुखदास को न्यायालय की शरण में जाने की राय देना स्थानीय लोगों को स्तब्ध कर रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अशोक शांडिल्य और उसके भाई सहित राजा सोनी, राजा चौहान क्षेत्र में यह एहसास करवा रहे हैं कि सिवनी पुलिस उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। यह कानून-व्यवस्था पर एक सीधा हमला है।
क्या पुलिस जांच कर मास्टरमाइंड की कर पायेगी पहचान ?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद, यह आवश्यक हो जाता है कि पुलिस तत्काल ठोस कदम उठाए।मामले की बारीकी से जाँच कर पुलिस को तत्काल गोलीकांड की जाँच के नए पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिसमें दद्दू शांडिल्य की धमकी एक महत्वपूर्ण सबूत है। मुख्य आरोपियों की भूमिका की जाँच करते हुए अशोक शांडिल्य, राजा चौहान, राजा सोनी, दद्दू और उसके सभी भाइयों की गोलीकांड के दिन की भूमिका की गहन जाँच होनी चाहिए, इस पूरे कांड के पीछे के मास्टरमाइंड का पता लगाने के लिए इन सभी प्रमुख संदिग्धों के मोबाइल फोन जप्त किए जाने चाहिए और उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का विश्लेषण होना चाहिए। इससे यह पता चल सकता है कि घटना के दिन वे कहाँ थे और किसके संपर्क में थे?पुलिस की शुरुआती कार्रवाई ने अपराधियों को यह विश्वास दिलाया है कि वे कानून से ऊपर हैं। अब समय आ गया है कि सिवनी पुलिस इस चुनौती को स्वीकार करे और क्षेत्र में व्याप्त दहशत के इस साम्राज्य को ध्वस्त करे। यदि पुलिस इस स्पष्ट सबूत के बाद भी कठोर कार्रवाई नहीं करती है, तो यह माना जाएगा कि पुलिसिया तंत्र स्वयं अपराधियों के आगे नतमस्तक हो चुका है।
जनता की नजरें अब सिवनी पुलिस के अगले कदम पर टिकी हैं।
