Home सिवनीं न्यूज़ बाप मरे अंधेरे में बेटा पावर हॉउस

बाप मरे अंधेरे में बेटा पावर हॉउस

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बाप मरे अंधेरे में बेटा पावर हॉउस

फर्जी मूल निवास बना शासन की बजा रहे घंटी,

नाम है उनका गुज्जी और टन्टी

सुधि पाठकों प्रकाशित किया जा रहा इस व्यंग्य को केवल पाठकों के मनोरंजन के लिए प्रकाशित किया जा रहा है,जिसका प्रकाशन क्रमशः पार्ट के रूप में  समय-समय पर प्रकाशित किया जाएगा, इस प्रकाशित व्यंग्य में इस्तेमाल हुये पात्र, नाम, स्थान, दिनांक, पूर्णतः काल्पनिक है, किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से इसका संबंध नहीं है, अगर किसी स्थान, नाम, दिनांक पात्र का मेल जीवित या मृत व्यक्ति से होता है तो हमे खेद है,इस व्यंग्य को प्रकाशित करने का उद्देश्य किसी की भावनाओ को आहत करना बिल्कुल भी नही है।

गुज्जी और टन्टी की निपचती चड्डी

 सिवनी से महज 10 से 15 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटे से गांव में कालखराम नामक किसान रहता था ,कालखराम के पिता माखन और दादा भी इसी गांव में रहते थे,इसी गांव में पिछली कई पीढ़ियों से कालखराम का घर और जमीन थी जो आज भी  है,कालखराम के दो लड़के है, बडे लड़के का नाम गुज्जी और छोटे लड़के का नाम टन्टी है,गुज्जी का जन्म मई के महीने में 1987 को  गांव में ही  हुआ था और टन्टी का जन्म अगस्त के महीने में1989 को गांव में ही हुआ था ,गुज्जी और टन्टी दोनो भाई का जन्म जिला अस्पताल में हुआ या घर पर हुआ इसका कोई सिजरा उस गांव की ग्राम पंचायत और आंगनवाड़ी में नही मिल रहा था तब से लगातार इस बात की खोज अभी तक चल रही है ,शोध का विषय यह भी है की दोनो भाई पैदा हुए थे या प्रकट हुए थे, जबकी कुछ लोगो का कहना है कि दोनों भाई सिवनीं जिले में ही पैदा हुए थे ,जिसके सबूत गांव के स्कूल की खुदाई में मिल चुके है,खैर आगे बढ़ते है कालखराम के दोनों लड़के  गुज्जी और टन्टी 1990 के दशक में दूरदर्शन चैनल पर आने वाले धारावाहिक शक्तिमान औऱ डिटेक्टिव व्योमकेश बक्शी देखने गांव के पटेल के घर जाया करते थे,शक्तिमान देखने के बाद दोनो भाई कभी शक्तिमान बनकर फटे लहंगे का कपड़ा गर्दन में बांध खपरे के बने पुश्तेनी घर की बरन से कूद जाते, तो कभी गांव भर दौड़ दौड़ कर उडने की कोसिस भी करते, जब भी दोनो भाई डिटेक्टिव व्योमकेश बक्शी धारावाहिक देखते तो जासूस की तरह दिमाग चलाकर किसके जानवरों ने किसकी फसल खाई ये पता लगाने की कोसिस में जुट जाते और इसी धारावाहिक में जब पुलिस को देखते तो अपने कमीज के कंधों पर मोगरे के फूल आलपिन से लगाकर कभी 1 सितारा,कभी 2 सितारा,कभी 3 सितारा बनाते और गांव के बाकी लड़को को चोर बनाकर चोर पुलिस का खेल खेलते हुए पुलिस का रोब दिखाते थे, गांव के बड़े बुजुर्ग गुज्जी और टन्टी में गुज्जी से ज्यादा टन्टी को बदमाश मानते थे ,टन्टी को अंगूठा चूसने की आदत थी जिसके चलते उसकी बीमारी का बहुत इलाज कराया गया,इलाज करवाकर टन्टी के पिता कालखराम थक चुका था,  टन्टी की नाक भी बिलबिलाती हुई बहती रहती थी ,जिस कारण गांव में उसे टन्टी के अलावा नकसुर्रा नाम से भी बुलाया जाता था ,जब कालखराम टन्टी के अंगूठा चूसने की आदत से थक गया जब गांव के ही एक बुजुर्ग ने सलाह दी की टन्टी को ढीली चड्डी पहनाया जाए और उस चड्डी में नाडा नहीं बांधा जाए, कालख राम ने ऐसा ही किया, गांव के दर्जी से एक बड़ी चड्डी सिलवाया और टन्टी को पहना दिया, अब टन्टी एक हाथ से चड्डी को संभालता था और दूसरे हाथ से बिलबिलाती हुई नाक पोछता था ,कई बार अंगूठा चूसने की लत के चलते बिलबिलाती हुई नाक पोछे  हाथ के अंगूठे को मुंह में डाल लेता , तो कई बार ढीली चड्डी पकड़े हुए  हाथ के अंगूठे को मुंह में डाल लेता था, यह भूल जाता था की हाथ से पकड़ी चड्डी छोड़ेगा तो पूरी दुकानदारी बगर जाएगी और जब भी धोखे में चड्डी पकड़े हाथ के अंगूठे को मुंह में डालता  तो ढीली चड्डी खिसक जाती और टन्टी की दुकानदारी गांव के अन्य साथी लड़कों के सामने बगर जाती थी जिसके चलते टन्टी को नगोड़ा  नाम से भी चिढ़ाया जाता था,आखिरकार बुजुर्ग द्वारा कहीं गई बात सच साबित हुई, ढीली चड्डी पहनकर भले ही कई बार टन्टी की दुकानदारी बगर गई  पर धीरे-धीरे टन्टी की मुंह में अंगूठा डालकर चूसने की आदत खत्म हो गई।

 पार्ट 2,क्रमशः जारी आगामी अंक में

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