2 दिन में शराब दुकान हटाई जाए – हाई कोर्ट
समाज की बुराई परंतु सरकार का फायदा वाला धंधा शराब कारोबार, जिसके फलने फूलने के लिए किसी शराब दुकानदार को नींबू मिर्ची टांगने की जरूरत नहीं है, सुबह होते ही नशाखोर की भीड़ राशन की दुकान के माफिक शराब दुकान में लग जाती है और रात को सोने के बाद प्रशासन से आंख मिचोली करते हुए चोरी से भी माल बिकता है, शहर के बुद्धिजीवी, समाज सेवक, पत्रकार जनता को जगाने का काम करते हैं और यह शराब ठेकेदार जनता को नशे में सुलाने का काम करते हैं, शराब दुकान की नई शराब नीति के तहत जबलपुर रोड, कचहरी चौक में चर्च के सामने के ठेके को नियम विरुद्ध चलाए जाने के संबंध में लगातार शहर के बुद्धिजीवियों ने विरोध किया ,समाज सेवक ने एक हफ्ता धरना दिया और कुछ पत्रकारों ने इस शराब दुकान को लेकर जमकर पत्रकारिता की पर ना ही प्रशासन के कान में जूं रेंगी और ना ही शराब ठेकेदारों ने नई आबकारी नीति का पालन किया ,गौर करने वाली बात यह है की फरवरी से अप्रैल के बीच में चले इस आंदोलन में जिले का कोई भी नेता इस शराब दुकान के विरोध में नहीं आया ,एकमात्र गोंडवाना ने इस शराब दुकान को लेकर हल्ला बोला था, जिन्हें वोट देकर चुनाव जितवाते हैं वे लोग आपके बच्चों की कितनी फिक्र करते हैं यह इस आंदोलन में दिखाई दिया, बहरहाल गलत गलत होता है इसका प्रमाण माननीय उच्च न्यायालय ने दे दिया और लताड़ लगाते हुए शराब ठेकेदारों की पिटीशन खारिज की गई और दो दिन के अंदर दुकान हटाने का फरमान जस्टिस विवेक अग्रवाल ने जारी कर दिया।
समाजसेवक,पत्रकार और बुद्धिजीवी की मेहनत रंग लाई
फरवरी 2023 में धीरे-धीरे नई शराब नीति को लेकर कचहरी चौक की दुकान को हटाने का मुद्दा गर्माते गया पहले पत्रकार फिर शहर की बुद्धिजीवी समाज सेवक और गोंडवाना पार्टी ने इस आंदोलन में हिस्सा लिया चुनिंदा लोगों को छोड़कर इस आंदोलन को ठंडा बस्ती में डालने के लिए अधिकतर लोगों ने इस गर्मी मुद्दे से मुंह मोड़ने की कोशिश की आपसी संबंध बोर्ड की राजनीति फाइनेंस का काम हर तरह से इन शराब ठेकेदारों से दबे कुचले लोग अपना सर नहीं उठा पाए यहां तक की प्रशासन भी इन शराब ठेकेदारों के सामने नतमस्तक था अलग-अलग टीम बनाकर अलग-अलग टीम से अलग-अलग नपाई कर एक ही दूरी को कई तरह से पेश करने में शराब ठेकेदार और प्रशासन के लोग लग रहे आखिरकार झूठी रिपोर्ट देकर माननीय हाईकोर्ट को गुमराह करते हुए शराब ठेकेदारों ने क्षणिक समय के लिए राहत टोपली पर जैसे ही माननीय हाई कोर्ट के रडार में शराब ठेकेदारों के द्वारा लगाई गई पिटीशन आई तेरे से खारिज करते हुए माननीय हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल जी ने दो दिन का समय देते हुए शराब दुकान हटाने का फरमान जारी कर दिया और पिटीशन को श्री से खरीद कर दिया यह खबर जैसे ही फैली शराब ठेकेदारों के चेहरे उतर गए जिन लोगों ने आंदोलन किया था उन्हें यह लगा कि सच की जीत हुई जिस कारण से लड़ रहे थे वह कारण सही था यह बात पटा हुई परंतु ऐसे लोग भी बधाई देते नजर आए तो इस आंदोलन में मुंह मोड़ते थे बाहर हाल प्रशासन के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है दो दिनों के अंदर आखिर शराब दुकानदार को नई जगह कहां और कैसे दिलाई जाए क्या माननीय हाईकोर्ट के फरमान को प्रशासन सजगता से लेते हुए 2 दिन में शराब दुकान हटा पाएगा या फिर मोटा राजा से मिलने के कारण उन्हें माननीय हाईकोर्ट के फरमान के आगे और समय दिया जाएगा।
न्यायपालिका है तो न्याय मिल गया वरना शराब ठेकेदार तो मनमानी कर ही रहे थे
कचहरी चौक की शराब दुकान का मामला फरवरी 2023 से चल रहा है,एनकेंन प्रकरण झूठा हलफनामा देकर माननीय हाई कोर्ट को गुमराह करते हुए आबकारी से हाथ मिलाकर शराब ठेकेदारों ने पैसे के बल पर स्थगन ले आए थे सरकार की शराब नीति को ताक पर रखते हुए शिक्षालय और देवालय के सामने से मंदिरालय नहीं हटाने की पुरजोर कोशिश कर लिए थे वह तो भला हो न्यायपालिका है और माननीय विवेक अग्रवाल जी जैसे न्यायाधीश न्याय करने बैठे हैं तो सच की जीत हो गई नई शराब नीति पर अमल करने की बात की गई वरना अगर न्यायपालिका नहीं होती तो यह शराब ठेकेदार आबकारी विभाग के साथ मिलकर तांडव मचा रहे होते
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