बुलाए थे तो आए थे, कांग्रेस की बाडी चरने नहीं आए ,जो जानवरों की तरह हाथ हिला कर हकाले हो
पत्रकार हित को लेकर बड़ी-बड़ी बात करने वाली कांग्रेस पार्टी, जो पत्रकारों के भरोसे सत्ता पार्टी पर निशाना लगाने की बात करती है, उसी कांग्रेस पार्टी के इंदिरा भवन में देश का चौथा स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारों की झकर उतारी गई,बताया जाता है कि पत्रकारों को प्रेस वार्ता के लिए कांग्रेस मीडिया प्रवक्ता के द्वारा२३ सितम्बर शाम के 6:00 बजे इंदिरा भवन बुलाया गया था,पर पत्रकारों को इंदिरा भवन की सीढ़ी भी नहीं चढ़ने दिया गया ,इंदिरा भवन के बालकनी में खड़े होकर मीडिया प्रभारी के द्वारा पत्रकारों को नीचे से ही हाथ हिलाकर बैरंग वापस लौटाया गया, यह सब नजारा देख ऐसा लग रहा था की बंधवा मजदूर काम पर बुलाए गए थे और मालिक समय पर नहीं पहुंच पाए,तो काम नही होगा, इसीलिए बंधुआ मजदूरों को बैरंग वापस लौटा दिया गया ,इंदिरा भवन की सीढी भी नहीं चढ़ने दिया गया, इतनी घोर बेज्जती पत्रकारों की करने के बाद सवाल यह पैदा होता है की क्या आज सुरेश पचौरी की प्रेस वार्ता में कोई पत्रकार अपनी बेइज्जती करवाने जाएगा? अगर कोई पत्रकार मालकाना हुक्मरान मानकर मुह दिखाई पर जाता है तो क्या यह माना जा सकता है कि उसकी आंखों में पानी नहीं बचा है ,ऐसी पत्रकारों के बीच चर्चा चल रही थी,कुछ पत्रकारों के आक्रोश के सामने जन आक्रोश रैली भी फीकी दिखाई दे रही थी, अब देखना यह है कि आज कौन कौन अपनी बेज्जती करवाने जाता है। वैसे सिवनी न्यूज़ की पैनी नज़र बनी रहेगी
इंदिरा भवन की सीढ़ी भी नही चढ़ने दिया गया पत्रकारों को
कुछ लिखने वाले पत्रकार इंदिरा भवन के सामने जैसे ही पहुंचे तो कुछ दिखने वाले पत्रकार इंदिरा भवन के नीचे ही कुर्सियों में बैठे दिखाई दिए और उन्होंने बताया की रैली बालाघाट में है अभी सिवनी नहीं आई है, इसीलिए प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं होगी जबरन बुलाकर समय खराब किया गया है, हम आपको बता दिन की यह समय अखबार नवीशों के लिए बहुत कीमती समय होता है इस समय पर राष्ट्रीय और प्रादेशिक अखबार जो सिवनी में बाहर से आते हैं उनकी फाइल पहुंचाने का समय रहता है और मॉर्निंग में आने वाले लोकल अखबार के पत्रकारों के लिए भी यह समय कीमती रहता है क्योंकि इसी समय पर खबरें बनाई जाती है,ऐसे में पत्रकारों को बंधुआ मजदूर समझने वाली कांग्रेस ने पत्रकारों का उपहास बनाया और पत्रकार बैरंग वापस लौटे ,यहां तक की पत्रकारों को इंदिरा भवन की सीढी भी नहीं चढ़ने दिया गया ,इतनी जघन्य बेइज्जती करने के बाद कांग्रेस अगर पत्रकारों का हितेषी बनने की बात करती है तो यह बात बेमानी सी लगती है।
कांग्रेस ने पत्रकारों को समझा बंधुआ मजदूर
कुछ नकली पत्रकारों के कारण पत्रकारिता का स्तर गिरा है,कांग्रेस पत्रकारिता के गिरते स्तर को अच्छी तरह भाप गई है,तभी तो कांग्रेस सभी पत्रकारों को एक ही तराजू में तोलती है,परिणाम यह है कि कांग्रेस पत्रकारों को बंधुआ मजदूर समझती है ,दोपहर में सोशल मीडिया में मैसेज कर शाम के 6:00 बजे पत्रकारवार्ता के लिए आमंत्रित करती है और जब पत्रकार अपना काम धाम छोड़कर अपना पत्रकारिता का धर्म निभाने के लिए निश्चित समय पर ,निश्चित स्थान पर पहुंचते हैं तो पता चलता है की प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं है और पत्रकारों को बंधवा मजदूरों की तरह इस्तेमाल करने वाली कांग्रेस पत्रकारवार्ता की जगह तक भी नहीं पहुंचने देती और सीढ़ी चढ़ने के पहले ही हाथ हिलाकर ऐसे हकालती है जैसे किसी की हरी भरी बड़ी को चरने के लिए जानवर आ गए हो ,इतनी बेइज्जती करने के बाद अगर कांग्रेस पत्रकारों का हितेषी बनने की कोशिश करती है,तो समझ जाओ की मुह में राम और बगल में छुरी है।
अब देखना ये है कि आज की पत्रकार वार्ता में कितने पत्रकार अपनी बेइज्जती कराने जाते है
जिले में दर्जनों पत्रकार संगठन कार्यरत हैं और हर संगठन में दर्जनों और सैकड़ो की तादाद में पत्रकार भी सम्मिलित हैं जो अपने अहम के लिए कभी किसी अधिकारी से भिड़ जाते हैं तो कभी खबरों के लिए जी जान लगा देते हैं हम पत्रकारों की बात कर रहे हैं बाकी नकली पत्रकार जिन्हें जो उपमा दी जाती है वह स्वयं समझदार हैं ,परंतु जितने भी संगठन सुचारू रूप से चल रहे हैं वह पत्रकारों के सम्मान के लिए अगर लड़ते हैं वाकई पत्रकारों का सम्मान करते हैं तो क्या पत्रकारों को बेइज्जत करने वाले लोगों की पत्रकार वार्ता में जाना चाहिए? क्या पत्रकार ऐसी जगह में दोबारा अपनी बेइज्जती करवाने जाएंगे जहां पत्रकारों को जानवरों की तरह हाथ हिलाकर हकाला गया है ,अब देखना यह है कि आज प्रेस कॉन्फ्रेंस होने की है और इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कितने लोग बेइज्जत होने जाते हैं।, वाकई पत्रकार पानी वाले हैं और वाकई पत्रकारिता करते हैं और इनकी पत्रकारिता में ताकत है तो पत्रकारों को बेइज्जत करने वाले लोग जब तक पत्रकारों से माफ़ी ना मांग ले पत्रकारों को जाना नहीं चाहिए, पर यह उन्हीं के ऊपर लागू होता है जो वाकई पत्रकार हैं और जो वाकई ईमान का पानी लेकर चलते हैं