देवी के कदम पड़ने के बाद नगर परिषद के वैसे ही हाल है,जैसे किसी खोडल के दूध देने वाली गाय पर हाथ रख देने से गाय दूध देना छोड़ देती है
नगर परिषद के कर्मचारियों से खुद के खेत के भुट्टे तुड़वाया देवी ने
नगर परिषद को दुधारू गाय समझने वाले नगर परिषद अध्यक्ष पति, विधायक प्रतिनिधि देवी सिंह बघेल भले ही अपनी पत्नी पद की आड़ में नगर परिषद के अंदर घुस पाए हैं, उनकी गैर मौजूदगी में ,नगर परिषद अधिकारी की गैर मौजूदगी में, नगर परिषद परिसर का इस्तेमाल कर नंगे भ्रष्टाचार को छिपाने अपने ही जैसे लोगो को 2000 में खरीदकर नंगे भ्रष्टाचार को ईमानदारी का चोला पहनाने की कोशिश करने वाले , पत्नी को संबल बनाने की बड़ी-बड़ी बात करने वाले देवी सिंह बघेल अब सवालों के कटघरे में खड़े होते हुए दिखाई दे रहे हैं बताया जाता है कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें देवी सिंह बघेल अपने ही मुह से अपनी ईमानदारी बरसात की बूंद के जैसे टपका रहे है, देवी सिंह बघेल की ईमानदारी को देखते हुए बेईमानी और भ्रष्टाचार कोसों दूर जा रहा है ऐसा लगता है, पर अफसोस इस बात का दूर दूर तक कोई लेना देना नही है, क्योंकि वीडियो देवी की झूठमूठ की ईमानदारी का राज खोलता है,हालांकि वायरल वीडियो की सिवनी न्यूज़ पुष्टि नहीं करता है पर वीडियो में दिखाए गए लोग और नगर परिषद के जानकार यह बता रहे हैं की वीडियो में दिखाई दे रहे कर्मचारी नगर परिषद के कर्मचारी हैं और नगर परिषद अध्यक्ष पति देवी सिंह बघेल के खेत में भुट्टे तोड़ रहे हैं, देवी सिंह बघेल के खेत के इस वीडियो को देखने के बाद देवी सिंह बघेल की कथनी और करनी साफ दिखाई दे रही है कि उन्होंने संबल पत्नी को बनाया है या खुद को संबल प्रदान किया है।
ईमानदारी का डंका पीटने वाले देवी सिंह बघेल और अध्यक्ष पत्नी के रहते बहुत हुआ है भ्रष्टाचार
अपने आप को ईमानदार बताने वाले देवी सिंह बघेल यह भूल गए की 2000 के कपड़े पहनाने से उनके द्वारा किया गया भ्रष्टाचार को नहीं ढाका जा सकता, नगर परिषद के जानकारों की माने तो परिषद में पार्षद को परिषद के द्वारा कराए गए कार्यों का विवरण जानने का अधिकार होता है, क्योंकि वह जन आशीर्वाद से जनता के चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं बताया जाता है कि अगस्त 2 तारीख से लेखा-जोखा मांगने के लिए पार्षदों के द्वारा आवेदन लगा है पर आज दिनांक तक पार्षदों को किसी भी प्रकार की कोई जानकारी नहीं दी गई है लगभग डेढ़ महीने हो गए जानकारी पार्षदों से छुपाई जा रही है वाकई देवी सिंह बघेल और नगर परिषद अध्यक्ष इतनी ईमानदार हैं तो पार्षदों को अभी तक लेखा-जोखा क्यों नहीं दिया गया?यह सवाल देवी सिंह बघेल के द्वारा छाती पीटकर ईमानदारी का डंका पीटने वाली बात पर सवाल पैदा करती है, पार्षदों का तो यह कहना है की कम दामों के समान को अधिक दामों में खरीदा गया है और जब बैठक होती है तो पार्षदों को बोलते नहीं दिया जाता है बल्कि उन्हें केवल साइन करने के लिए बुलाया जाता है इसीलिए पार्षद अब बैठकों में जाना पसंद नहीं करते हैं, हिटलर शाही चलाते हुए देवी सिंह बघेल ने बहुत से ऐसे काम किए हैं जिसे लेकर नगर परिषद की स्थिति बड़ी दयनीय हो गई है।
इनकी कमीशन की भूख से पार्षद,नगर जनता,ठेकेदार, अधिकारी है परेशान
बताया जाता है की नगर परिषद बनने के बाद नए सीएमओ नरूला आए जिन्होंने देवी सिंह बघेल से परेशान होकर कंपलसरी रिटायरमेंट ले लिया, सूत्र बताते है कि सीएमओ नरूला को यह डर था कि नगर परिषद में जिस प्रकार का भ्रष्टाचार चल रहा है कल को अगर जांच हुई तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है,क्योंकि आए दिन cmo पर मनमुताबिक कागजों में हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया जाता था ,इसी प्रकार सब इंजीनियर का को भी सस्पेंड करवाया गया क्योंकि वह देवी सिंह बघेल की मर्जी के हिसाब से काम नहीं करता था ,उससे दबाव बनाकर कमीशन के चक्कर में अधिक का बिल पास करने के लिए कहा जाता था और सब इंजीनियर बेईमानी नहीं करना चाहते थे और वह देवी सिंह बघेल के मनमर्जी से नहीं चल पाए इसीलिए देवी सिंह बघेल सारा ठीकरा सब इंजीनियर के ऊपर फोड़ते हुए नजर भी आए ,आखिरकार राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करते हुए इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया।
सारी खुदाई एक तरफ जोरु का भाई एक तरफ
सूत्र बताते है की नगर परिषद अध्यक्ष,उनका पति देवी बघेल और उनका साला काशीराम बघेल यह तीनों मिलकर नगर परिषद को चूना लगा रहे हैं जो किसी और के नाम पर कंस्ट्रक्शन कंपनी से ठेका लेते है पर काम काशीराम बघेल ही करते है, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 3256664 रुपए का टेंडर फरवरी माह में निकला था जो आदेगांव के नितिन पाटकर ठेकेदार को दिया गया पर इसके बाद इस ठेके को पेटी कांट्रेक्टर के रूप में दूसरे के नाम पर देवी सिंह के साले काशीराम ने ले लिया , जो भ्रस्टाचार की भेंट चढ़ा,बताया जाता है की एक से डेढ़ करोड़ रुपए का काम नितिन पाटकर ठेकेदार को दिया गया है और यह पूरे काम पेटी में काशीराम बघेल कर रहा है ऐसे में इन्होंने दो रोड बनाई जिसमें एक रोड आवास कॉलोनी में बनी है जिसका टी एस सब इंजीनियर ने नहीं किया तो जीजा साले ने मिलकर इस रोड का टी एस कर लिए, सब इंजीनियर के रहते जो तकनीकी अधिकारी होता है राय नहीं ली गई फलस्वरुप रोड तो बना दी गई पर रोड भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी और चटक गई जिसके कारण उस रोड का मूल्यांकन नहीं हुआ और काशीराम बघेल का पेमेंट अटक गया, इसी तरह एक रोड मलारी में भी बनी और वहां भी ऐसा भी भ्रष्टाचार हुआ जिसके चलते पेमेंट रुका हुआ है अब ऐसे में जहां रोड भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ,रोड चटक गई पर वहां पर देवी सिंह बघेल ने कोई ऑब्जेक्शन रोड की गुणवत्ता को लेकर नहीं उठाये,पर रेलवे स्टेशन की रोड जिसका ठेका इंदौर की एक कंपनी को मिला था उसे रोड बनाते समय इतना परेशान किया गया और गुणवत्ता के लिए बोल बोल कर कमीशन की डिमांड रखी गई कि ठेकेदार रोड छोड़कर भाग गया, टेंडर को नगर परिषद ने निरस्त कर दिया, दोबारा टेंडर निकाला गया, सवाल यह पैदा होता है कि बाहर से आए ठेकेदार को कमीशन के लिए इतना परेशान करना कि वह रोड छोड़कर भाग जाए और उस टेंडर को निरस्त कर दिया जाए तो फिर जहां गुणवत्ताहीन काम हुआ है, रोड चटक गई है, भ्रष्टाचार हुआ है ,इन टेंडरों को निरस्त क्यों नहीं किया गया ,कोई कार्यवाही क्यों नही की गई, अब जन चर्चा का माहौल बना हुआ है की देवी सिंह बघेल के साले ने काम किया है इसीलिए उसे निरस्त नहीं किया गया, न कार्यवाही की गई ,देवी सिंह और उनकी अध्यक्ष पत्नी वाकई ईमानदार है तो करे कार्यवाही ,बताया जाता है इन सब कामों में जो जेसीबी चली वह काशीराम बघेल या उसके परिजन की है जिसका बिल अभी पास नहीं हुआ है जब जानकारी उठाई गई तो पता चला कि सब इंजीनियर ने मूल्यांकन नही किया है उनका कहना है कि जेसीबी कम चली है और बिल भारी भरकम लगा दिया गया है जिसका बिल पास नहीं करने पर सब इंजीनियर को मारने पीटने की धमकी भी दिया गया जिसके चलते सब इंजीनियर ने ऑफिस आना बंद कर दिया और उसे सस्पेंड कर दिया गया, देवी सिंह बघेल की करतूत पर गौर किया जाए तो कमीशन खाने में जो उसकी मदद करेगा वही नगर परिषद में रह सकता है नहीं तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
नगर परिषद को बेइज्जत करवाने के बाद भी नाक ऊंची कर घूम रहा है देवी सिंह
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नगर परिषद के सामने एक टीन सेड् बनवाया गया था जो लगभग 1 लाख रुपए की लागत में बना था, जिसका बिल ढाई लाख रुपये पास करवाने के लिए देवी सिंह बघेल सब इंजीनियर को मूल्यांकन के लिए दबाव बना रहा था परंतु सब इंजीनियर ने देवी सिंह बघेल की बात ना मानते हुए एक लाख की टीन सेड् का मूल्यांकन ढाई लाख रुपये करने से मना कर दिया ,जिसके चलते टीन सेड् वाले का बिल लगभग 6 महीने तक नहीं निकला, मजबूरन तीन सेड वाले ने नगर परिषद के सामने लगे टीन सेड को उखाड़ कर वापस ले जा लिया, इससे शर्मनाक स्थिति और क्या होगी की देवी सिंह बघेल के विधायक प्रतिनिधि रहते उनकी पत्नी के नगर परिषद के अध्यक्ष रहते नगर परिषद के सामने से कर्जदार आकर अपना सामान उखाड़ कर ले जाते हैं, नगर परिषद की घोर बेइज्जती दोनों पति-पत्नी मिलकर करवाते हैं और उसके बाद नाक ऊंची कर सीना चौड़ा कर अपने आप को ईमानदार बताते हैं।
देवी सिंह बघेल की करतूत विधायक के लिए खड़ी कर सकती है मुसीबत
जिस प्रकार देवी सिंह बघेल नगर परिषद का विधायक प्रतिनिधि होने का दम भरते हैं और उनकी पत्नी नगर परिषद की अध्यक्ष है परंतु पूरी अध्यक्षगिरी देवी सिंह बघेल चलाते हैं जिसके चलते पार्षद देवी सिंह बघेल के खिलाफ लामबद्ध होकर रोड में उतर आए हैं और 22 सितंबर को नगर परिषद का घेराव भी करने वाले है देवी सिंह बघेल के द्वारा भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी के मामले को लेकर जब पार्षद रोड पर उतर आए हैं तो जनता के सामने भाजपा का कौनसा चेहरा सामने आएगा, कुल मिलाकर आने वाले समय में विधानसभा चुनाव है और इस विधानसभा चुनाव में देवी सिंह बघेल की करतूत के कारण विधायक राकेश पाल को कड़ी चुनौती झेलनी पड़ सकती है।