नारी शक्ति ,मातृ शक्ति ,महिला विशेष अधिकार, पुरुषों के बराबर का अधिकार न जाने और क्या-क्या बोलकर सरकार महिलाओं को वोट के लिए रिझाने की बात करती है, परंतु वास्तविक स्थिति बहुत अलग है, यहां महिलाएं अपने अधिकार, अपने ऊपर हुए शोषण को लेकर न्याय के लिए आज भी प्रशासन के चक्कर काटती हैं, इसका जिताजागता उदाहरण विगत एक महीने से नगर की बेटी अपने साथ हुए अत्याचार को लेकर शिकायत करने घूम रही थी,पर ना ही प्रशासन ने उसका साथ दिया, ना सरकार के नुमाइंदों ने, नाही महिलाओं के नाम पर चलने वाले संगठनों ने,मजबूरन हिम्मत दिखाकर जमाने से लड झगड़कर,काफी मशक्कत के बाद पुलिसकर्मी रूपेंद्र पाल वल्द लेखराम पाल, निवासी चोर गांव के खिलाफ मामला तो पंजीबद करा लिया पर पुलिस के रवैये को लेकर शोषित महिला अभी भी असंतुष्ट नजर आ रही है ,उसके कहे अनुसार वह संतुष्ट इसीलिए नहीं है, क्योंकि उसने जो आवेदन दिया था उस आवेदन पर पुलिस ने कार्यवाही ना करते हुए अपनी मनमर्जी से मामला पंजीबद किया है ,शोषित महिला का कहना है कि पुलिस अपने विभाग की छवि को बचाने के लिए मेरे साथ दोहरा रवैया अपना रही है ,अब जबकि मामला पंजीबद्ध हो गया है तो श्रेय लेने के लिए कुछ लोग सामने भी आने लगे हैं, पर शोषित महिला का कहना है की इन सब मामले में मेरा साथ ना जिले के नेताओं ने दिया, ना ही जिले के पुलिस प्रशासन ने दिया और ना ही महिला संगठन ने,महिला संगठन को लेकर जब चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि जिले में किसी भी महिला संगठन से कोई भी मदद नहीं मिली है, बहरहाल मामला पंजीबद हो चुका है पर आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और पुलिस अभी भी आरोपी के ऊपर विभागीय कार्यवाही नहीं कर रही है।
आरोपित बलात्कारी रूपेंद्र पाल की नहीं हुई अभी तक गिरफ्तारी
ज्ञात हो की वर्दी का दुरुपयोग करते हुए बदमाशी का परिचय दे रूपेंद्र पाल वल्द लेख रामपाल निवासी चोर गांव ,सिवनीं पुलिस में आरक्षक के पद पर पदस्थ है जिसने एक भोली भाली नगर की युवती को अपने प्रेम जाल में फंसाकर शादी का प्रलोभन दे उसके साथ शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण किया और जब उक्त युवती के द्वारा शादी की बात की गई तो उसे और उसके बच्चे को जान से मारने की धमकी दिया ,जिसकी शिकायत लेकर शोषित महिला पिछले एक महीने से पुलिस ,नेता , महिला संगठन और सरकार से दरकर करते रही पर महिला के साथ हुए जघन्य अपराध में भी त्वरित कार्यवाही नही हुई ,लगभग एक महीना कार्यवाही को लग गया ,देर सबेर मजबूरन पुलिस को मामला तो दर्ज करना पड़ा पर महिला पुलिस थाना के कर्मचारी शोषित महिला को उसकी शिकायत के अनुसार मामला दर्ज करने में संतुष्ट नहीं कर पाए ,क्योंकि आरोपित रूपेंद्र पाल पुलिस का नुमाइंदा है अब जबकि मामला पंजीबद्ध हो चुका है तो अभी तक पुलिस ने रूपेंद्र पाल को गिरफ्तार नहीं किया है, जबकि यही मामला अगर किसी सिविलियन के ऊपर दर्ज होता तो पुलिस उसके दरवाजे तोड़ती नजर आती, पर धन्य है ऐसी पुलिस जो लगातार अपने ऊपर लग रहे दाग झेल रही है पुलिस का नाम भी खराब कर रही है और प्रार्थी को मानसिक प्रताड़ना भी दे रही है, बहरहाल पुलिस 376 के आरोपी रूपेंद्र पाल को गिरफ्तार करने में अभी भी नाकाम है।
खाकी वर्दी को दागदार करने वाला अभी भी नहीं हुआ है निलंबित
पुलिस की खाकी वर्दी पहनकर देशभक्ति जन सेवा की कसम खाकर देश की जनता की रखवाली करने का दम भरने वाली पुलिस का एक नुमाइंदा खाकी वर्दी की आड़ में महिला का शोषण करता है महिला इस आरोपित बलात्कारी के खिलाफ जमाने से लड़कर मामला पंजीबद कराती है और पुलिस खाकी वर्दी पर दाग लगाने वाले रूपेंद्र पाल वल्द लेख राम पाल निवासी चोर गांव को अभी तक निलंबित नहीं करती है, इसे विडंबना ही कहा जाएगा, जबकि इतनी हिम्मत दिखाने के बाद महिला अपने अधिकारों के लिए ,अपने ऊपर हुए अन्याय के लिए सारी दुनिया से लड़कर शोषण करने वाले के खिलाफ डटकर मुकाबला करती है और पुलिस उसे हिम्मत देने की बजाय उसे तोड़ने की कोशिश कर रही है ,जबकि पुलिस को आरोपित बलात्कारी रूपेंद्र पाल वल्द लेखराम पाल निवासी चोरगांव को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डालना चाहिए था,ताकि हिम्मत दिखाने वाली महिला को यह संतुष्टि मिल सके कि कानून उसके साथ है ,पुलिस प्रशासन उसके साथ है और यह सब देख अन्य शोषित महिलाओं को भी हिम्मत मिले पर यह सभी बातें पुलिस की कार्यवाही को देखते हुए बेमानी साबित हो रही है, अमूमन यह देखा गया है की 100 -50 के लेनदेन में पुलिस कर्मी की शिकायत होने पर उसे सस्पेंड कर दिया जाता है पर बलात्कार जैसे जघन्य अपराध करने वाले को अभी तक विभाग ने सस्पेंड नहीं किया है इसे क्या कहा जाए।
महिला के नाम पर चंदा बटोरने वाले संगठनों ने भी चुप्पी साधी
जिले में महिलाओं के नाम पर संगठन चलाने वाले संगठनों ने भी इस मामले को लेकर चुप्पी साधी हुई है यह मामला सुर्खियों में आये लगभग एक महीना हो गया ,जिले के चंद अखबारों में यह खबर छपी ,कुछ न्यूज़ चैनल ने शोषित महिला का वीडियो भी चलाया, यहां तक की सिवनी न्यूज़ कार्यालय से एक दो महिला संगठनों को फोन भी लगाया गया ,परंतु उन्होंने अपना पल्ला झाड़ने हुए यह बता दिया की एसपी साहब से बात हो गई है सवाल यह पैदा होता है की महिला संगठन के नाम पर चंदा बटोरने वाले संगठन क्या बैनर लगाकर वाहवाही लूटने के लिए काम कर रहे हैं? जबकि पिछले 10 वर्षों का इतिहास उठाकर देख लिया जाए तो ऐसी कोई भी महिला नहीं है जिसको लेकर इन महिला संगठनों ने लड़ाई लड़ी हो ,सूत्र बताते हैं कि प्रशासन और नेताओं के सामने विरोध का स्वर यह महिला संगठन नहीं उठा सकते क्योंकि इन संगठनों को वाहवाही लूटने वाले बड़े कार्यक्रम करने के लिए चंदा भी बटोरना पड़ता है ,तो फिर दोगली बातें करते हुए महिलाओं का नाम लेकर संगठन चलाने वालों को जिले की जनता क्या कहेगी?महिला संगठन का लोहा तो तब माना जाता जब यह महिला संगठन ऐसी शोषण का शिकार महिलाओं को लेकर प्रशासन से अड़ते, उन्हें न्याय और हक दिलाने के लिए डटकर सरकार और प्रशासन को कटघरे में खड़े करते, आंदोलन करते, रोड में उतरते तो मानते कि यह संगठन महिलाओं के हित के लिए लड़ता है, इन संगठनों को महिलाओं की सुसाइड या मर्डर होने के बाद मोमबत्ती लेकर सड़क पर देखा जा सकता है पर उन शोषित महिलाओं के जिंदा रहते खास कर जिले की महिलाओं को इन संगठनों ने कभी अपने पद का उपयोग करते हुए उनको न्याय नहीं दिलवाया ,ऐसे में इन महिला संगठनों का होना और नहीं होना सिवनी जिले के लिए तो बराबर है।
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