Home सिवनीं न्यूज़ बिसेन मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल है आयुष्मान योजना से पंजीकृत

बिसेन मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल है आयुष्मान योजना से पंजीकृत

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बिसेन मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल है आयुष्मान योजना से पंजीकृत

डॉ लोकेश बिसेन ने बताया कि आखिर क्या है आयुष्मान कार्ड को लेकर जनता में भ्रम

आयुष्मान कार्ड को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां फैली हुई है जिसके चलते आयुष्मान कार्ड धारी भ्रम में रहते हैं परेशान होते हैं और प्राइवेट हॉस्पिटल के ऊपर भी तरह-तरह के आरोप लगते हैं जबकि हकीकत यह है की आयुष्मान कार्ड में 5 लाख रुपए तक का इलाज फ्री होता है पर उसमें बहुत से नियम और शर्तें लागू होती है, जिसकी जानकारी आम जनता को नहीं है, उन्हें ऐसा लगता है कि अगर उन्होंने आयुष्मान कार्ड बनवा लिया है तो उन्हें हर प्रकार का इलाज मुफ्त मिलेगा, यह बात सही है कि 5 लाख तक का इलाज फ्री है,पर बहुत सी तकनीकी जानकारी न होने की वजह से परेशानी बनती है, हम आपको बताते हैं की असल वजह क्या है, किस कारण जनता भ्रमित होती है, और तरह-तरह के आरोप कभी सरकार पर तो कभी डॉक्टर पर लगाए जाते हैं।

आयुष्मान कार्ड के तकनीकी नियम क्या है

जानकारों की माने तो आयुष्मान कार्ड को तीन तकनीकी वर्गों में बांटा गया है,आयुष्मान कार्ड से इलाज के 3 खंड बनाये गए है,जैसे शासकीय अस्पताल ट्रस्ट के अस्पताल और प्राइवेट अस्पताल इन तीनों को अलग-अलग बीमारियों के लिए अलग-अलग कैटेगरी में बांटकर कोड दिया गया है जिन कोड़ो के आधार पर इन अस्पतालों को इलाज करने की परमिशन दी गई है, अगर उन कोड़ो के अंतर्गत इन अस्पतालों में मरीज जाता है तो सत् प्रतिशत उनका इलाज निशुल्क होता है, क्योंकि जिन बीमारी को लेकर मरीज अस्पताल में आता है उस बीमारी का विशेष कोड जो सरकार के द्वारा आवंटित किया गया है ,उस कोड को भरकर आवेदन अस्पताल के द्वारा भेजा जाता है, और वह कोड बीमारी के अंतर्गत उस अस्पताल में पंजीकृत है तो मरीज का इलाज वहां फ्री हो जाता है,

बिसेन मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल भी है आयुष्मान से पंजीकृत

सिवनी में बेसिन मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल भी आयुष्मान योजना के तहत पंजीकृत है इसके संचालक डॉक्टर लोकेश बिसेन से जब चर्चा की गई तो उन्होंने बताया  की 5 लाख तक का इलाज साल भर के लिए फ्री होता है हर बीमारी के लिए रेट निर्धारित है ,जैसे जांघ की हड्डी अगर टूट गई हो तो सरकार इसका 22000 अस्पताल को देती है , अगर अस्पताल प्राइवेट हो तो यह इलाज लगभग 30000 में पूरा होता है प्राइवेट अस्पताल  सर्जन फीस ,भरती चार्ज और अन्य फीस को नजर अंदाज इसीलिए कर देते है, ताकि गरीबों का फायदा हो जाए और अस्पताल में मरीज की संख्या बढ़ जाए ,सही मायने में आयुष्मान कार्ड से प्राइवेट अस्पताल को नुकसान ही होता है पर मरीज को फायदा और मरीज की संख्या डॉक्टर को मिल जाती है इसीलिए प्राइवेट अस्पताल यह सुविधा शासन के नियम अनुसार दे देते हैं, और इसी कारण अस्पताल आयुष्मान से पंजीकृत होते हैं, डॉ बिसेन ने बताया कि हर ऑपरेशन प्राइवेट अस्पताल के आयुष्मान में कोड नहीं होते हैं, अगर अंतड़ियो  में छाले होकर फट जाए तो आयुष्मान कार्ड के अंतर्गत प्राइवेट अस्पताल के कोड में नही है तो  ऑपरेशन  नहीं होंगे,क्योंकि ये बड़ा ऑपरेशन होता है, जबकि  शासकीय अस्पताल और ट्रस्ट के अस्पताल में यह ऑपरेशन हो जाएगा,  प्राइवेट अस्पताल में यह नहीं होगा क्योंकि सरकार ने आयुष्मान कार्ड को और बीमारी के इलाज को कैटेगरी में बांट दिया है उसी प्रकार सिजेरियन और डिलीवरी भी आयुष्मान कार्ड के अंतर्गत  होती है पर यह शासकीय अस्पताल और ट्रस्ट के अस्पताल में ही  हो पाएगी, प्राइवेट अस्पताल में नहीं ,आयुष्मान कार्ड के अनुसार सिजेरियन डिलीवरी का चार्ज 11000 रुपए दिया जाता है पर यह डिलीवरी ट्रस्ट अस्पताल या सरकारी अस्पताल में ही संभव है, प्राइवेट अस्पताल को यह सुविधा नहीं दी गई है, इसीलिए जो कोड और बीमारी की परमिशन प्राइवेट अस्पताल को दी गई है प्राइवेट अस्पताल केवल उन्ही बीमारियों का इलाज फ्री में कर सकता है अन्य बीमारी जो आयुष्मान कार्ड के अंतर्गत तो आती है पर प्राइवेट अस्पताल के कोड में नहीं है तो उसका पैसा प्राइवेट अस्पताल को मजबूरन लेना पड़ता है ,डॉ बिसेन ने बताया की ऑर्थोपेडिक का हर ऑपरेशन उनके अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से फ्री में किया जाता है ,उनके  आयुष्मान से पंजीकृत अस्पताल में ऑर्थोपेडिक के लगभग 10 पोलियो के ऑपरेशन निशुल्क किए गए हैं, अब ऐसे में आयुष्मान से जिन बीमारियों से संबंधित कोड प्राइवेट अस्पताल को दिए गए हैं उन बीमारियों का इलाज निशुल्क हो सकता है पर पूरी जानकारी न होने की वजह से मरीज परेशान होता है और आरोप अस्पताल पर लगते है।

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