Home सिवनीं न्यूज़ मुख्यमंत्री की भावनाओं पर पानी फेरती सिवनी पुलिस

मुख्यमंत्री की भावनाओं पर पानी फेरती सिवनी पुलिस

0
मुख्यमंत्री की भावनाओं पर पानी फेरती सिवनी पुलिस

मुख्यमंत्री जब भी मंच पर खड़े होकर माइक पकडते हैं तो उनका भाषण लाडली बहन, लाडली लक्ष्मी योजना से शुरू होता है और अपराधियों के ऊपर शिकंजा कसने की बात करते हैं किसी भी  मीटिंग में जब पुलिस विभाग को संबोधित करते हैं तो उन्हें यही बात प्राथमिकता से बोली जाती है कि महिला संबंधी अपराधों को त्वरित संज्ञान में लेते हुए कार्यवाही करना है विगत दिवस बैठक में आईजी साहब भी सिवनी जिले के थानेदारों को बुलवाकर यही कहा कि महिला संबंधी अपराधों में कोताही नहीं बरतना है इस प्रकार शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में महिलाओं के ऊपर अपराध न हो महिलाओं का शोषण ना हो और अगर ऐसा होता है तो अपराधी को बचाना नहीं है त्वरित कार्यवाही करते हुए महिला की न्याय दिलवाना है और अपराधी को जेल के पीछे पहुंचना है साथ ही महिला को सुरक्षा प्रदान करना है मुख्यमंत्री की भावना महिलाओं को लेकर बिल्कुल सही है परंतु उनकी भावनाओं पर पानी फेरता पुलिस विभाग इस बात को क्यों नहीं समझ रहा है ?वह क्यों मुख्यमंत्री की भावनाओं को पलिता लगाने की कोशिश कर रहा है ?अगर मुख्यमंत्री के नुमाइंदे सिवनी जिले में हैं वाकई मुख्यमंत्री की भावनाओं की कदर करते हैं तो एक बार पुलिस विभाग की तरफ नज़रें उठा कर देखें की किस प्रकार पुलिस विभाग महिलाओं के प्रति आज आसंवेदनशीलता का व्यवहार कर रहा है एक महिला पिछले 15 दिन से अपने साथ हुए दुराचार की शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय और महिला थाने के चक्कर काट रही है भाजपा कार्यालय में जाकर मीडिया के सामने जिला अध्यक्ष से शिकायत करती है जिला अध्यक्ष पुलिस अधीक्षक को फोन लगाते हैं पुलिस अधीक्षक महिला को चेंबर में बुलवाकर यह बोलते हैं कि आज प्राथमिकी  हो जाएगी, महिला थाना चले जाओ और जब महिला थाना, पीड़िता जाती है तो महिला थाना की निरीक्षक उसे लॉलीपॉप देते हुए बैरंग वापस लौटा देती है, महिलाओं के प्रति इतनी असंवेदनशीलता मुख्यमंत्री के द्वारा जनता से किए वादे को सिरे से खारिज करती है ,यह माना जा सकता है कि सरकार की रीति नीति तो महिलाओं के लिए ठीक है मुख्यमंत्री की सोच महिलाओं के लिए ठीक है परंतु उनके अधीनस्थ प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी शायद मुख्यमंत्री का कहना नहीं मानते हैं।

भाजपा जिला अध्यक्ष आलोक दुबे भी पुलिस के सामने पड़े बौने

भाजपा कार्यालय में प्रवेश वार्ता के दौरान पीड़ित युवती के द्वारा भाजपा जिला अध्यक्ष आलोक दुबे को अपने ऊपर हुए शोषण की शिकायत किए जाने के बाद आलोक दुबे के द्वारा पुलिस अधीक्षक को फोन लगाया गया था परंतु अभी तक पीड़िता की प्राथमिक की दर्ज नहीं हुई है पीड़िता आज भी दर-दर भटक रही है तो क्या यह माना जा सकता है कि सट्टा सरकार के नुमाइंदे भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सरकार की भावनाओं की कदर नहीं करते हैं या फिर सट्टा सरकार के नुमाइंदों की प्रशासनिक अधिकारी नहीं सुनते हैं जो भी है पर स्थित बहुत खराब है जहां कानून व्यवस्था मनमर्जी से चल रही है ऐसा प्रतीत होता है यह सब नजर जिले की मीडिया के सामने हुआ और आज मीडिया के पास केवल यही चर्चा चल रही है की आलोक दुबे पुलिस विभाग के सामने बौने साबित हो रहे हैं

औरतों के साथ बुरा बर्ताव करने वालों को मिले सार्वजनिक फांसी:शिवराज

महिला दिवस पर महिलाओं के खिलाफ दुर्व्यवहार करने वालों को सार्वजनिक फांसी देने की बात कही मुख्यमंत्री ने की थी,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक विवादित बयान दे दिया था उन्‍होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ गलत व्यवहार करने वालों को सबके सामने फांसी पर लटका दिया जाएगा,बताया जाता है कि भोपाल में एक कार्यक्रम में सीएम ने महिलाओं के लिए एक योजना की शुरुआत की. इसी दौरान उन्होंने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर कड़ा संदेश देते हुए कहा, ”महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वालों को सार्वजनिक रूप से लटका दिया जाएगा.’

कमलनाथ ने कहा था  प्रदेश में महिला उत्पीड़न रोकने  शिवराज सरकार विफल है

नाथ ने कहा कि सरकार की यह असंवेदनहीनता तब है जब पिछले 18 वर्षों में मध्यप्रदेश महिला अत्याचार बलात्कार के मामलों में देश में निरंतर प्रथम स्थान पर आता रहा है।  माफिया और अपराधी प्रदेश में बेखौफ हैं। प्रदेश के हालत बदतर हो रहे है।यह घटना प्रदेश में महिला सुरक्षा के दयनीय हालत बताती है।पूर्व मुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ कमलनाथ ने प्रदेश की शिवराज सरकार पर बड़ा बयान दिया था। कमलनाथ ने कहा था कि मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। शिवराज सरकार में अपराधियों के हौंसले इतने बुलंद है कि इंदौर के बीएम कॉलेज की प्राचार्या विमुक्ता शर्मा को दिन दहाड़े पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया था,कमलनाथ ने अपने बयान में कहा था कि घटना के आरोपी के संबंध में प्राचार्य द्वारा पुलिस को लिखित में शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई। इस पुलिसिया लापरवाही की कीमत विमुक्ता शर्मा को  अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी।नाथ ने कहा कि सरकार की यह असंवेदनहीनता तब है जब पिछले 18 वर्षों में मध्यप्रदेश महिला अत्याचार बलात्कार के मामलों में देश में निरंतर प्रथम स्थान पर आता रहा है।  इंदौर की घटना एक बड़ी घटना है। माफिया और अपराधी प्रदेश में बेखौफ हैं। प्रदेश के हालत बदतर हो रहे है।यह घटना प्रदेश में महिला सुरक्षा के दयनीय हालत बताती है।उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में महिला सुरक्षा की स्थिति बदतर हो चुकी है। प्रदेश तीन-चार साल की अबोध बालिका से लेकर वरिष्ठ महिला नागरिक तक कोई सुरक्षित नहीं है। कमलनाथ ने आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी समाज की महिलाओं के साथ आए दिन दुष्कर्म हो रहें हैं।आदिवासियों पर अत्याचार रोकने में भाजपा सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। महिला से गैंग रेप के मामले में मध्यप्रदेश सालों से पहले स्थान पर है। मध्यप्रदेश महिला आत्महत्या में  नंबर 1 है। और अब तो बाल अपराध में मध्यप्रदेश नंबर 1 आने लगा है। मध्यप्रदेश आदिवासी अपराध में शीर्ष पर है। सर्वाधिक दलित अपराध वाले राज्यों में मध्यप्रदेश शामिल है।मध्यप्रदेश की संस्कृति, मध्यप्रदेश के संस्कार, मध्यप्रदेश की मिट्टी और उसकी जड़ों से जुड़े होने की केवल नाटक नौटंकी रोज करने वाली सरकार 18 साल से महिलाओं, बच्चों और वंचितों की अस्मिता को क्यों नहीं सुरक्षित रख पा रही है? क्या 18 साल का समय व्यवस्था बनाने के लिये कम होता है?भाजपा सरकार को प्रदेश की 8.5 करोड़ जनता और मध्यप्रदेश के सम्मान की रत्ती भर भी चिंता होती तो 18 साल तक महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान देने में निरंतर असफल होने के बाद पद त्याग कर घर बैठ जाना चाहिए, परंतु लोकतंत्र की हत्या कर सौदे से सत्ता हड़पने वालों से सुराज और सुशाशन की उम्मीद बेमानी है। ऐसी सरकार को आगामी चुनाव में जनता उखाड़कर फेंकेगी।

ReplyForward

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here