Home सिवनीं न्यूज़ रूपेंद्र पाल के खिलाफ महिला पुलिस को नहीं मिल रही धारा

रूपेंद्र पाल के खिलाफ महिला पुलिस को नहीं मिल रही धारा

0
रूपेंद्र पाल के खिलाफ महिला पुलिस को नहीं मिल रही धारा

कप्तान के आदेश को खारिज करते महिला थाना प्रभारी

कार्यवाही के नाम पर महिला को लगवाए जा रहे हैं थाने के चक्कर

महिला सशक्तिकरण के नाम पर बड़ी-बड़ी बात करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा सरकार को एक बार सिवनी शहर की कानून व्यवस्था को देखना चाहिए कि किस तरह एक परेशान अबला अपने साथ हुए शारीरिक शोषण की शिकायत लेकर पिछले 15 दिनों से थाने के चक्कर काट रही है और वर्दी धारी महिला थाना की पुलिस नए-नए कानून बताकर उसे बहला फुसला रहे हैं सिवनीं की कानून व्यवस्था से परेशान होकर उक्त पीड़िता  ने उच्च अधिकारियों और सरकार के नुमाइंदों को शिकायत तो दे दिया साथ ही जिले की मीडिया के सामने आकर अपने बयान भी रख दिए ,भाजपा जिला अध्यक्ष के द्वारा पुलिस कप्तान को फोन भी लगा दिया गया, परंतु आज भी पीड़िता न्याय के लिए दर-दर भटक रही है ,पुलिस कप्तान ने पीड़िता के कागज पर अपनी मोहर लगाते हुए यह कह दिया कि महिला थाने चले जाओ ,मामला पंजीबद्ध हो जाएगा, पर महिला थाने में पदस्थ महिला निरीक्षक कप्तान की बातों को खारिज कर पीड़िता को यह कहते हुए हकाल दीया कि अभी तुम जाओ जब हमारी प्रक्रिया पूर्ण हो जाएगी हम तुम्हें फोन लगा कर बुला लेंगे , समाचार लिखे जाने तक थाने के इर्द-गिर्द  घूमती पीड़िता की दर्द भरी दास्तां में कहीं पर भी न्याय को लेकर संतुष्टि नही दिखाई दी, यह कैसी कानून व्यवस्था जहां एक महिला पुलिस कर्मी ,पीड़िता के दर्द को नहीं समझ पा रही है, पीड़िता इस आस में थाने के आसपास घूम रही है कि कब मैडम जी का फोन आ जाए और वहसी दरिंदों के खिलाफ मामला पंजीबद हो, परंतु यहां मैडम जी तो कार्यवाही के नाम पर पीड़िता को हकाल दी और खुद थाने से नदारत थी ,सिवनी न्यूज़ समाचार पत्र के द्वारा मैडम से संपर्क करने की कोशिश की गई परंतु थाने में मैडम से मुलाकात नहीं हो पाई पीड़िता के द्वारा मैडम को फोन पर बात करने के लिए कॉल लगाया गया पर मैडम कॉल उठाने से भी परहेज कीया गया, अब ऐसी कैसी न्याय व्यवस्था की एक पीड़िता सुबह से शाम तक भूखी प्यासी परेशान होकर थाने के आसपास न्याय की उम्मीद लगाए घूम रही है और न्याय देने वाले वर्दी पहने उस पीड़िता को हीला हवाला देकर न्याय से वंचित रख रहे हैं, ऐसा करने से गुनहगार को सह मिल रही है, ऐसा करते हुए क्या गुनाहगार को बचने का मौका नहीं दे रही है पुलिस? इन सब सवालों के जवाब आखिर कौन देगा? क्या हर मामले में इसी तरह पीड़िता को परेशान किया जाता है ?तो फिर महिला सशक्तिकरण का ढकोसला क्यों?दिखावे का महिला थाना नाम क्यों? ऐसी कार्यवाही अगर चलती रही तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपने भाषणों की लय और लाइन बदलना चाहिए और अगर वाकई महिलाओं के लिए सख्त कानून है तो सबसे पहले उन लोगों के ऊपर कार्यवाही करनी चाहिए जिन्हें महिला कानून की सुरक्षा का जिम्मा सौपा गया है जो वर्दी तो पहन लिए पर  महिलाओं का सहयोग नहीं करते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here