दो गैंग के बीच में चल रही थी तकरार तो पुलिस ने क्यों नहीं की कार्रवाई?
आखिर कौन दो पुलिसकर्मी हैं जो दोनों गैंग से लेते थे महीना बंदी
सिवनी शहर की कानून व्यवस्था इस तरह चरमराई हुई है की नगर की जनता हर वक्त डरी रहती है, सिवनी नगर में दो थाने आते हैं, इसमें कोतवाली थाना पिछले 3 सालों से जुआ सट्टा ,सफेद पाउडर, चाकूबाजी, रंगदारी ,गोलीबाजी और मनचलो के कारण बदनाम रही है ,सिवनी कोतवाली पिछले 3 सालों से किसी प्रकार की कोई कड़ी कार्यवाही इन पर नहीं कर पाई जिसके चलते बड़ी बड़ी वारदातें घट रही है, हद तो तब हो गई जब जिले में नए कप्तान को आय हुए कुछ दिन ही हुए थे और साथ ही कोतवाली थानेदार का ऑर्डर वाले दिन यह घटना घट गई और अभी तक इस मामले में कोई नई जानकारी पुलिस के द्वारा नहीं बताई जा रही है, कुल मिलाकर पुलिस के हाथ में कुछ भी नहीं लगा है, जिन्हें गिरफ्तार बताया जा रहा है उसमे कोई आसानी से खुद ही पहुंच गए जो घटना की जानकारी देने गए,तो कुछ को घर से आसानी से उठा कर ला लिया गया और तीन आरोपी बताकर भले ही पुलिस इस मामले की गरमाहट को कम करना चाह रही है पर हकीकत अलग नज़र आ रही है, गोली मारने वाला पुलिस थाने जाकर जानकारी नहीं देता और ना ही घर में आराम से बैठकर खाना खाता है वह तो पहली फुर्सत में शहर और जिले से बाहर भागने की कोशिश करेगा, पर यहां तो अपना राज खुलने का ड़र या शक की बुनियाद से उन्हें ही बैठा लिया गया, जबकि असल गोली मारने वाले अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, सवाल यह पैदा होता है कि आखिर सिवनी में यह वारदात क्यों हुई? जिसे गोली लगी उसकी मृत्यु हो गई, जिसने गोली मारा वह फरार है, सूत्र और प्रताड़ित परिजनों की माने तो इस वारदात की मुख्य वजह सिवनी कोतवाली में पदस्थ एक 2 स्टार और एक आरक्षक है जो लगातार इन दोनों गैंग के संपर्क में था, उनसे बंधोड़ भी लेता था, इस घटना के पीछे के मुख्य अरोपी मुखबिर का नाम उजागर करने वाले गुनहगार भी यही लोग हैं ,ना पुलिसकर्मी मुकबीर का नाम बताते ,ना ही यह झगड़ा आगे बढ़ता और ना गोली चलती ,ना कोई गुनहगार बनता ,ना कोई मौत के घाट उतरता, महीना बंदी अवैध काम को देखते हुए चुप रहने ली जाती थी, अगर इमानदारी से उस काम को बंद करा दिया गया होता तो मुखबिरी की भी जरूरत नहीं पड़ती परंतु आरक्षक की पोस्ट में रहते हुए कार से घूमने का शौक पालने वाला और टू स्टार लगाकर अपने आपको थानेदार समझने वाला यह भूल गया की नासमझी और नालायकी आज कई घरों में मातम छोड़ कर चली गई। कप्तान साहब चाहे तो मृतक उसका भाई जिन्हें गिरफ्तार किया गया है वह लोग और कोतवाली में पदस्थ 2 स्टार और आरक्षक की कॉल डिटेल पिछले 2 महीने की निकालने तू सारी हकीकत सामने आ जाएगी यह कितनी बार कितनी देर तक बातें किया करते थे।
क्या है मामला
18 अगस्त 2023 की रात लगभग 7 से 8 बजे के मध्य बारा पत्थर क्षेत्र में मोटरसाइकिल से दो लोग आए ,दो गोली चलाएं एक गोली टाइल्स में जाकर घुस गई ,एक गोली योगेश अग्रवाल उर्फ योगी को लगी ,जिसे तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया ,वहां से तुरंत नागपुर रेफर कर दिया गया और नागपुर जाते वक्त साथ में गए लोगों ने वीडियो बनाया जिसमें योगेश अग्रवाल ने बिज्जू गोंड ने मुझे गोली मारी है यह कहा ,इसके अलावा कोई भी वीडियो नहीं बन पाया ऐसा सूत्र बताते हैं और नागपुर के अस्पताल में एडमिट कर दिया गया बताया जाता है कि सिवनीं पुलिस बयान लेने नागपुर अस्पताल भी पहुंची थी, परंतु डॉक्टर ने कंडीशन बात करने लायक नहीं है यह बोलकर उन्हें वापस लौटा दिया और सुबह यह खबर आई कि योगेश अग्रवाल की मृत्यु हो चुकी है ,इसका मतलब साफ है की मृतक और पुलिस के बीच में किसी प्रकार की कोई मुलाकात नही हुई,पुलिस ने मृतक से कोई बयान नही लिया और शक की बिनाह पर तीन लोगों को थाने में बैठा लिया गया ,जिन्होंने गोली मारी वह फरार हो गए ,हमारे द्वारा पड़ताल करने के बाद यह पता चलता है कि मृतक और मृतक का भाई समेत उसके सहयोगी बारापत्थर क्षेत्र में अपने घर में बैठकर ही जुआ खिलाते थे ,पिछले महीने पुलिस को यह सूचना मिली की अमुक अमुक जगह जुआ चल रहा है और तत्कालीन थाना प्रभारी ने रेड डाली, बताया जाता है कि बड़ा जुआ पकड़ में आया था, साथ ही सफेद पाउडर भी मिला था, परंतु सफेद पाउडर के ऊपर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई और जुआ फड़ जितने का पकड़ में आया था उतना जब्ती का मामला नहीं बना और इस मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई, बड़ा जुआ था रफा-दफा करने में लगी पूंजी से मृतक और उसका भाई आक्रोशित था और ऐसे में तलवे चाटने वाले दो पुलिसकर्मियों ने सौदा करते हुए मुखबिरी करने वाले का नाम अपनी नौकरी से बेईमानी करते हुए बता दिया ,बताया जाता है कि मृतक और उसके सहयोगियों ने मुखबिर के साथ वालों से बहुत मार पिटाई की, जिसका मामला भी कोतवाली में पंजीबद्ध किया गया और सोशल मीडिया में वीडियो भी वायरल हुआ बावजूद इसके पुलिस ने कड़ी कार्यवाही नहीं की पर पैसा बटोरने के आदी हो चुके पुलिस कर्मियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और आज योगेश अग्रवाल इस हत्याकांड में मर चुका है और नई उम्र के लड़के बंदूक चलाकर अपराधी बन गए हैं ऐसे में समाचार पढ़ने वाले भी इस बात को समझ सकते हैं की असल गुनहगार कौन?
कहां से आई बंदूक
सिवनी में लगातार सफेद पाउडर, अवैध शराब ,जुआ सट्टा और बंदूक की तस्करी के मामले सामने आ रहे हैं कई बार बंदूक से फायर करने की घटना तो किसी के पैर में गोली मारने की घटना ,अब तो इस बंदूक से हत्या भी हो गई ,आखिर पुलिस यह क्यों पता नहीं लगा पा रही है कि सिवनीं में अवैध हथियार की तस्करी कौन कर रहा है? सूत्र बताते हैं की vip कहे जाने वाले क्षेत्र 12 पत्थर में जुआ भी चल रहा, क्रिकेट सट्टा भी चल रहा ,सफेद पाउडर का व्यापार भी चल रहा और अवैध हथियार बेचने वाले भी रह रहे तो क्या पुलिस का खुफिया तंत्र को लकवा लग गया है ? या फिर गले तक ठूंसकर महीना बंदी ले रहे हैं जो इन पर कार्यवाही करने में निष्क्रिय हैं ऐसे में पुलिस को जनता की सुरक्षा के लिए वर्दी दी गई है और पुलिस की निष्क्रियता के चलते आज जनता डरी और सहमी हुई है इस हत्याकांड में देर सबेर मुख्य आरोपी पकड़ में आ जाएंगे तो क्या पुलिस हत्या के आरोपियों को पड़कर उनको रिमाड में लेते हुए बंदूक बेचने वाले का नाम भी उजागर करेगी? क्या बंदूक की तस्करी करने वाला सलाखों के पीछे जाएगा? आखिर कौन-कौन बंदूक की तस्करी कर रहा है जिले में? इस राज पर से पुलिस पर्दा उठा पाएगी या फिर मित्रवत व्यवहार निभाते हुए अपराधियों को अभयदान देकर आने वाले समय में और भी गोलियां शहर में चलेने के लिए जिम्मेदार बनेगी?