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बेईमानी इनका धर्म , नेता बड़े बेशर्म

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बेईमानी इनका धर्म , नेता बड़े बेशर्म

सेंक लेते हैं राजनीतिक रोटियां,देखे जब भी तवा गर्म

चुनाव के मैदान में राजनीति का खेल खेलते नेता ,कितने झूठे और कितने सच्चे हैं ,चुनाव करीब आते ही जान पड़ता है, अपने वोटरों को लुभाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते  नेता कभी-कभी तो ऐसी हरकत कर देते हैं की अपने ही आका के मुंह पर कालिक पूत जाए ,खुद का बना बनाया किला धराशाई हो जाए ,जो मुंह में आया बक देते हैं, हम आपको बताएं विगत दिवस विश्व आदिवासी दिवस जो बड़े शान शौकत और जश्न के साथ मनाया जाता है ,इसमें कोई दो राय नहीं की हर जगह मनाया भी गया है, परंतु सिवनी में कुर्सी के लालची नेताओं के कारण विश्व आदिवासी दिवस खौफ दिवस के रूप में जाना जा रहा है, विश्व आदिवासी दिवस में भोले भाले आदिवासी जनों में   कुछ आदिवासी को भड़काकर उनसे ऐसा काम करवाया गया , ऐसा सूत्र बताते है,ताकि समूल आदिवासी समाज का नाम खराब हो और उनसे ऐसे कृत्य कराए गए जिससे उनकी छबि अन्य समाज तक गलत जाए, जवकि इनकी आड़ में निसाना कही और पर था,कार्यक्रम को मनाने हजारों की तादाद में समाज के लोग इकट्ठे हुए थे, पर कुछ उपद्रवी तत्व का इस्तेमाल कर राजनीतिक रोटी सेकने वाले सत्ता की चाह में सिवनी जैसे शांत क्षेत्र को भी छावनी बनाकर छोड़ दिए, चारों तरफ डर का माहौल था, व्यापारी हाहाकार मचा रहे थे ,आम जनता सहमी हुई थी, बुद्धिजीवी भविष्य को लेकर चिंता में थे ,और सत्ता पाने की लालसा में नेता कुछ लोगों को भड़का शहर के लोगों को परेशान कर तमाशा देख रहे थे ,यह तमाशा प्रत्यक्ष रूप से देखा गया कि कौन नेता सिवनी का हितैषी है और कौन नहीं ? यहां तक देखने मिला कि जिन कांग्रेसी नेताओं ने आदिवासियों की जमीन को पलटकर पैसा कमाया है, वह भी पीला गमछा गले मे डालकर आदिवासियों के हितेषी बने हुए थे, उनका झंडा पकड़ कर लहरा रहे थे, उनको पुलाव खिला रहे थे, जबकि आदिवासियों की पुश्तैनी जमीनों को उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर इन नेताओं ने बेच डाला, परंतु लोगों के सामने दिखावा करने आदिवासियों के हितेषी बने थे, बहरहाल राजनीतिक रोटी सेकने के चक्कर में इन नेताओं ने अपनी खुद की कबर खोद डाली है ,हितेषी बनने के चक्कर में समाज को भी बदनाम करने की कोशिश किया है ,और आने वाले समय में जनता जनार्दन इन्हें वोट के रूप में जवाब देने भी अब तैयार हो चुकी है।

कमलनाथ को मुंहतोड़ जवाब दिया अर्जुन ने

लंका को ड़हाने के लिए एक  विभीषण काफी था, ऐसा ही सिवनीं कांग्रेस को ड़हाने अर्जुन ही काफी है, जहां ऐन चुनाव के वक्त अपने आपको हनुमान भक्त, शिव भक्त बताने वाले बरघाट विधायक अर्जुन सिंह  ने भीड़ देखकर अपना आपा खो दिया और आदिवासियों को लुभाने के लिए, उन्हें रिझाने के लिए यह कह डाला कि हिंदू राष्ट्र नहीं बनने देंगे ,पूर्व मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ के बयानों को मुंहतोड़ जवाब देते अर्जुन सिंह ने बता दिया कि कमलनाथ कितना ही बताते रहे पर सिवनीं जिले की कांग्रेस में केवल अर्जुन सिंह की चलती है, लोग उनकी मानते हैं, अर्जुन को अपने आका की बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता, हम आपको बता दें कि 5 अगस्त से 8 अगस्त 2023 के बीच छिंदवाड़ा के सिमरिया गांव ,जहां पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज से 15 साल पहले 101 फीट ऊंची हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की थी ,जहां उन्होंने कई धार्मिक अनुष्ठान करवाए हैं, इस सिमरिया गांव में बागेश्वर महाराज के कथन अनुसार फरवरी माह में कमलनाथ जी ने बागेश्वर धाम महाराज से यह कहा था कि सिमरिया कब आएंगे और जब बागेश्वर धाम महाराज 5 से 8 अगस्त को सिमरिया में कथा किए, तब आयोजक कमलनाथ थे और यजमान नकुलनाथ जो छिंदवाड़ा के सांसद हैं , सह परिवार बाबा की आरती कमलनाथ ने उतारी, सेवा किया, 3 दिन चरण में पड़े रहे, परिणाम यह हुआ कि बाबा के सानिध्य में रहने के बाद कमलनाथ हिंदू राष्ट्र की बात करने लगे, उन्होंने कहा 82% हिंदू हिंदुस्तान में रहते हैं, तो हिंदू राष्ट्र की बात क्यों की जाए यह तो हिंदू राष्ट्र है और जब इन बयानों से उनकी राजनीति लड़खड़ाने लगी तो उन्होंने यह बयान भी दिया कि मैं बाबा को छिंदवाड़ा नहीं बुलाया था, अब ऐसे में अर्जुन सनातनी हिंदुओ का अपमान करते हुए कौनसी मछली की आँख भेदना चाह रहे समझ नही आता, जबकि हम आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में 20 आदिवासी बाहुल्य जिले हैं, जिसमें 84 सीट ऐसी है जो जीत का फैक्टर लाती हैं ,सन 2013 में बीजेपी ने 59 सिट जीती थी, 2018 में बीजेपी ने 59 में से 34 सीटों पर जीत हासिल की  थी,2018 में जीत का रेशों कम हुआ और कांग्रेस की सरकार बनी थी और इसी राजनीतिक वोट समेटने और जीत का फैक्टर निश्चित करने के लिए आदिवासियों के नाम पर कमलनाथ ने बागेश्वर धाम महाराज का दरबार सिमरिया में सजाया था, इस कार्यक्रम को हुए महज एक दिन हुआ था और कमलनाथ के खेमे के बरघाट विधायक अर्जुन सिंह ने  कमलनाथ को झूठा साबित करते यह कहते हुए नजर आए की हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र नहीं बनने देंगे, ऐसा कहते हुए अर्जुन सिंह ने यह बता दिया की कमलनाथ उनके लिए कोई मायने नहीं रखते, उनके मुंह में जो आएगा वे वही बोलेंगे।

रैली की आक्रमकता और अस्त्र -शस्त्र चमकाते देख सहमे लोग

आदिवासी दिवस में आदिवासी समाज की रैली जो काफी बड़ी तादाद में निकली थी ,लोग अपने समाज के गौरव पूर्ण दिवस का जश्न मनाने आए हुए थे, परंतु राजनीतिक रोटी सेकने वाले सत्ता की चाह रखने वाले नेताओं ने कुछ असामाजिक तत्वों को इस तरह बिलोर दिया कि यह दिन खौफ का दिन बनकर रह गया, देखने में आया है कि रैली का रूप काफी आक्रामक था, जबरदस्ती दुकानें बंद करवाई गई ,कई जगह पथराव हुआ ,खून तक बहा ,रोजी रोटी कमाने वालों की ठीलिया पलटाई गई, हाथ से बनाए हुए शस्त्र, नंगी तलवार और अस्त्र भी लहराए गए, जिसे देख जनता काफी सहम गई, व्यापारी काफी चीख-पुकार मचा रहे थे, परंतु पीला गमछा डालकर राजनीतिक रोटी सेकने वाले  कुछ नेता आने वाले चुनाव की रणनीति के तहत होने वाले खेल की राह देख रहे थे ,जनता पूरी तरह समझ चुकी है कि यह खेल कहां से शुरू हुआ, जिसका जवाब देने के लिए अब वह तैयार हो चुकी है।

सुनो सनातनी हिन्दू राष्ट्र पसंद नही अर्जुन को

भीड़ देख नेताओ की रगों में खून का दौरा तेज हो जाता है,और मस्तिष्क और जुबान बेलगाम हो जाते है ऐसा ही अर्जुन सिंग के साथ हुआ ,भीड़ देख नेता ने आदिवासी समाज को बिलोरते हुए यह कह डाला कि वह हिंदू राष्ट्र नहीं बनने देंगे, जबकि एक दिन पहले अर्जुन के आका पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह कहा की हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है ,कमलनाथ ने बागेश्वर धाम की चरण पादुका पूजे, तीन दिन तक महाराज से सनातनी हिंदू का पाठ सीखे और अब उनके खेमे के नेता हिंदुओं के बीच में यह कह रहे हैं कि वह हिंदू राष्ट्र नहीं बनने देंगे हालांकि अर्जुन सिंह  के इस बयान ने बरघाट सहित 3 विधानसभा में भाजपा की जीत सुनिश्चित  कर दी है ,बरघाट  विधायक अर्जुन सिंह पिछली बार बहुत कम अंतर से चुनाव जीते थे, इस बार चुनाव में उनकी स्थिति वैसे भी कमजोर दिखाई दे रही थी, और अब उन्होंने सनातनी हिंदू धर्म का अपमान कर यह निश्चित कर दिया कि बरघाट में भाजपा की जीत पक्की है और इस बयान की आग सिवनी जिले की अन्य विधानसभा में भी जाने की आशंका जताई जा रही है बताया जाता है कि जिसके चलते अन्य तीन विधानसभा में भी कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो सकता है, और अगर कांग्रेस का सूपड़ा साफ होता है और कांग्रेस बैरंग लौटती है , ढ़ीकरा अर्जुन सिंह पर ही टूटेगा, अगर बयान देने से पहले अर्जुन सिंह शब्दों को नापतोल लिए होते तो आज उन्हें यह दिन नहीं देखना पड़ता, अर्जुन सिंह  के बयान के बाद कांग्रेसी खेमे में पूरी तरह चुप्पी बनी हुई है, ऐसा लग रहा है कि उन्हें सांप सूंघ गया है, परंतु जो भी हो सनातनी हिंदू धर्म की आस्था के ऊपर प्रहार करने वाले अर्जुन सिंह ने साबित कर दिया कि वह ढोंगी हैं, जिस प्रकार व कभी हनुमान जी को आदिवासी समाज का बताते हैं, कभी शंकर भगवान को आदिवासी समाज का बताते हैं, खुद को बहुत बड़ा हनुमान भक्त बताते हैं, और आज हिंदू राष्ट्र के विरोध में खड़े होकर बयानबाजी करते हैं, तो जनता भी समझ गई है कि नेताजी कितने ढोंगी हैं।

कांग्रेस को कोस रही जनता

आदिवासी समाज  की  रैली में अपने नंबर बढ़ाने के लिए कई कांग्रेसी नेता जो विधानसभा सीट की दावेदारी कर रहे हैं पीला गमछा गले मे डालकर, आदिवासी समाज के बीच उनका हितैषी बनने की कोशिश करते रहे ,कुछ नेताओ ने उन्हें बिलोरा भी और कुछ ढोंग करते हुए पीला  गमछा डालकर पुलाव बाटते नजर आए, जब इन्होंने कुछ असामाजिक तत्वों को अच्छे से खिला पिला दिया तब शहर के अंदर उपद्रे चालू हुए, तभी पिला गमछा डालकर राजनीति चमकाते नेता वहां से   गायब हो गए, क्या इन नेताओं को इस बात की जानकारी नहीं थी की शहर के अंदर किस तरह का माहौल चल रहा है? बताया जाता है  समाज के कुछ लोग आदिवासी  दिवस का जश्न मनाने आए थे, कुछ लोगों को मणिपुर की घटना का विरोध करने का बताया गया था और कुछ लोगो को 9 अगस्त की छुट्टी कैंसिल कर दी गई है यह बात बोलकर भड़काया गया और यह सब काम सत्ता की चाह रखने वाले नेताओं ने किया ऐसा सूत्र बताते हैं, सवाल यह पैदा होता है कि जब शहर के अंदर खौफ का माहौल बना हुआ था जो जो नेता पीला गमछा डालकर अपनी राजनीतिक रोटी सेकने का इंतजार कर रहे थे उनकी कुछ नैतिक जिम्मेदारी थी या नहीं? और अब यह बात जन चर्चा का विषय बन गई है ,जनता तो इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस को ही कसूरवार समझ रही है देखना यह है कि आगामी चुनाव में अब जनता कैसे हिसाब पूरा करती है।

प्रसाशन का कानूनी लठ न चमकाना भाजपा के लिए बना वरदान

आदिवासी समाज की रैली में जिस प्रकार उपद्रे हुए लठ चमकाए गए, अस्त्र और शस्त्र लहराए गए, जबरदस्ती दुकानें बंद की गई ,सर फोड़े गए ,दुकान में तोड़फोड़ हुई ,पथराव हुआ,हद तो तब हो गई जब पीला गमछा डाल कुछ राजनीति रोटी सेकने वाले लोग इस इंतजार में थे कि इस उपद्रव के बाद प्रशासन हरकत में आएगा और इन नेताओं की मंसा पूरी हो जाएगी, जबकि अगर प्रशासन हरकत में आता तो शहर में माहौल बिगड़ जाता ,आदिवासी समाज जो अपने गौरव दिवस को जश्न के रूप में मनाने आये थे, उनके ऊपर प्रशासन का प्रहार होता तो  क्रिया की प्रतिक्रिया जरूर होती जिससे आने वाले समय में भाजपा से आदिवासी समाज दूरी बनाता और उसका फायदा विपक्ष मैं बैठी पार्टी को होता और यह पूरा प्लान तब चौपट हुआ जब प्रशासन ने सूझबूझ का परिचय देते हुए किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की, हो सकता है प्रशासन को ऊपरी तौर पर यह बोला गया हो कि किसी प्रकार की कार्यवाही ना की जाए परंतु आदिवासी समाज की गौरव यात्रा में किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्यवाही का ना होना भाजपा के लिए रामबाण का काम कर गया अगर किसी प्रकार की कोई प्रशासनिक कार्रवाई होती तो विपक्ष में बैठी राजनीतिक पार्टी के लिए यह आयोजन सफल आयोजन साबित हो सकता था।

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