चुनावी वर्ष ,चुनावी घमासान ,अपने आप को नेता साबित करने की खुमारी,बाहर से आए नेताओं के सामने धमाचौकड़ी मचाते नेता ,रायशुमारी में वजन दिखाते नेता, एक दूसरे को नीचा दिखाते नेता, दर्शक दीर्घा में बैठकर मंच पर आसीन होने का सपना देखते नेता, सभी नेता अपने आप को विधायक चुनाव का दावेदार बता रहे हैं, जिनकी घर में बखत नहीं वह भी विधानसभा संभालने का दम भर रहे हैं, वार्ड के वोट नहीं बटोर सकते विधानसभा के वोट बटोरने की बात करते हुए पर्यवेक्षक को लुभा रहे हैं नेता ,ऐसे ही दौर में अंदर खाने से यह खबर आ रही है कि एक अल्पसंख्यक कांग्रेस नेता की घोर बेज्जती हो गई ,मामला उस वक्त का बताया जा रहा है जब जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में बाहर से पर्यवेक्षक आए हुए थे, उस दौरान शहर के एक नेता जो अल्पसंख्यक नेता हैं अपने समाज में उनका एक बड़ा नाम है ,वह समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं ,आने वाले विधानसभा में अगर कांग्रेस इन पर दांव खेले तो वह प्रबल दावेदार हो सकते हैं, परंतु एक दूसरे को नीचा दिखाने के खेल में बताया जाता है कि वह अल्पसंख्यक नेता अपने मन की बात पर्यवेक्षक के सामने रखना चाहते थे, लोकतांत्रिक व्यवस्था का उपयोग करना चाहते थे ,परंतु कांग्रेस में अल्पसंख्यक नेताओ की स्थिति क्या है उस वक्त पता चली जब जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ने अल्पसंख्यक नेता को यह बोलने पर कि मुझे दो शब्द बोलने हैं तुरंत मना करते हुए वहीं बैठा दिया ,यह माजरा सैकड़ों की भीड़ के बीच में हुआ ऐसा बताया जाता है यह तो अल्पसंख्यक नेता की घोर बेज्जती हो गई ,ऐसे में क्या अल्पसंख्यक कांग्रेस के साथ आगे चलेगे या अपना अलग रास्ता बनाएगे, पर अब चर्चाएं चल रही हैं की गजब बेज्जती हो गई पत्ते की।