दलालों और भाटो को डर सताने लगा है अब परिवार कैसे चलाएंगे
गाने बजाने का शौक भी रखते हैं थानेदार साहब
सिवनी कोतवाली के थानेदार साहब बहुमुखी प्रतिभा के धनी है,साथ ही रंगमंच के अच्छे कलाकार जान पड़ते हैं उन्हें गाने बजाने का बहुत शौक है ,कई बार उन्हें देवी जागरण में हारमोनियम बजाते और कई मंचों पर उन्हें माइक पकड़कर गाना गाते भी देखा गया है कई बार तो ऐसा मौका पड़ा है की ड्यूटी पर होते हुए गाने बजाने के कार्यक्रम में शिरकत कर, रंगमंच के कलाकार की भूमिका अदा करते रहे और उनके थाना क्षेत्र में गाड़ियां चोरी हो गई और आज तक उन गाड़ियों के चोर का पता नहीं चल पाया है और न ही गाड़िया मिली है ,होता है कई बार अपनी प्रतिभा को दिखाने के चक्कर में अपने कर्तव्य से विमुख होकर काम करते हैं तो ऐसे दिन देखने पड़ते हैं हालांकि कोतवाली थानेदार गाना बजाना बहुत अच्छे से करते हैं।
दलाल ,चाटुकार और भाट पालने का शौक भी रखते हैं थानेदार साहब
कोतवाली थानेदार साहब के बारे में जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है क्योंकि उनके आने के बाद शहर की जनता को लगा की अब शहर अपराध मुक्त हो जाएगा और जिस प्रकार जिले के एक थाने से जब कोतवाली आए थे तो उस थाना क्षेत्र के कुछ भाट, कुछ दलाल और कुछ चाटुकार लोगों ने जिस प्रकार छाती पीट-पीटकर रोते हुए सोशल मीडिया पर अपने आंसू दिखाने की कोशिश किए थे उससे सिवनी नगर की जनता को ऐसा एहसास होना लाजमी था, कि सिवनी अपराध मुक्त हो जाएगा परंतु यहां पर आने के बाद थानेदार साहब ने यहां भी कुछ चाटुकार, दलाल और भाट पाल लिए ,हो सकता है थानेदार साहब को इनकी आवश्यकता रही हो परंतु इन भाट, चाटुकार और दलालों ने सोसल मीडिया पर थानेदार साहब को समाजसुधारक साबित कर दिया,और सोशल मीडिया में ही अपराध खत्म होने का दावा भी कर दिया ,पर जमीनी स्तर पर अपराध होते रहे,और अपराधी, थानेदार साहब के पाले हुए चाटुकार दलाल और भाट लोगों के करीब आ गए, जिसके चलते दलालों ने भी चांटी काटी,अपराध शब्द सोसल मीडिया में खत्म हो गया, जुआ बंद हो गया, सट्टा बंद हो गया और जुआ और सट्टा खिलाने वाले समाज सेवा करने लगे,थानेदार साहब के दलालों ने ऐसा आभा मंडल बनाया की लगा रामराज आ गया, चारों ओर थानेदार साहब के भाट, थानेदार साहब की के गुण गान कर अपना घर भरने लगे और थानेदार साहब की थानेदारी से अपराध करने वाले,और अवैध पैसा कमाने वाले लोगों को तरक्की करने का अच्छा मौका मिला,इसे अपराधी सिवनी थाने की उपलब्धि मानते है कि भले ही यहां के नेताओं ने व्यापार ना दिया हो पर थानेदार साहब ने कई दलालों, भाट, चाटुकारों को ऐसा व्यापार मिला कि परिवार का पालन पोषण कर जीवन यापन किया।
क्याबदी की कमाई से चली नेकी की दीवार?
कोतवाली परिसर में नेकी की दीवार नाम का सहारा लेकर बहुत से ऐसे काम हुए हैं जिनको नकारा नहीं जा सकता ,सूत्रों के मुताबिक नेकी की दीवार का ताला तभी खुलता था जब कोई अधिकारी आता था और थानेदार साहब को शाबाशी लेना होता था, या जब चाटूकारों,भाट, दलालो का उपयोग कर बड़ी रकम को इकट्ठा करने के लिए योजना बनानी होती थी , नेकी की दीवार में जुड़े लोग जो समय पर बड़ी रकम इकट्ठा कर इस नेकी की दीवार को देते थे उनके नाम का खुलासा आज तक नहीं हुआ है, आज तक यह पता नहीं चला है एक व्यक्ति की मदद करने के लिए कितने लोगों से चंदा लिया गया है और जिन लोगों से चंदा लिया गया है वह समाजसेवी आखिर कौन थे? सूत्र बताते है कि नेकी की दीवार बदी की दीवार तब साबित हुई जब नेकी का काम करने के लिए 10 लोगों से पैसा लिया जाता था और नेकी का काम केवल एक में निपटा दिया जाता था, बाकी 9 लोगों का पैसा कहां जाता था ?जबकि मन कसोटकर पैसा देने वाले अपनी व्यथा चौक चौराहों में रो रो कर बताते थे, और जो लोग रो-रोकर बताते थे वह लोग शहर के इज्जतदार और सामाजिक व्यक्ति नहीं थे वे शहर के अंदर नंबर 2 का व्यापार करने वाले अवैध रूप से संपत्ति बनाने वाले लोग हुआ करते थे, इन सब कामों के लिए थानेदार साहब के पास कुछ व्यापारी स्तर के दलाल और कुछ अपनी मजबूरी बताकर चंदा इकट्ठा करने वाले दलाल भी जुड़े हुए थे जो हमेशा साहब की दलाली कर भाट गिरी करते दिखाई देते थे।
अच्छे काम का सपना दिखाया पर शहर में बड़ी चोरी आज तक पकड़ नहीं आई
थानेदार साहब जब सिवनी आए तो भाट लोगों के सोशल मीडिया में फैलाए गए भ्रम को देखकर सिवनी की जनता को लगा कि अब सिवनी आराम से सो सकती है पर नगर के लोगों को क्या पता था कि यहां भाट और दलाल प्रकार के लोग थानेदार साहब को घेर कर रखेंगे जनता इस भ्रम में जीती रही कि अच्छे काम होंगे पर अच्छे काम तो नहीं हुए नगर के अंदर चोरियां बढ़ गई, साहब के रहते बड़ी-बड़ी चोरियां हुई पर आज तक किसी बड़ी चोरी का खुलासा कोतवाली थानेदार के द्वारा नहीं किया गया, ऐसे में यह कैसे कहा जा सकता है कि थानेदार साहब का कार्यकाल बहुत अच्छा रहा, फिर थानेदार साहब दलालों के माध्यम से यह बताते रहे कि वह बेहतर काम करते हैं अपने आपको ईमानदार पुलिस कर्मचारी बताने के लिए साहब समय-समय पर रजिस्टर्ड दलालों की कुछ व्यवस्था भी करते थे जिसके चलते सुर्खियों में बने रहते थे।
कुछ रजिस्टर्ड दलाल भी पाल रखे थे साहब ने
बताया जाता है ,जिसे नगर की जनता ने देखा भी है कि समय-समय पर कुछ रजिस्टर्ड दलाल साहब की चाटुकारिता कर लोगों तक उनकी अच्छाई की खबर पहुंचाने के लिए थाने में चक्कर मारा करते थे कुछ सूरापान का शौक रखते थे तो कुछ गांधी छाप कागज के लिए चार चक्कर लगा लिया करते थे, साहब के पास बैठकर अपनी कॉलर ऊंची कर साहब से हमारे संबंध है यह बताकर इन रजिस्टर्ड दलालों ने कई जगह दलाली भी खाई है, साहब भी इन दलालों के ऊपर विशेष आशीर्वाद बनाए रखते थे अधिकारी कर्मचारी बाहर से सिवनी में आता है और रजिस्टर्ड दलाल इनकी तीमारदारी में लगकर सिवनी की जनता के साथ में धोखाधड़ी का काम करते है और यही काम सिवनीं के रजिस्टर्ड दलालों ने किया, इन दलालों ने साहब को कभी आईना दिखाने की कोशिश नहीं की ,साहब से नही पूछा कि शहर में हुई चोरियां अब तक उजागर क्यों नहीं हुई है बल्कि दलालों के द्वारा 10 लोगों से पैसा लेकर साहब के द्वारा एक को पैसा देकर साहब और नेकी की दीवार की वाहवाही बताएं पर यह नहीं बताया कि एक व्यक्ति की मदद के पीछे कितने लोगों से मदद के नाम पर चंदा इकट्ठा किया गया है, उन लोगों का नाम आज तक उजागर क्यों नहीं किया रजिस्टर्ड दलालों ने?
क्या जाते-जाते थानेदार साहब उन समाजसेवियों का नाम करेंगे उजागर जो देते थे चंदा
साहब ने नेकी की दीवार का तमगा लेकर बहुत से लोगों की मदद की है बताया जाता है इस काम के लिए कुछ व्यापारी स्तर के दलाल और कुछ सामाजिक स्तर के दलाल, कुछ रंगमंच के दलाल, साहब के लिए वसूली का काम करते थे ,एक व्यक्ति की मदद करना है तो कई लोगों से चंदा वसूली की जाती थी ,सूत्र तो बताते हैं कि अगर 25000 की मदद करना है तो 10 लोगों से 25000 लिया जाता था और एक की मदत 25000 देकर की जाती थी सवाल यह पैदा होता है बाकी के 9 लोगों का 25000 कहा जाता था ,और जिन लोगों ने 25000 दिए , उन समाजसेवियों का नाम आज तक उजागर क्यों नहीं किया गया है? क्या जाते-जाते थानेदार साहब इन समाजसेवियों का नाम उजागर करेंगे ?क्योंकि सूत्र बताते हैं कि यह समाजसेवी और कोई नहीं शहर में अवैध व्यापार चलाने वाले लोग हैं और नेकी की दीवार का सहारा लेकर हर महीने इनसे वसूली की जाती थी।
नेकी की दीवार में खरीदी गई थी एंबुलेंस
सूत्र बताते है की नेकी की दीवार का चस्का इतना चला कि हर जगह नेकी की दीवार का नाम चलने लगा परंतु नेकी की दीवार के नाम पर कितने लोगों को चूना लगा है इस बात का आकलन करना मुश्किल है बताया जाता है कि नेकी की दीवार के नाम से 2 एंबुलेंस खरीदी गई थी परंतु आज वह एंबुलेंस कहीं दिखाई नहीं दे रही है ,इस एंबुलेंस के बारे में ऐसी चर्चाएं चलती है कि चंद लोगो ने मिलकर इस एंबुलेंस को दिया था परंतु एंबुलेंस के नाम पर कई दर्जन लोगों से चंदा लिया गया है सवाल यह पैदा होता है कि बाकी का पैसा कहां गया? एक बात देखने योग्य है कि शहर के व्यापारी स्तर के दलाल अक्सर साहब के इर्द-गिर्द घूमते हुए दिखाई देते थे, जिनका काम व्यापारियों से लूटपाट करने का रहा है, वह अपने आप को व्यापारियों का हितेषी बताते हैं जनता का हितैषी बताते हैं राजनीतिक पार्टियों का संरक्षण उनको प्राप्त है ऐसे लोगों को साहब की दलाली करते क्यों देखा जाता था? क्या यह साहब के रजिस्टर्ड दलाल थे ?आखिर हर काम की जिम्मेदारी यही क्यों लेते थे?
थानेदार साहब ने पाल रखे थे, सरकारी चौकीदार जो करते थे देखरेख
थानेदार साहब सिवनी कोतवाली में प्रभारी बनने के बाद दो ऐसे सरकारी पहरेदार पाल रखे थे जो साहब को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होने देते थे, साहब की हर व्यवस्थाओं का पूरा ख्याल रखते थे, साहब को कब क्या चाहिए इसका पूरा ख्याल पहरेदार को रहता था, और पहरेदार इस पूरी व्यवस्थाओं को करने में सक्षम थे और इन व्यवस्थाओं के पीछे अगर कोई आवाज उठ जाती तो यह पहरेदार उस आवाज को दबाने के लिए तरह-तरह की व्यवस्थाएं बाहर वाले लोगों के लिए भी करते थे, इन पहरेदारों के रहते साहब को कभी कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि अवैध दरवाजे पर जाकर साहब को खुश करने की व्यवस्थाएं यह ले आते थे हालांकि अब पहरेदार साहब के जाने के बाद दूसरे थानों में अपना जुगाड़ लगा रहे हैं क्योंकि आदत साहब के तलवे चाट कर नौकरी करने और वसूली की हो गई है ऐसे में खाकी पहनकर ईमानदारी से नौकरी कैसे कर पाएंगे