जानकारी की कमी या सलाहकार बेवकूफ पाल कर रखे हैं नेताओं ने
सिवनी जिले में सिवनी नगर के मध्य स्थित दलसागर तालाब जो राजा दलपत शाह जी ने बनवाए थे इस तालाब का सौंदर्यीकरण करने और इस तालाब का निर्माण करने वाले राजा दलपत शाह जी की मूर्ति स्थापित करने की पहल कांग्रेस की 15 महीने की सरकार के समय से चल रही थी इस कार्य को आखरी अंजाम देने की कवायद करते हुए भाजपा सरकार और सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन ने राजा दलपत शाह जी की प्रतिमा दलसागर टापू में स्थापित करने जा रहे है प्रतिमा स्थापित करने को लेकर नगर पालिका सिवनी जो कि कांग्रेस के कब्जे में हैं उनका कहना है कि राजा दलपत शाह जी की मूर्ति नगर पालिका देगी , इधर तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपया सैंक्शन हो चुका है कार्य भी प्रगति पर है दलसागर तालाब को खाली करा लिया गया है और 19 जुलाई को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भूमिपूजन भी कर दिया है सवाल यह पैदा होता है चाहे कांग्रेस की नगरपालिका हो या भाजपा के नेता सभी राजा दलपत शाह जी की मूर्ति लगाने की बात कर रहे हैं पर वह मूर्ति का प्रतीकात्मक छायाचित्र कैसा होगा यह इन नेताओं को भी नहीं पता है,बताया जाता है कि 52 फीट की ऊंची मूर्ति लगाई जा रही है परंतु किसी को यह नहीं पता कि राजा दलपत शाह जी दिखते कैसे थे ,जानकारों की माने तो राजा दलपत शाह जी का ऐसा कोई छायाचित्र या मूर्ति जिसकी नकल कर मूर्ति बनाई जा सके मौजूद नहीं है,जानकर बताते है कि एकमात्र उगली क्षेत्र में राजा दलपत शाह जी का प्रतीकात्मक चेहरा स्थापित है ऐसे में 19 जुलाई को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भूमिपूजन कार्यक्रम में सिवनीं पहुंचे थे जहां पर उन्होंने राजा दलपत शाह जी की मूर्ति दल सागर तालाब में स्थापित करने हेतु भूमि पूजन किया और चारों ओर फ्लेक्स बेनर लगाकर नेताओं ने मुख्यमंत्री जी का खूब अभिवादन किया, परंतु लगे हुए फ्लेक्स में राजा दलपत शाह जी की फोटो की जगह पवार समाज के ईस्ट छत्रपति राजा भोज जी की फोटो लगाई गई थी, शहर में फ्लेक्स टांगे गए पर किसी ने यह ध्यान नहीं दिया की फ्लेक्स में जो फोटो लगी है वह राजा दलपत शाह जी की है या छत्रपति राजा भोज जी की ,कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है की भूमिपूजन मात्र राजनीति का स्टंट था, आदिवासी समाज को लुभाने का प्रयास था, जबकि राजा दलपत शाह जी की फोटो कैसी है ,वह कैसे दिखते थे,यह बात नेताओं को नहीं पता है, पवार राजा छत्रपति राजा भोज जी की फोटो लगाकर आदिवासी समाज को लुभाया गया है ,हो सकता है कि नेताओं के सलाहकार भी मंदबुद्धि है तभी तो वे आदिवासी समाज के राजा दलपत शाह जी और पवार समाज के राजा छत्रपति राजा भोज जी की फोटो को पहचान नही पाए और आज करोड़ों रुपए का कार्यक्रम तो हुआ पर राजा भोज जी की फोटो दिखा कर राजा दलपत शाह जी के नाम पर राजनीति हो गई जो कार्यक्रम हंसी का पात्र बन रही है ,इस कार्यक्रम लगी फ़ोटो से यह तो सिद्ध हो गया कि कोई भी नेता आपके समाज का कितना भी सगा बन जाये पर जब आपके राजा को ही नही पहचान पा रहा है तो आपको कितना समझता होगा य्या केवल चुनाव जीतने के लिए केवल हिमायती बनने और सम्मान देने का नाटक था।
