2 जिलों में जमीन खरीद हो गया मालामाल
नकली एक्सरे कांड में डॉक्टर नावकर के कारण अस्पताल पर लग रहा कलंक
सिविल सर्जन डॉ विनोद नावकर के कार्यकाल में एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है ,पर अभी तक अस्पताल प्रबन्धन ने किसी दोषी पर कार्यवाही नहीं किया है बल्कि कार्यवाही के नाम पर अपने करीबी डॉक्टरों को बचाने और अपने ऊपर लगने वाले कलंक को धोने के लिए छोटे कर्मचारियों की तैयारी पूरी हो चुकी है सवाल यह पैदा होता है डॉक्टर नावकर लगभग दो दशक से सिवनी जिला अस्पताल में पदस्थ हैं और जिस तरह के आरोप डॉक्टर नावकर के ऊपर लग रहे हैं पहले भी सरकारी टेंडर जो जिला अस्पताल से संबंधित होते थे उन टेंडरों को लेकर डॉक्टर नावकर सुर्खियां बटोर हैं और इन सब बातों पर गौर किया जाए तो डॉक्टर विनोद नावकर के ऊपर शक की सुई जाकर अटकती जिले के कलेक्टर अगर सही जांच करवा लें तो डॉक्टर नावकर कहीं ना कहीं दोषी करार दिए जाएंगे परंतु जांच के नाम पर फाइल को चलाते रहने से डॉक्टर के ऊपर गाज नहीं गिरने डॉक्टर नावकर अच्छी तरह से जानते हैं तभी तो इतने सालों में डॉक्टरी की आड़ में जमीन की खरीद-फरोख्त का व्यापार एक नहीं दो दो जिलों में बड़ी आसानी से चला रहे हैं सूत्रों की माने तो शहर के जमीन के दलाल डॉक्टर नावकर से सतत संपर्क में रहते हैं जो उनकी जमीन को अल्टी पलटी कर दलाली के पैसे में बंदरबांट करते रहते हैं
सिविल सर्जन ने गलती करने वाले लेब टेक्नीशियन को चार दिन पहले भेजा अवकाश पर
सूत्र बताते हैं कि सिविल सर्जन डॉ नावकर ने फर्जी एक्सरा बनाने वाले लेब टेक्नीशियन तीरथ महोबिया को चार दिन पहले ही अवकाश में भेज दिया है ताकि जांच को गोलमोल तरीके से करने में मदद हो सके | अब इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिविल सर्जन इस पूरे मामले में कितने दोषी हैं | अगर वे अपने आप को ईमानदार समझते हैं तो आज तक दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं किए ?
डॉक्टर साहू ने लिखा था आरोपी का एक्सरा
हमारे पास उपलब्ध दस्तावेज बता रहे हैं कि दिनांक 30/06/23 को रात में आरोपी को पुलिस ने जब जिला चिकित्सालय लेकर आई थी तब डॉक्टर के के साहू ड्यूटी पर थे और मुलाहजा करके आरोपी का एक्सरा कराने लिखा था किन्तु रात के समय एक्सरा रूम बंद था तो आरोपी का उसी दिनांक को शाम लगभग छः बजे एक्सरा किया गया जिसकी फ्रैक्चर की रिपोर्ट टेक्नीशियन तीरथ महोबिया ने तैयार किया और डॉक्टर के के साहू से रिपोर्ट पर हस्ताक्षर लेकर दिनांक 30/0623 को ही थाना भिजवा दिया | सूत्र बताते हैं कि डॉक्टर के के साहू अस्थि रोग विशेषज्ञ नहीं हैं फिर आरोपी की एक्सरा रिपोर्ट पर उल्लेख क्यों किया और अगर उन्होंने उक्त रिपोर्ट नही बनाई है तो जिस टेक्नीशियन ने रिपोर्ट बनाई है उसकी शिकायत डॉक्टर के के साहू ने क्यों नहीं किया ?
जब एक्सरे में फैक्चर था तो प्लास्टर बांधकर एडमिट क्यों नहीं किया गया ?
डॉ नावकर का यह कहना है कि वह रिपोर्ट के के साहू ने नहीं बनाई और ना ही उस पर डॉक्टर के के साहू ने यह लिखा है कि एक्सरे कराया जाए बावजूद इसके एक्सरे किया गया और रिपोर्ट भी बनाई गई ,माना कि डॉ साहू ने एक्सरे कराने की सलाह नहीं दी और एक्सरे कर लिया गया परंतु एक्सरे रिपोर्ट की मानें तो पैर की कटोरी में फ्रैक्चर बताया गया है और अगर फैक्चर था तो बिना प्लास्टर किए आरोपी को जाने क्यों दिया गया? और अगर जाने दिया गया इसका मतलब साफ है कि फ्रैक्चर नहीं था इतना बड़ा गुनाह जिला अस्पताल में पदस्थ कर्मचारी आखिर जिला अस्पताल के किस अधिकारी की सह पर कर रहे थे इस बात का स्पष्ट होना आवश्यक है।
सिविल सर्जन के कार्यकाल की बारीकी से जांच होना आवश्यक है
जिला चिकित्सालय में नकली एक्सरा रिपोर्ट बनाए जाने की पोल खुलना सिविल सर्जन डॉ विनोद नावकर के भ्रष्ट कार्यकाल की ओर इशारा करता है | सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार इनके कार्यकाल में कोरोना काल से लेकर आज तक जिला चिकित्सालय में करोड़ों रूपये का हेरफेर किया गया है और कई लोगों को कानूनी फायदा पहुंचाने हेतु फर्जी रिपोर्ट तैयार की गई हैं। तभी तो इतने गंभीर मामले से पल्ला झाड़ते हुए आज तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं किए और मीडिया को बता रहे हैं कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हेतु जिला कलेक्टर को पत्र लिखा गया है |
प्रापर्टी खोल सकती हैं सिविल सर्जन की भृष्ट कमाई का राज
सूत्र बताते हैं कि सिविल सर्जन डॉक्टर विनोद नावकर ने सिवनी जिला सहित नरसिंहपुर में खुद के नाम और अपने परिवार वालों के नाम पर बड़ी बड़ी प्रापर्टी खरीदा है उन प्रापर्टी की कीमत ही इनकी भ्रष्ट्राचार की पोल खोल रही हैं | एक मास्टर का बेटा डाक्टर बनने के बाद ऐसा कितना रुपया कमा रहा है जो दो दो जिले की बेशकीमती जमीन खरीद रहा है | अब इतनी कमाई तो फर्जी काम करने से ही होगी |
जिला प्रशासन को भी पूरे मामले में गुमराह कर रहे डॉक्टर नावकर
जिला चिकित्सालय से नकली एक्सरा रिपोर्ट बनाए जाने के मामले में भी सिविल सर्जन डॉ विनोद नावकर अपने स्टाफ सहित अस्पताल प्रबन्धन को बचाने में लगे हैं जिससे तो यही प्रतीत होता है कि इस पूरे प्रकरण में उनका भी योगदान है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि नकली एक्सरा रिपोर्ट की जांच में पूरी तरह लीपापोती करने का प्रयास किया जा रहा है साथ ही सिविल सर्जन द्वारा जिला प्रशासन को भी गलत जानकारी दी जा रही है | इस पूरे मामले में जिला कलेक्टर साहब की कार्यवाही होना अभी शेष है | बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम में सिविल सर्जन की भूमिका संदेह में है |