कहाँ जाओगे इतना खाकर
अस्पताल में फर्जी एक्सरे का खेल
जनता का भरोसा उठ रहा डॉक्टरों से
डॉक्टर विनोद नावकर की स्थिति संदिग्ध
करीबी डॉक्टरों को बचाने छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराने की चल रही तैयारी
इन दिनों फर्जी एक्सरे को लेकर जिला अस्पताल सुर्खियां बटोर रहा है जिला अस्पताल में एक्सरे विभाग से लेकर , कई डॉक्टर इस फर्जी एक्सरे के खेल में नप सकते हैं ,क्योंकि यह खेल कई सालों से खेला जा रहा है ,वह तो उजागर अभी हुआ है गौर करने वाली बात यह है , सिविल सर्जन डॉक्टर नावकर लंबे समय से लगभग 15 साल से ऊपर होने को आए जिला अस्पताल में ही पदस्थ हैं ,डॉक्टर नावकर के रहते कई ऐसे टेंडर को लेकर भी आवाज उठती रही हैं जिसमें संदिग्ध स्थिति डॉक्टर नावकर की समझ में आई है, बावजूद इसके लंबे समय से डॉक्टर नावकर जिला अस्पताल से में पदस्थ है, जिसे देखकर लगता है कि डॉक्टर की पहुंच पकड़ ऊपर तक है और सिविल सर्जन के पद को संभाले हुए उनके अधीनस्थ कर्मचारी और डॉक्टर अब फर्जी एक्सरे का खेल भी करने लगे हैं इसके चलते कई अपराधियों को लाभ भी पहले भी मिला होगा और अभी भी लाभ दिलाने के लिए ही यह काम किया गया है बहरहाल फर्जी एक्सरे के मामले में जिला अस्पताल प्रबंधन समिति खासकर डॉक्टर नावकर घिरते नजर आ रहे हैं और अपने आप को बचाने के लिए तरह-तरह के बहाने भी डॉक्टर नावकर के द्वारा बनाए जा रहे हैं।
डॉक्टर ने लिखा ही नहीं और एक्सरे टेक्नीशियन ने कर दिया एक्सरे
इस पूरे मामले को लेकर जब डॉक्टर नावकर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कहीं पर भी डॉक्टर के द्वारा यह नहीं लिखा गया है कि एक्सरा करवाया जाए ऐसे में जब डॉक्टर नावकर से कहा गया है कि एक्सरा तो हुआ है और उसकी रिपोर्ट भी प्रत्यक्ष रुप से दिखाई दे रही है जिसके दस्तावेज सिवनी न्यूज़ कार्यालय में मौजूद हैं तो उन्होंने बताया कि उस रिपोर्ट में डॉक्टर के हस्ताक्षर नहीं है सवाल यह पैदा होता है ,की जब डॉक्टर ने एक्सरा के लिए लिखा ही नहीं तो एक्सरे टेक्नीशियन ने एक्सरा कैसे कर दिया, मान लीजिए एक्सरे टेक्नीशियन ने एक्सरा कर दिया तो फिर डॉक्टर के के साहू ने उस रिपोर्ट को लेकर आपत्ति क्यों नहीं उठाई? जबकि प्राप्त दस्तावेजों की मानें तो 30 जून की रात को ही एमएलसी की रिपोर्ट में एक्सरा करवाने की एडवाइस की गई थी ऐसे में डॉक्टर नावकर का कहना है कि वह एक्सरा घुटने का नहीं है जबकि एक्सरे रिपोर्ट में घुटने के एक्सरे की जानकारी दी गई है कुल मिलाकर पूरा मामला डॉ नावकर गोल गोल घुमाने की कोशिश कर रहे हैं।
जांच में गुनहगार नहीं मिल रहा कोई
डॉक्टर नावकर ने स्थिति को भांपते हुए इस मामले को लेकर जांच को बिठा दी परंतु जांच रिपोर्ट आने के बाद यह समझ नहीं आ रहा है की गुनहगार कौन है? इसीलिए उच्च स्तरीय जांच के लिए डॉक्टर नावकर नें जिला कलेक्टर महोदय को पत्र लिखा है ऐसा डॉक्टर का कहना है जबकि डॉ नावकर बातचीत के दौरान यह कहते नजर आ रहे हैं कि उन कागज में डॉक्टर के हस्ताक्षर नहीं है ,ना ही डॉक्टर ने एक्सरे कराने की एडवाइस की है और प्रत्यक्ष रूप से एक्सरे रिपोर्ट दिखाई दे रही है ,उसमे एक्सरे जिसने भी बनाया उनके नाम लिखे हुए हैं ऐसे में गुनहगार के ऊपर कार्यवाही करने की बजाय जांच की फाइल चला कर मामले को रफा-दफा करने में क्यों लगे हैं डॉक्टर नावकर? यह समझ से परे है।
सिवनी न्यूज़ ने पहले ही बता दिया था कि क्या स्क्रिप्ट लिखी गई है जिला अस्पताल में
सिवनीं न्यूज़ ने पहले ही आशंका व्यक्त करते हुए लगातार समाचार प्रकाशित कर यह बताने का प्रयास किया था कि आने वाले समय में एक्सरे होगा और एक तरफ फैक्चर निकलेगा जिस पर ना ही प्रशासन ने ध्यान दिया और ना ही पुलिस विभाग ने, बेलगाम होकर जिला अस्पताल की प्रबंधन समिति डॉक्टर नावकर और उनके करीबी डॉक्टरों ने मामले को बिलोरने की कोशिश किए और किस्मत का खेल देखिए डॉक्टर अब अपने आप को बचाने के लिए मामले से कन्नी काटते नजर आ रहे हैं ,हालांकि इस मामले में जिला कलेक्टर महोदय को संज्ञान में लेते हुए निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए ताकि जिला अस्पताल में चल रहे भ्रष्टाचार और ऐसे बदनाम खेलों का राज खुल सके ,क्योंकि एक गरीब व्यक्ति मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बोर्ड का महीनों इंतजार करता है और पैसों के खेल के आगे घंटे भर में यह भ्रष्टाचारी डॉक्टर कभी घुटना फोड़ देते हैं तो उसी घुटने को सही भी बता देते हैं मिलाकर पैसे के सामने मुजरा करते हुए ईश्वर का दूसरा रूप कहे जाने वाले कुछ डॉक्टर अन्य डॉक्टरों को भी बदनाम करने से नहीं चूक रहे हैं इनके कारण अन्य डॉक्टरों के ऊपर से जनता का भरोसा उठने लगा है और जब खुद की इज्जत पर बट्टा लगने की बात सामने आती है तो मुंह छुपाते फिरते हैं और मामले को रफा-दफा करने के लिए बातों को गोल-गोल घुमाते हैं।