जिसने शासन को चूना लगाया ,जिसके ऊपर सरकारी कागज में रेत चोर होने का ठप्पा लगा है, जो अपनी ही पार्टी को कटघरे में खड़ा करता है,ऐसे कार्यकर्ता को पार्टी की नियमावली में गद्दार शब्द से संबोधित किया जाता है ,ऐसे पार्टी के अनुसार गद्दार कार्यकर्ता को इनाम के रूप में छात्रों का नेता बनाया जाता है, कहीं अंग्रेज पार्टी बुजुर्गों की बातों से ओतप्रोत तो नहीं क्योंकि पहले ऐसा कहा जाता था कि घर को चोर से बचाना है तो घर की चाबी चोर को दे दो ,मतलब साफ है चोर को ही चौकीदार बना दो, चोरी नहीं होगी शायद कांग्रेस ने यही सोच कर एनएसयूआई छात्रों के संगठन का अध्यक्ष धनंजय को बनाया है ,ताकि धनंजय शासन को चूना लगाना छोड़ दे, संगठन को कटघरे में खड़ा नहीं करेगा, पर शायद कांग्रेसी एक बात भूल गई ,कई बार ऐसा होता है कि कुत्ते की पूंछ 12 साल पोंगली में रहने के बाद भी टेढ़ी की टेढ़ी रहती है ,अगर धंनजय ने फिर से अपनी पार्टी को कटघरे में खड़ा किया ,चोरी की तब कांग्रेस पार्टी अपने आप को कैसे पाक साफ साबित करेगी यह पार्टी के लिए चिंतनीय विषय है।
अवैध रेत चोरी का लगा है आरोप
कांग्रेस नेता भाजपा सरकार पर आरोप लगाते है कि भाजपा सरकार में अवैध उत्खनन और परिवहन होता हैं जिसे मध्यप्रदेश सरकार नही रोक पा रही है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के कुछ चोर नेता है जो अवैध रेत के उत्खनन एवं परिवहन करने में आरोपी बने है जिनमें से एक एनएसयूआई के नए अध्यक्ष धनंजय संध्या जो मोहन चन्देल के भांजे है।, बताया जाता है कि 2 मार्च 2020 को कुरई थाने में पदस्थ उपनिरीक्षक करिश्मा चौधरी ने अज्जू अंसारी पिता अब्दुल अंसारी उम्र 25 साल निवासी ग्राम बंडोल को रेत से भरे डंपर सहित पकड़ा था, जिसमें रेत की रायल्टी नहीं थी। पूछताछ में अज्जू अंसारी ने पुलिस को बताया था कि उसने डंपर मालिक धनंजय के कहने पर कुरई थाना अंतर्गत पिपरिया से रेत भरा था। बताया जाता है कि अज्जू अंसारी और धंनजय के द्वारा अवैध रूप से रेत का परिवहन किया जा रहा था तब पुलिस ने रेत का डंपर पकड़कर अज्जू अंसारी एवं धनंजय के विरूद्ध धारा 379,414, खान एव खनिज विकास का विनियमन अधि. 1957 की धारा 4/21 के तहत मामला पंजीबद्ध किया था। जब इस बात की जानकारी जिले के बड़े नेताओं को थी ,तो फिर रेत चोर को एनएसयूआई का जिलाध्यक्ष बनाने की कवायद समझ में नहीं आई , ऐसा लग रहा है की परिवारवाद की परिपाटी वाली पार्टी अपने नक्शे कदम पर चल रही है जिस परिवार को पार्टी ने गले तक इज्जत, शोहरत, पद सब कुछ दिया उसी परिवार के ऊपर पार्टी फिर मेहरबान हैं ,और खून ,पसीना बहा कर मेहनत करने वाले कार्यकर्ता आज भी झंडा और दरी पट्टी ही उठा रहे है।