सट्टामाफ़िया की फिर बची है लेनदारी
आत्महत्या की कोशिश,खाई नींद की गोलीया,बीबी और दो मासूम बच्चो का रो रो कर बुरा हाल
सिवनी पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है सिवनी से क्रिकेट सट्टा का खेल खत्म हो चुका है थानेदार साहब के डर के कारण जुआरी और क्रिकेट सटोरिया जिला छोड़ चुके हैं यह जिला क्रिकेट सट्टा और युवा से मुक्त है परंतु विगत दिवस एक दवा व्यवसाई के द्वारा आत्महत्या करने के प्रयास ने पुलिस के मुंह पर जोरदार तमाचा मारा है इस वारदात ने यह साबित कर दिया है कि पुलिस ने झूठ बोल रही है क्रिकेट सट्टा अभी भी बेलगाम बेरोकटोक जारी है पर पुलिस झूठ बोलते हुए जनता को गुमराह कर रही है हम बता दें सिवनी में कानून व्यवस्था इतनी लचर हो चुकी है कि घर में घुसकर मर्डर हो रहा है, बीच चौक में गला रेतने की कोशिश की जा रही है, दुकान में घुसकर चाकूबाजी हो रही है ,परंतु पुलिस है कि पुराने ढर्रे पर आज भी अपने आप को पाक साफ बताने से नहीं चूक रही है अपराधियों में पुलिस का डर खत्म हो चुका है बल्कि आम जनता में पुलिस का डर समाने लगा है अब तो जनता सहमी हुई है कि कब उनके ऊपर कोई सरफिरा हमला कर दे और तो और पुलिस भी हमला करने वाले का साथ देती नजर आ रही है शराब माफिया ब्याज माफिया सट्टा खिलाने वाले जुआ खिलाने वाले धड़ल्ले से अपराध कर रहे हैं और पुलिस मित्रवत व्यवहार निभाते अभी भी उनसे वसूली में लगी हुई है, जनता के साथ पुलिस का होना ना होना बराबर दिखाई दे रहा है विगत दिवस क्रिकेट सट्टेबाजो के जाल में फंसे नेहरू रोड निवासी युवा दवा व्यापारी दीपक अग्रवाल ने शुक्रवार की रात्रि को अत्याधिक मात्रा में नींद की गोलियों सहित अन्य नशीले पदार्थो खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया जिसे परिवार एवं परिचितों ने जिला चिकित्सालय भर्ती कराया परंतु हालात बिगडऩे पर डाक्टरों की सलाह पर उसे नागपुर मेडीकल उपचार के लिये रेफर किया गया जहाँ उसकी हालत में सुधार तो बताया गया है परंतु अभी डाक्टरों ने उसे कुछ दिन लगातार उपचार के लिये भर्ती रखा और स्थिती सामान्य होने में समय लगने की बात कही है । पीढि़त 42 वर्षीय दीपक गुरूकृपा मेडीकल स्टोर का संचालक है जिसके दो छोटे छोटे बच्चे है । पिछले कुछ दिनों से कर्जदारों की अवैध वसूली से परेशान था, और क्रिकेट सट्टा कारोबारियों के मनमाना ब्याज की राशि के चक्रव्यु में बुरी तरह फंसे व्यापारी की स्थायी अस्थायी संपत्ति का अधिकांश हिस्सा सट्टे के कारोबारी हड़प चुके है वहीं उसकी मजबूरी का फायदा उठाते कुछ मौका परस्त लोगों ने उसे नशेड़ी बनाकर उसकी संपत्ति की धोखे से लिखा पढ़ी भी करा ली और उसे मानसिक रूप से परेशान करते रहे ,जानकारी के अनुसार सट्टे के कारोबारी दीपक अग्रवाल से लाखों रूपये प्रतिदिन के हिसाब से ब्याज वसूल रहे थे और वसूली के लिये आसामाजिक तत्वों को हर दिन उसके घर भेजते थे । दीपक अग्रवाल अपनी साख बचाने के लिये उन आसाजिक तत्वों को हर दिन ब्याज तो देते रहा परंतु इस चक्कर मे वह अपनी पुश्तैनी जायदाद का हिस्सा बेचते रहा ,परंतु क्रिकेट सट्टा का अवैध व्यापार करने वालों का कर्ज कम नहीं हो रहा था बल्कि बढते रहा है ।जानकारी के अनुसार पीड़ित दीपक अग्रवाल अपनी पुश्तैनी संपत्ति का अधिकांश बेशकीमती हिस्सा बेचा चुका है और हर दिन का लाखों रूपये ब्याज देते रहा ,ब्याज की राशि वसूल करने वाले हर दिन उससे लाखों रूपये ब्याज वसूलते रहे है बताया जाता है इतना ब्याज देने के बाद भी दीपक अग्रवाल के पर लगभग 20 करोड़ का कर्जा बना हुआ है ,जानकारी के अनुसार आत्मघाती कदम उठाने वाले दीपक अग्रवाल से पुलिस बयान लेने भी पहुँची थी परंतु दीपक की हालत ठीक नहीं होने के कारण उसके बयान नहीं हो सके है परंतु उसकी पत्नी के द्वारा बयान दिये गये है जिसमें उसने कुछ ब्याजमाफियाओं के नामों का खुलासा किया है और बताया है कि इस कर्ज के चक्कर में उनके सारे जेबर, जमीन और अन्य प्रकार की संपत्ति नष्ट हो गयी है । रोते हुये दीपक की पत्नि ने कहा कि ब्याजमाफियों ने घर के बर्तन बिकवाने की नौबत ला दिए है परंतु दीपक केवल साख बचाने में लगे रहे और जब देने के लिये कुछ नहीं बचा तो आज दीपक ने आत्महत्या जैसा अप्रिय निर्णय लिया हमें इस स्थिती मे लाने वालो को हम छोडेंगे नहीं ।
जुआ सट्टा फलफूल रहा और पुलिस अपनी पीठ खुद थपथपा रही
पुलिस की नाकामी ही कही जाएगी कि क्रिकेट सट्टा फलफूल रहा,क्रिकेट के सट्टे ने अनेक परिवारों को तबाह कर दिया है इस अवैध व्यापार को लेकर बार बार समाचार भी प्रकाशित किये गए परंतु पुलिस अपनी आदत से लाचार पेशगी लेकर सट्टा पर कोई कार्यवाही नहीं करती जबकि इस अवैध कृत्य को करने वालों के चुंगल में फंसने वाले युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है । इस अवैध व्यापार को करने गुंडे किस्म के लोगों को जोड़कर काले सम्राज्य को फैला रहे है और इन गुंडों की मदत से वसूली का जो तरीका अपनाते है उससे अनेक परिवार की धन दौलत और जमा पूंजी सहित स्थायी संपत्ति को हड़पी जाती है ।
आखिर किस क्रिकेट सट्टाखाईबाज ने लूटा है दीपक के घरबार को
दवा व्यवसाई दीपक ने कर्जे के बोझ तले अपने आपको खत्म करने की कोशिश की क्रिकेट सट्टा माफियाओं का कर्जा चुकाने के लिए अपनी संपत्ति भी लुटा दी ,सवाल यह पैदा होता है कि आखिर सिवनी का ऐसा कौन क्रिकेट सट्टा का अवैध व्यापार करने वाला माफिया है जो दीपक अग्रवाल की जान लेने पर तुला हुआ है, वैसे दीपक अग्रवाल की पत्नी ने पुलिस को बयान में सट्टा माफिया के नाम बताए हैं ,परंतु विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि दीपक अग्रवाल का सजातीय क्रिकेट सट्टा खाईबाज छिंदवाड़ा चौक क्षेत्र में रहता है जो पहले सट्टा खाईबाजी का काम करता था अब ब्याज में पैसे देकर वसूली कर लोगों की जान लेने का काम कर रहा है, क्रिकेट सट्टा खाईबाज जो दीपक की जान लेने जिम्मेदार समझ आ रहे है उसमें शहर के कुछ नामी-गिनामी परिवार के लोग भी शामिल हैं, छिंदवाड़ा चौक से लेकर 12 पत्थर और सिंधी कॉलोनी के क्रिकेट सट्टा खाई बाजो के नाम भी दीपक अग्रवाल के स्वजातीय सट्टा माफिया के साथ जुड़ रहे हैं अब देखना है की पुलिस इन पर क्या कार्यवाही करती है या अभयदान देती है