जयकारे लगा रही दलालों की बारात
स्वार्थ,दबाव,डर आखिर किस कारण, सच न लिखकर पोग रही कलम
अंधा कानून है ,साथ न दे कमजोरों का, ये साथी है चोरों का ,पुरानी फिल्म का गाना है और वर्तमान में हुई चकुबाजी कि घटना में सटीक प्रहार करता है,राजनीतिक पकड़ और खाकी के साथ मिलकर पैसा और पावर के बल पर मामले को तोड़मरोड़कर पेश किया जा रहा है, चाकूबाजी कांड में कानून से किस तरह खेला जाता है यह देखने मिल रहा है, एक ओर वीडियो जारी होता है की गन्नू भारद्वाज खुलेआम चाकू से वार कर रहा है ,घायल युवक नागपुर में एडमिट है और गन्नू के ऊपर 307 का मामला कायम होता है ,वहीं दूसरी ओर गन्नू की ओर से दुकान संचालक के ऊपर भी मामला पंजीबद्ध कराया जाता है, सवाल यह पैदा होता है किसी की दुकान में घुसकर झगड़ा करेंगे तो मामला किस पर बनेगा?,परंतु 3 सितारा खाकीधारी जो इनकी शादियों में आकर नाचता है तो समझा जा सकता है,की जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का, और कानून को तोड़ने मरोड़ने की जानकारी आसानी से मिल जाती है ऐसे में गन्नू भारद्वाज को बचाने के लिए राजनीतिक एप्रोच के साथ-साथ कानून की धारा के साथ झोल झाल कैसे किया जाता है इसका जीता जागता उदाहरण सिवनी में देखने को मिल रहा है बाहुबली चौक में खुलेआम चाकूबाजी मारपीट की घटना करने वाला मुख्य आरोपी घटना स्थल से अपने पिता की गाड़ी में बैठकर जाता है ,फिर घटना के करीब डेढ़ घंटे बाद आरोपी गन्नू रिपोर्ट करने थाना जाता है, तब तक उसे चलने फिरने में कोई परेशानी नहीं होती और जैसे ही पुलिस उसे थाना में बंद करती है तो अचानक उसे पैर में दर्द होने लगता है और दर्द भी इतना कि पुलिस को अस्पताल लेकर जाना पड़ता है । कहीं मामले को लचीला बनाने की कवायद तो नही चल रही थी। खैर घटना के मुख्य आरोपी गन्नू के परिजन अपने पैसे और पावर से थाना में रिपोर्ट लिखाने में सफल भी हो गये हैं ,ये तो क़ानून का हिस्सा है क्योंकि कोई भी पीड़ित अगर रिपोर्ट लिखाने थाना जाता है तो रिपोर्ट दर्ज करना पुलिस का कर्त्तव्य है ।पर शर्त ये है कि रिपोर्ट लिखाने गए हो तो साथ में राजनीतिक अप्रोच और मनी पावर होना जरूरी है,वर्ना कितने आवेदन रोज कचरे की टोकरी में जा रहे है जिन पर यही लिखा होता है कि पुलिस रिपोर्ट नही लिख रही,कारवाही नही कर रही,खैर इस मामले को लेकर जिस पुलिस पर गन्नू के परिजन आरोप लगा रहे थे, उसी पुलिस के कुछ खाकीधारी लठ चमकाने की बजाए गले मे पट्टा बांधकर पूँछ हिलाते हुए गन्नू की मदत करते दिखाई दिए , जो निज स्वार्थ में खाकी को दागदार बना रहे है।
पुलिस थाना में आरोपी गन्नू को आखिर कौन दे रहा क़ानूनी मदद ?
विगत दो साल पहले थाना सिवनी में कांग्रेसी नेता संजय भारद्वाज के ऊपर शराब तस्करी का केस दर्ज किया गया था ,तब पुलिस विभाग के तीन सितारा अधिकारी और एक दो पुलिसकर्मी उसको पल पल की खबर देते थे, और उस शराबकाण्ड में कांग्रेसी नेता ने लगभग 59 दिनों की फरारी काटी थी । तत्कालीन पुलिस अधीक्षक कुमार प्रतीक को जब उन विभीषण पुलिस वालों की जानकारी लगी तो उन्होंने उन सभी बेईमान खाकीधारी को ठिकाने लगा दिया था , आज भी वे पुलिसकर्मी कुमार प्रतीक के नाम का रोना रोते हैं ,वर्तमान समय के घटनाक्रम को देखकर यही प्रतीत हो रहा है कि उन पुलिसकर्मी में से कोई ना कोई आज भी शराब माफिया के पुराने नमक का कर्ज अदा कर रहा है तभी तो आरोपी गन्नू को थाना के लाकअप में रात बिताने के लिये गद्दा की व्यवस्था की गई, फिर उसकी रिपोर्ट पर अपराध दर्ज किया जाता है, फिर अचानक आरोपी के पैर में दर्द हो जाता है और अब ऐसा न हो कि नमक का कर्ज अदा करने वाले कुछ बेईमानो के कारण आगे जाकर वो दर्द कही फेक्चर में ना बदल जाये । ये सब प्रयास मुख्य आरोपी की जमानत के लिये किये जा रहे हैं,और अगर जमानत एन केन प्रकरण मिल जाती है तो अपराधियों के हौसले बुलंद होंगे और प्रार्थी का धाराओं के ऊपर से भरोसा उठ जाएगा ,हमारे विश्वसनीय सूत्र की माने तो आरोपी गन्नू के ऊपर बने गंभीर केस से उसे बचाने या केस कमजोर करने के सारे ताने बाने थाना में ही बुने जा रहे हैं । थाना में किसके इशारे में कौन पुलिसकर्मी विभीषण का रोल अदा कर रहा है ये आने वाले समय में पता चलेगा ,फ़िलहाल आरोपी की जमानत की जुगत में उसके परिजन कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं की मदद लेकर अपना काम कर रहें हैं । अब न्यायपालिका पर सबकी निगाह लगी है क्योंकि धारा 307 में आरोपियों को चार पाँच माह के बाद ही जमानत मिल पाती है । अब इस केस में पता चल जायेगा कि पैसा और पावर की दम के आगे कानून से बचने धाराओं को कितना मुलायम किया गया है।
स्वार्थ,दबाव,डर आखिर किस कारण, सच न लिखकर पोग रही कलम
आजकल कुछ अखबार छपकर बिक रहे हैं ,तो कुछ अखबार बिककर छप रहे हैं, जो कलमकार सच्चाई नही लिख सकते वह निर्णायक की भूमिका निभाकर कलम चला रहे हैं, स्वार्थ, दबाव या डर न जाने किस कारण कुछ कलमकार वीडियो में दिख रहे सच को नज़रंदाज़ कर समाज का प्रतिष्ठित बड़ा तबका को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं जो प्रतिष्ठित सामाजिक तबका बाजार की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है, जबकि विवाद का वाइरल वीडियो में दिख रहा सच ज़िला ही नही प्रदेश के सामने है,और जो चाकू लहरा रहा है,वो कोई साधु संत नही बल्कि अवैध हथियार में पुलिस की मेहमान नवाजी में राह चुका है,पहले भी मारपीट के वीडियो में चर्चित हो चुका है। इस मामले में गन्नू भारद्वाज के साथ नरमी तब बरती जा सकती थी जब कांग्रेस के उपाध्यक्ष संजय भारद्वाज शहर के अमन चैन और शांति के लिए विवाद को सुलझाने की कोसिस करते, दो चांटे अपने ही पुत्र को लगाकर मामला को शांत करा दिये होते और उसके बाद कानून का सहारा लिये होते,परंतु सूत्र बताते हैं कि जब चाकुबाजी हो रही थी तो संजय भारद्वाज बाहुबली चौक में ही खड़े थे, और कानून को हाथ मे लेते गन्नू को चाकू चलाते अपनी आंखों से देख रहे थे, ऐसे में जिसे शहर के अमन चैन से कोई मतलब नहीं, कानून का जिसे खौफ नहीं तो फिर उसके खिलाफ सच ना लिखकर नरमी दिखाना कहां तक सही है ,अगर ऐसी गुंडई चलती रही और चौथा स्तंभ नरमी दिखाकर अपनी भूमिका निभाते रहा तो आने वाले समय में वो जद दूर नहीं जहां आप और मैं रहते हैं।