ससुराल में आये दामाद जैसा लुफ्त उठाया
जनता के टैक्स से तनखा लेकर कर रहा मौज
जिला अस्पताल मे पदस्थ सहायक ग्रेड 2 घनश्याम बघेल फर्जी जाति प्रमाणपत्र के मामले में फंसे हुए है जो इन दिनों स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष बने घुम रहे है ताकि उनके ऊपर कोई कारवाही ना हो सके। विभाग से जुड़े सूत्र बताते है कि शायद स्वास्थ्य कर्मचारियों को यह नही पता था कि जिसे वह अपने संग़ठन का अध्यक्ष बना रहे है वह फर्जीवाड़ा करने में माहिर है और फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर उसने 2008 में प्रमोशन पा लिया था। विभागीय लोगो की माने तो सिर्फ 19 साल की उम्र में अनुकम्पा से नौकरी पाने वाले घनश्याम बघेल ने कभी अपने काम की तरफ ध्यान दिया ही नही वह जहाँ जहाँ भी पदस्थ रहे वहाँ वहाँ उनका विवादों से गहरा नाता रहा है।।
कार्यालय से नदारत रहते है घनश्याम बघेल नौकरी करने में नही है ध्यान
फर्जी जाति प्रमाणपत्र में फंसे घनश्याम बघेल कैसे बन गए स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष
वर्तमान में घनश्याम बघेल की पदस्थापना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय में है लेकिन घनश्याम बघेल कार्यालयीन समय पर कार्यालय में उपस्थित होते ही नही। विभाग में लगे सी सी टीव्ही कैमरे भी इसबात की गवाही दे सकते है कि घनश्याम बघेल कब कब कार्यालय आते है और कौन कौन से काम करते है। बताया जाता है कि कामचोरी के लिए ही घनश्याम बघेल कर्मचारियो के संगठन से जुड़ गए है ताकि कर्मचारियों की नेतागिरी कर काम अधूरा और दाम पूरा वसूल सके। बताया जाता है कि मात्र 19 वर्ष की आयु में 13 सितंबर 1993 में स्वास्थ्य विभाग दमोह में घनश्याम बघेल की नौकरी लग गई थी। चूंकि घनश्याम बघेल सिवनी जिले के ही निवासी थे तो उन्होंने सांठ गांठ कर कुछ वर्षो में ही सिवनी स्थानांतरण करवा लिया और अस्पताल में ऐसे पदस्थ हो गए की उन्हें कोई हिला नही पाया इस बीच उन्होंने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर वर्ष 2008 में पदोन्नती पा लिया था लेकिन छानबीन समिति ने 2017 में घनश्याम बघेल के जाति प्रमाणपत्र को ही फर्जी बता दिया जिसके बाद उनकी पदोन्नति रद्द कर दी गई थी लेकिन उनके विरुद्ध आपराधिक मामला पँजिबद्ध नही किया गया। फर्जीजाति प्रमाणपत्र के मामले में अपने आपको घिरा देख उन्होंने कर्मचारी संगठन का सहारा लिया लेकिन अब कर्मचारियों के सामने भी वह बेनकाब हो गए।
स्थानांतरण रुकवाने खटखटाया था माननीय न्यायालय का दरवाजा
जिला अस्पताल को अपनी बपौती समझकर फर्जी जाती प्रमाण पत्र लगाकर शासन को चुना लगाने वाले घनश्याम बघेल डॉक्टर नावकर के काफी करीबी माने जाते थे डॉक्टर नावकर के रहते जिला अस्पताल में घनश्याम बघेल की तूती बोलती थी, जिला अस्पताल के कर्मचारी को जबरन की अकड़ दिखाना और उन्हें धमकी देना साथ ही रोगी कल्याण समिति के कार्य में जमकर लापरवाही और अनियमितता घनश्याम के रहते हुई थी, डॉक्टर नावकर भी इन्हें क्यों बर्दाश्त करते थे यह तो जिले की जनता बेहतर जानती है, जिला अस्पताल के कर्मचारी तो प्रत्यक्षदर्शी हैं परंतु डॉ नावकर की सय पर अदना सा कर्मचारी जब जिला अस्पताल के कर्मचारियों पर हावी होने लगा तो शहर के एक युवा नेता ने घनश्याम बघेल के स्थानांतरण की कार्यवाही करवाई, परंतु घनश्याम बघेल अपने आम को स्थानांतरण से बचाने माननीय न्यायालय से स्थगन आदेश ले आया, स्थगन आदेश आने के बाद घनश्याम बघेल को सी एच एम ओ कार्यालय में जगह दी गई, जहां घनश्याम बघेल के हाथों में ऐसा कोई भी काम नहीं दिया गया जिससे शासन को हानि हो और पूरी पावर जाने के बाद घनश्याम बघेल अब सीएचएमओ कार्यालय भी कम ही आना-जाना करते हैं और अपनी मर्जी से नौकरी करते हैं ऐसा सूत्र बताते हैं।
बर्खास्त कर जेल भेजना था घनश्याम बघेल को
2008 में फर्जी जाती प्रमाण पत्र लगाकर पदोन्नति पाने वाला घनश्याम बघेल अब मुसीबत में पडने वाला है ,1993 में अनुकंपा नियुक्ति में नौकरी लगने वाले घनश्याम बघेल ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर 2008 में पदोन्नति पाई थी, 2008 से 2015-2017 के बीच छानबीन समिति ने घनश्याम बघेल के जाति प्रमाण पत्र को फर्जी साबित किया था ,विभाग ने जाति प्रमाण पत्र फर्जी होने पर दी गई पदोन्नति वापस ले लिया था, परंतु विभाग ने 2008 से लेकर 2017 तक की बढ़ी हुई वेतन और पदोन्नति का जो लाभ घनश्याम ने लिया उसे विभाग ने वापस नहीं लिया है नाही विभाग ने आज तक घनश्याम बघेल के ऊपर किसी प्रकार का आपराधिक प्रकरण दर्ज करवाया ,जबकि होना यह चाहिए था कि इस मामले में घनश्याम के ऊपर धारा 420 ,467, 468, 470 ,472 और 34 के तहत मामला पंजीबद्ध होना था ,जिसने प्रमाणपत्र बनाया उसे भी आरोपी बनाया बनाना चाहिए था, छानबीन समिति ने भी इस बात का उल्लेख कीया है ,क्योंकि फर्जी जाति प्रमाण पत्र से प्रमोशन पाया था जानबूझकर सरकार को धोखा दिया था तो उसकी बर्खास्तगी होना और दी गई पदोन्नति का लाभ भी वापस लेना चाहिए था ,जब आपराधिक प्रकरण दर्ज होता और जेल चला जाता और मामला सिद्ध होने के बाद सेवा समाप्ति भी की जाति परंतु विभाग ने घनश्याम को अभय दान देकर रखा हुआ है।