कलम अन्याय के खिलाफ लिखती है।
पुलिस अधीक्षक के सबसे विश्वासपात्र थानेदारों पर लगाया मारपीट और रिश्वत लेने का आरोप
आपको बता दें कि विगत कुछ माह से सिवनी जिले के पुलिस थानों में सब उल्टा पुल्टा चल रहा है ।एक तरफ एसपी जनता से सीधे संवाद करते हैं पर किस जनता से संवाद करते हैं ये समझ नहीं आता ।आये दिन किसी ना किसी थाना क्षेत्र में आम जनता के साथ पुलिस कर्मियों के द्वारा की जाने वाली मारपीट की घटनाएँ सुनने को मिलती हैं और आम जनता उसकी शिकायत भी करती हैं पर आज तक किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी पर कोई कठोर कार्यवाही होने की जानकारी ना मीडिया को मिली ना किसी आम जनता को ।अब एक ओर एसपी के थाना सिवनी के सबसे चहेते थानेदार की सेना का रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर थाना छपारा के थानेदार जो एसपी के सबसे खास माने जाते हैं उनकी सेना पर मारपीट कर प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाने का वीडियो सामने आ रहा है ।हम पुलिस के खिलाफ नहीं हैं पर हमारी कलम जिला की सलामती और अन्याय के खिलाफ बोलती है । आम जनता की हिफाजत और उनकी आवाज उठाने का काम क़लमकार का होता है ।अब देखना ये है कि जिला पुलिस अधीक्षक थाना सिवनी के रिश्वत वाले वीडियो पर और थाना छपारा के मारपीट के वीडियो पर किस तरह का एक्सन लेते हैं । क्या रिश्वत लेने वाले पुलिसकर्मी पर निलंबन की गाज गिरेगी ,देशभक्ति जनसेवा की बात करने वाली पुलिस ने एक बुजुर्ग को इतना मारा कि उसका गूदा बाहर निकल गया, ऐसी परिस्थिति में क्या पुलिस को अमानविय चेहरे के रूप में दिखाने वाले पुलिस की छवि को धूमिल करने वाले पुलिसकर्मी को निलंबन की मार झेलनी पड़ेगी, क्योंकि इसके पहले जो भी पुलिस कप्तान रहे जनता के साथ ऐसा दुर्व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों को त्वरित कार्रवाई करते हुए निलंबित करते थे।
कोतवाली के पुलिसकर्मी सुरेश सोनी पर लगा 4000 रिश्वत लेने का आरोप
विगत दिवस सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जो पुलिस विभाग की छवि को धूमिल करता हुआ दिखाई दिया ,परंतु जनता के बीच में वीडियो सुर्खियां बटोर रहा है, एक तरफ पुलिस कप्तान इमानदारी से अपनी नौकरी करने की हिदायत पुलिसकर्मियों को दे रहे हैं ऐसा बार बार दिखाई और सुनाई पड़ता है वहीं दूसरी ओर पुलिस के नाम पर बट्टा लगाने वाले कुछ पुलिसकर्मी नाही अपने आला अधिकारियों की सुन रहे हैं और ना ही वर्दी की लाज रख पा रहे हैं, बताया जाता है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सुरेश सोनी जो कोतवाली में पदस्थ हैं किसी मारपीट के मामले में 4000 रु रिश्वत मांग रहे हैं, सामने वाला बार-बार यह बोल रहा है कि मेरे पास 15 सो रुपए हैं परंतु सुरेश सोनी चार हजार की रकम पर अड़े हुए हैं यह वीडियो कब का है यह तो कहा नहीं जा सकता परंतु वीडियो बना है तो कुछ तो सच्चाई होगी हालांकि सिवनी न्यूज़ इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता पर वीडियो में जो दिखाई दे रहा है उसे नकारा भी नहीं जा सकता ,यह खाकी के ऊपर लगता हुआ एक दाग है अब देखना है पुलिस कप्तान इस मामले में क्या कार्यवाही करते हैं।

छपारा पुलिस ने बुजुर्गों को इतना मारा कि उसका गुदाद्वार बाहर आ गया
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की बात करें तो एक वीडियो जमकर सुर्खियां बटोर रहा है जिसमें छपारा अस्पताल में बुजुर्ग को पुलिस वाले इलाज कराने लाते हैं और वह बुजुर्ग और उसका पुत्र चीख चीखकर पुलिस वालों के ऊपर आरोप लगा रहा है कि उन्होंने इतनी बेरहमी से उसे मारा है की उसका गुदा द्वार से गुदा बाहर आ गया है ,बताया जाता है की छपारा पुलिस चमारी गांव करिया डेहरिया को पकड़ने गई थी कोई गांजे का मामला बताया जा रहा है और उसे इस कदर मारा कि उसका गुदाद्वार बाहर आ गया ,वही अस्पताल में बुजुर्ग करहाते हुए यह चिल्ला रहा है की वह गांजा पीता है और उसे गांजा का सप्लायर बताकर उसके पेट में इतना मारा कि उसका गुदाद्वार बाहर आ गया ,वह बुजुर्ग बार-बार पीली शर्ट वाले पुलिसकर्मी ने मारा है यह बोल रहा था विश्वसनीय सूत्र बताते हैं की छपारा पुलिस थाने में पदस्थ जयेंद्र बघेल और जय सिंह बघेल का नाम इस बुजुर्ग को मारने में सामने आ रहा है ,कप्तान अगर चाहे तो पुष्टि हो सकती है ,जब रवानगी के रजिस्टर में यह देख ले की चमारी जाने के लिए कौन सा बघेल पुलिसकर्मी गया हुआ था और उस पुलिसकर्मी को उस बुजुर्ग के सामने लाकर खड़ा कर दें, तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगी ,माना कि वह बुजुर्ग अपराधी होगा ,परंतु क्या इतनी बेरहमी से उस बुजुर्ग को मारना मानव अधिकारों का उल्लंघन नहीं है, ऐसे तो पुलिस मित्रवत व्यवहार करने की बात करती है पर पुलिस की ऐसी हरकत से जनता तो डरने लगेगी ,अपराधी में पुलिस का कोई खौफ नहीं और आम जनता पुलिस से डरेगी तो देशभक्ति और जन सेवा कैसे होगी? अब देखना यह है की पुलिस के ऊपर बट्टा लगाने वाले पुलिसकर्मी जिन्होंने बुजुर्ग की बेरहमी से पिटाई की है उस पर कप्तान क्या कार्रवाई करते हैं?

थाना लखनादौन का जुआफड़ की चर्चा जोरों पर
पूरे जिला में एक ही बात गूंजती है कि जिले के पुलिस अधीक्षक बहुत ईमानदार और तेज हैं जो सत्ता पक्ष के नेताओं की भी नहीं सुनते ,अब बात करते हैं थाना लखनादौन के जुआफड़ की जिसे पुलिस कप्तान द्वारा दूसरे थाना की पुलिस से रेड कराया गया,मतलब साफ है कि थाना लखनादौन के थानेदार और डीएसपी को एसपी का कोई भय नहीं है ,लखनादौन की जनता दबे जुबान से यह बोल रही है कि थानेदार और डीएसपी की जोड़ी ने लखनादौन क्षेत्र को अवैध शराब जुआ और सट्टा का गढ़ बना दिया है । बात भी इसलिये सही साबित हो रही है कि जिला के कप्तान ने अपनी बदनामी ना हो सोचकर दूसरे थाने की पुलिस टीम से जुआ रेड कराया और थानेदार और डीएसपी के ऊपर कोई कार्यवाही ना कर छोटे कर्मचारियों पर कार्यवाही की गई

लखनादौन के थानेदार और डीएसपी लगभग एक दशक से इस जिले में नौकरी कर रहे हैं और जिले की आबो हवा से पूरी तरह वाक़िफ भी हैं । इसके बाद भी अगर इनके एरिया में जुआफड़ पर छापा डलता है तो इसे क्या माना जाए । इस पूरे मामले में पुलिस कप्तान को थानेदार और डीएसपी से पूछना चाहिए कि इनके रहते जुआ फड़ कैसे चल रहा था। जबकि लखनादौन थानेदार और लखनादौन डीएसपी की हकीकत से पुलिस कप्तान भले ही परिचित ना हों पर आम जनता बहुत अच्छे से जानती है । कि ये पुलिस अधिकारी सिवनी जिले में पहले भी रह चुके हैं ,कई साल जिले में पदस्थ रहे हैं थानेदारी भी किए हैं, इन्हें जिले का चप्पा चप्पा पता है यह बहुत अच्छे तरीके से जानते हैं कि कौन जुआ खिलाता है,कौन सट्टा खिलाता है, कौन नंबर 2 के काम करता है ,उसके बावजूद अगर लखनादौन थाना क्षेत्र में जुआ चल रहा था तो इन्हें भनक कैसे नहीं लगी? तीन थानों की पुलिस ने कार्यवाही की और लखनादौन थाने के छोटे कर्मचारियों पर गाज गिरी आखिर ऐसा क्यों?