शासन को धोखा देने नौकरी लगने के 04 महीने पहले ही घनश्याम बघेल ने बनवाया था एससी का जाति प्रमाणपत्र-
सच्चे को लगे फांसी और झूठे को जग पतियाये की कहावत इन दिनों जिला अस्पताल में पदस्थ घनश्याम बघेल पर सटीक बैठती है जहां एक ओर सच्चाई और ईमानदारी से काम करने वाले आज भी दबे और कुचले दिखाई देते है वही दूसरी ओर बेईमानी से नौकरी करने वाले घनश्याम बघेल जैसे झूठ फरेब के दम पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर ,बेधड़क नौकरी कर रहे हैं, अपने आपको इमानदार बताकर धौंस बताते हैं ऐसा ही मामला जिला अस्पताल में इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा है विगत अंक में हमने बताया था की सरकार को ठगने वाला, बेईमानी से नौकरी करने वाला घनश्याम बघेल किस तरह शासन को चूना लगा रहा है उसी कड़ी में हम आगे सुधी पाठकों को बता दें की जिला अस्पताल मे पदस्थ सहायक ग्रेड 2 घनश्याम बघेल ने वर्ष 2008 में फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर पदोन्नति पाया था लेकिन जब मध्य प्रदेश शासन अनुसूचित जाति कल्याण विभाग (राज्य स्तरीय सन्देहास्पद अनुसूचित जाति छानबीन समिति मध्यप्रदेश में शामिल अशोक शाह प्रमुख सचिव,दीपाली रस्तोगी आयुक्त, एम के मालवीय सचिव एव एम एस भलावी की समिति ने जांच उपरांत पाया था कि घनश्याम बघेल सिवनी जिले में पाए जाने वाली बागरी जाति के जो राजपूत कहलाती है जबकि उन्होंने मध्य प्रदेश के बागड़ी जो बागरी जाति के समरूप है इसका फायदा उठाते हुए जाति प्रमाण पत्र बनवाया था जिसके बाद उनकी पदोन्नति निरस्त कर दी गई थी। सिवनी न्यूज़ ने पाया कि घनश्याम बघेल ने अपनी नौकरी लगने के लगभग 04 महीने पहले ही एस सी का जाति प्रमाणपत्र बनवाया था। घनश्याम बघेल के पिता रेख लाल बघेल के दमोह में स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ थे जिनका निधन 1990 में हो गया था । पिता के निधन के बाद घनश्याम बघेल की अनुकम्पा नौकरी लगना था जिसने जाति प्रमाणपत्र की आवश्यकता नही थी यह बात घनश्याम बघेल भी जानते थे फिर भी उन्होंने 30/04/1993 को नायब तहसीलदार से जाति प्रमाणपत्र बनवा लिया।।
अप्रैल में बना जाती प्रमाणपत्र सितंबर में लग गई नौकरी
कूट रचित दस्तावेज करने की मंशा बनाकर ,आने वाले समय में शासन को चूना लगाने के लिए घनश्याम बघेल ने 30 अप्रैल 1993 में जाति प्रमाणपत्र बनवाया था ,जिसके लगभग 04 महीने बाद 13 सितंबर 1993 में ही स्वास्थ्य विभाग दमोह में उनकी नौकरी लग गई ,जहाँ कुछ वर्षों तक उन्होंने नौकरी किया और बाद में उच्च स्तरीय सेटिंग कर सिवनी अस्पताल में पदस्थ हो गए और उसी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर वर्ष 2008 में पदोन्नत हो गए थे, लेकिन छानबीन समिति ने 2017 में घनश्याम बघेल के जाति प्रमाणपत्र को ही फर्जी बता दिया जिसके बाद उनकी पदोन्नति तो रद्द कर दी गई लेकिन वह अभी भी नौकरी कर रहे है जबकि शासन को उन्हें बर्खास्त भी कर देना चाहिए था।
बर्खास्त करने की बजाय बर्दाश्त क्यों कर रहा विभाग?
अमूमन देखा जाता है कि शासन के साथ धोखाधड़ी करने वालों के लिए विभाग खुद ही 420 का मुकदमा दायर करते हुए संबंधित थाने में मामला पंजीबद्ध करवाती है,जबकि छानबीन समिति ने घनश्याम बघेल के जाति प्रमाण पत्र को फर्जी करार दे दिया, इसी जाति प्रमाण पत्र से 2008 में घनश्याम बघेल ने पदोन्नति पाई थी और जब जाति प्रमाण पत्र बोगस साबित हो गया तो विभाग ने 2008 में हुई पदोन्नति भी घनश्याम बघेल से छीन ली थी,घनश्याम पुनः अपनी पुरानी जगह पर आ गए, जब साबित हो गया की जाति प्रमाण पत्र फर्जी है, पदोन्नति भी छीन ली गई ,तो शासन के साथ धोखा करने वाले घनश्याम बघेल के ऊपर विभाग ने आज तक कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं करवाई ?जबकि नियमानुसार घनश्याम बघेल को बर्खास्त करते हुए उनके ऊपर शासन के साथ धोखाधड़ी करने का मामला पंजीबद्ध कराना चाहिए था ,आखिर विभाग घनश्याम बघेल को बर्खास्त करने के बजाय बर्दाश्त क्यों कर रहा है ?क्या विभाग के आला अधिकारियों की कोई बारीक नश दबा कर रखा हुआ है घनश्याम बघेल ने?