अपराधी में पुलिस का कोई ख़ौफ नहीं तभी तो दिन दहाड़े
हत्या ,गोलीबाजी , चाकूबाजी हो रही
लगभग एक दर्जन थानों के थानेदार पिछले चार पांच माह से अपने तबादले को लेकर शांत बैठ गए है उन्हें पता है कि रवानगी पक्की है इस कारण कोई काम नहीं कर रहे हैं,जनता को भी थानेदार यही बोलते नज़र आते हैं कि कुछ दिनों में लिस्ट आ जाएगी , हम यहाँ से चले जायेंगे , हमारी जानकारी के अनुसार जिला के लगभग दस से बारह थाना के थानेदार तीन साल से ऊपर का समय बिता चुके हैं जिनका जिला से हटना लगभग तय है और इसी कारण वे अपना काम भी ईमानदारी से नहीं कर रहे हैं और यही सोचकर समय पूरा कर चुके थानेदार समय काटते हुए पुलिस अधीक्षक के द्वारा चलाये जा रहे अवैध नशा, जुआ, सट्टा, अवैध हथियार के विरुद्ध खानापूर्ति करने का काम कर रहे है,जबकि विगत वर्षों की कार्यवाही को देखा जाये तो थाना सिवनी, डूंडासिवनी,कुरई ,लखनादौन ,छपारा ,धूमा सहित कई थानों में अवैध शराब और गाँजा की बड़ी बड़ी कार्यवाही हो चुकी हैं ।लखनादौन, किंदरई, धनोरा, केवलारी, आदेगांव, छपारा, बण्डोल, कुरई, सिवनी, बरघाट, अरी, लखनवाडा ,उगली सहित कई थाना क्षेत्र में गांव गांव देशी अंग्रेजी शराब बिक रही है और अवैध गाँजा भी बड़ी मात्रा में पुलिस के सहयोग से बिक रहा है ।
पुलिस शराब ठेकेदारों और गांजा तस्कर को दिलाती है फायदा
पुलिस अधीक्षक के द्वारा चलाये जा रहे नशा के खिलाफ अभियान में जिला की पुलिस पलीता लगाने का काम कर रही है क्योंकि अगर पुलिस भारी मात्रा में शराब पकड़ती है तो शराब ठेकेदारों को आरोपी नहीं बनाती । इसका सीधा फायदा शराब परिवहन करने वाले आरोपी को मिलता है ।विगत माह थाना छपारा में दो बार शराब की बड़ी खेप पकड़ाई पर शराब कहाँ से लाई गई ये आज तक पुलिस ने नहीं बताया ।जिले में प्रतिदिन किसी ना किसी थाना में अवैध गाँजा की कार्यवाही हो रही है लेकिन पुलिस को उक्त कार्यवाही में किलो दो किलो से ज्यादा गाँजा नहीं मिलता ।
पुलिस दो किलोग्राम गाँजा से कम का केस क्यों बनाती है ?
हम बताते है पुलिस 2 किलो गांजा से कम का केस क्यों बनाती है,सभी जानते है जिले के हर थाना क्षेत्र में दो चार जगह गाँजा बिकना आम बात है और उस गाँजा के व्यापार करने वाले को उस थाना की पुलिस पूरा सहयोग करती है,वो कैसे हम बताते है,पहले गाँजा के केस में आसानी से जमानत नहीं होती थी पर अब दो किलोग्राम के अंदर तक के गांजे के केस में जिला की अदालत से उसी दिन जमानत हो जाती है ,इसलिये थाना की पुलिस कागज का पेट भरने के लिये दिखावे की कार्यवाही करती है । जबकी जिले के बाहरी थाना बंडोल,छपारा ,लखनादौन, धूमा, आदेगांव, धनोरा ,घंसोर ,ऊगली,कुरई जैसे थानों में भारी मात्रा में गाँजा की खेप आती है और बिकती है पर पुलिस आधा किलो एक किलो की जप्ती कर महज कार्यवाही का दिखावा करती है ।विगत के सालों की तुलना की जाये तो वर्तमान थानेदारों का काम एक दम सुस्ती से चल रहा है जिसका परिणाम देखने को भी मिल रहा है ,कभी कोई अपराधी किसी ढाबा या होटल में अवैध हथियार से फ़ायरिंग कर रहा है, तो कभी कोई आशिक़मिजाज अपराधी दिन दहाड़े चाकूबाजी कर रहा है । सच तो ये भी है कि किसी भी समय कोई भी घटना कहीं भी घट सकती है ,पर अगर हमारे एरिया का थानेदार कड़क हो तो बाहर के पंछी भी आने से कतराते हैं ।
कमजोर हो गई है पुलिस की फौज ,तभी जुआरी और नलकटो कि हो रही मौज
जिले के सभी जुआ खिलाने वालों ने एक समूह बना लिया है और हर दिन करीब चार से पांच चार पहिया वाहन में जुआरियों को बैठाकर शाम के समय जिला के तीन चार थानों के सामने से गुजरकर मण्डला जिला और महाराष्ट्र की सीमा में जाते हैं ।अब सबसे बड़ा सवाल सिवनी पुलिस के लिये यही है कि जिले के नलकट अपने अपने वाहनों से हर दिन जिले की सीमा से बाहर जाते हैं और आते हैं तो आज तक संबंधित थाना की पुलिस ने उन्हे क्यों नहीं पकड़ा ? जबकि नलकट हर दिन शाम को जाते हैं और दूसरे दिन सुबह तक वापस भी आते हैं ।एक तरफ पुलिस दिल्ली से चोरी गई गाड़ियों को वाहन चेकिंग कर पकड़ लेती है तो इन नलकटों को क्यों नहीं पकड़ सकती ?हमारा तो मानना है कि जिले में पुलिस सिर्फ कागज में जुआ का खेल बंद बताती है जबकि जिले के सभी नलकट अपने अपने ग्राहकों को लेकर हर दिन जाना आना करते हैं ।
क्या ईमानदार पुलिस अधीक्षक का डर नही विभाग में ?
हम आपको बता दें कि वर्तमान पुलिस अधीक्षक बहुत ही ईमानदार और कड़क स्वभाव के हैं ऐसा लोगों के द्वारा बताया जाता है । अगर सही बात है तो थानेदार गोल मोल कार्यवाही जब करते हैं तो क्या उन्हें पुलिस अधीक्षक का डर नहीं रहता होगा ।अब बात करते हैं थानों में नौकरी करने वाले सिपाही ,हवलदार की सिवनी जिला में पुलिस मुख्यालय गृहमंत्रालय के आदेशों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ रही हैं । पुलिस हेड क्वार्टर के अनुसार जिले में एक सिपाही अपने गृह थाना में नहीं रह सकता और एक हवलदार अपने सब डिवीजन के थाने में पदस्थ नहीं रहेगा ।सिवनी जिला में कई आरक्षक अपने गृह थाने में नौकरी कर रहे हैं तो कई हवलदार अपने सब डिवीजन के थानों में नौकरी कर रहे हैं । ये बात बताना इसलिए जरुरी है कि अधिकांश आरक्षक और हवलदार वर्षों से अपने गृह थाना में रहकर नौकरी कम खेती बाड़ी का काम ज्यादा कर रहे हैं ।हमारा मक्सद पुलिस के खिलाफ लिखने का सिर्फ इतना है कि जिला के ईमानदार पुलिस अधीक्षक अगर हमारी बातों में गौर करें तो कुछ हद तक थानेदारों के और सिपाही हवलदारों के काम में सुधार आ सकता है और विगत कुछ दिनों से पुलिस की कार्यवाही के गिरते ग्राफ में सुधार भी हो सकता है ।