Home सिवनीं न्यूज़ अस्पताल में नौकरी और फर्जी जाति प्रमाण पत्र का खेल

अस्पताल में नौकरी और फर्जी जाति प्रमाण पत्र का खेल

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अस्पताल में नौकरी और फर्जी जाति प्रमाण पत्र का खेल

घनश्याम बघेल आखिर कब जाएगा जेल

जब 06 साल पहले घनश्याम बघेल का जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया तो फिर किस आधार पर कर रहे नौकरी?

जिला अस्पताल में पदस्थ घनश्याम बघेल का जाति प्रमाण पत्र निकला फर्जी और पदोन्नति का प्रभार भी छिना गया था

ढुलमुल प्रशासनिक सिस्टम के कारण अब नौकरशाह बेलगाम हो गए है,जो जनता के टेक्स के  पैसों से तनखा लेकर अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए झूठ का सहारा लेकर नौकरी कर रहे हैं, फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर सरकार को चूना लगा रहे हैं ,धन लोलुपता और सरकार को चूना लगाने की मनसा से फर्जीवाड़ा करने से भी नहीं चूक रहे हैं ,इन्हें नौकरी जनता की सेवा करने के लिए दी गई है जनता के दिए गए टैक्स से इन्हें पेट पालने के लिए पगार दी जाती है पर अब ऐसे नौकरसाह मालिक बनने की मनसा पालते हुए नाही सरकार की सुनते हैं और ना ही नियम कानून की परवाह करते हैं और भ्रष्ट तंत्र के भ्रष्टाचार का दीमक इन जैसे कुछ बेईमान, मक्कार और दगाबाज कर्मचारियों में इस तरह घुस गया है कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे क्या कर रहे हैं केवल झूठ बोलकर नौकरी करते हुए शासन को चूना लगाना इनका मुख्य उद्देश्य है और ऐसा ही मामला सिवनी जिले में भी देखने को मिल रहा हैं हम बात करें तो  सिवनी जिले में भी कई ऐसे अधिकारी और कर्मचारी है जो फर्जी जाती प्रमाणपत्र के आधार पर ना केवल नौकरी कर रहे है बल्कि प्रमोशन भी पा रहे है । वही कुछ ऐसे अधिकारी और कर्मचारी है जिनके प्रमाणपत्र को छानबीन समिति ने फर्जी माना है फिर भी वह नौकरी कर रहे है ऐसे ही एक चर्चित कर्मचारी है घनश्याम बघेल जो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में सहायक ग्रेड 02 के पद पर पदस्थ थे ,जिनकी फर्जी जाति प्रमाण पत्र की शिकायत की गई थी जिसके बाद मध्य प्रदेश शासन अनुसूचित जाति कल्याण विभाग (राज्य स्तरीय सन्देहास्पद अनुसूचित जाति छानबीन समिति मध्यप्रदेश में शामिल अशोक शाह प्रमुख सचिव,दीपाली रस्तोगी आयुक्त, एम के मालवीय सचिव एव एम एस भलावी की समिति ने जांच उपरांत पाया था कि घनश्याम बघेल सिवनी जिले में पाए जाने वाली बागरी जाति के जो राजपूत कहलाती है जबकि उन्होंने मध्य प्रदेश के बागड़ी जो बागरी जाति के समारोह है इसका फायदा उठाते हुए जाति प्रमाण पत्र बनवाया था ,जांच समिति ने पाया था कि घनश्याम बघेल को नायाब तहसीलदार सिवनी ने 30/04/1993 को प्रमाड पत्र जारी किया  था।बताया जाता है कि वर्ष 1990 में घनश्याम बघेल के पिता रेख लाल बघेल के निधन के बाद उन्हें अनुकम्पा नियुक्ति दी गई थी, तब उन्होंने बागरी जाती प्रमाणपत्र लगाया था।।        

     फर्जी प्रमाण पत्र के भरोसे 2008 में पाया था पदोन्नति

 जांच टीम ने पाया था कि घनश्याम बघेल ने नायब तहसीलदार के द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर ही वर्ष 2008 को पदोन्नत हो गए थे। बताया जाता है कि छानबीन समिति ने 2017 को जांच प्रतिवेदन देते हुए यह पाया था कि घनश्याम बघेल को जारी किया गया जाति प्रमाण पत्र अवैध है, जिसके बाद उनसे पदोन्नति का प्रभार भी छीन लिया गया था जब घनश्याम बघेल का जाति प्रमाण पत्र अवैध पाया गया और उन्हें पदोन्नति से भी हटा दिया गया तो फिर अभी तक वह नौकरी कैसे कर रहे हैं? और किसकी कृपा से कर रहे हैं ?यह जांच का विषय हो सकता है ,घनश्याम बघेल के ऊपर विभाग के किन अधिकारियों का संरक्षण है? इसे लेकर भी जांच किया जाना चाहिए, क्योंकि जब छानबीन समिति ही उनके जाति प्रमाण पत्र को अवैध मान चुकी है तो फिर वह किस जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे हैं यह सबसे बड़ा प्रश्न है, जबकि छानबीन समिति ने जाति प्रमाण पत्र को फर्जी साबित कर दिया, जिसे मानकर घनश्याम बघेल से पदोन्नति का प्रभार भी छीन लिया गया ,तो यह साबित हो जाता है की जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया है, ऐसे में शासन को धोखा देने  वाले घनश्याम बघेल के ऊपर विभाग ने धारा 420 के तहत आपराधिक प्रकरण क्यों नहीं दर्ज करवाया? आखिर घनश्याम बघेल के ऊपर प्रशासनिक अमला इतना मेहरबान क्यों है ?परत दर परत हम इस मामले की कलई खोलेंगे और यह भी बताएंगे कि घनश्याम बघेल के करीबी और कितने लोग फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहे हैं,  देखना यह है घनश्याम बघेल को आखिर प्रशासनिक अमला कब तक जेल जाने से बचाता है?

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