सीहोर घटना पर हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
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हाईकोर्ट ने सीहोर बोरवेल घटना पर संज्ञाने लेते हुए कहा है कि बोरवेल साइलेंट किलर साबित हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण लापरवाही, जागरूकता में कमी तथा अपर्याप्त सुरक्षा के उपाय है। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में गत दिनों बोरवेल की घटना में ढाई वर्षीय मासूम बच्ची की मौत के मामले को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने संज्ञान याचिका की सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव तथा पीएचई विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि बोरवेल साइलेंट किलर साबित हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण लापरवाही, जागरूकता में कमी तथा अपर्याप्त सुरक्षा उपाय है। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
वर्तमान में ढाई साल की बच्ची की गई है जान
गौरतलब है कि सीहोर जिले के ग्राम मुगावली में गत 6 जून को ढाई साल की मासूम सृष्टि खेलते समय खेत में खुले बोरवेल में गिर गई थी। बच्ची बोरवेल में 40 फीट अंदर जाकर फंस गई थी। उसे बचाने के लिए रोबोटिक विशेषज्ञों, सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ कर्मियों की टीम ने कोशिशें प्रारंभ की थीं। बचाव अभियान में इस्तेमाल की जा रही मशीनों के कंपन के कारण बच्ची 100 फीट गहराई तक चली गई थी। बचाव कार्य लगभग 50 घंटे तक चला और उसे बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया। उसे उपचार के लिए ले जाया गया और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बच्चों को जिंदा दफन करने किलर बोरवेल का जाल बन गया है
संज्ञान याचिका में कहा गया था कि बच्चों को जिंदा दफन करने वाले किलर बोरवेल का जाल बन गया है। सूची काफी लंबी है राजकुमार, माही, साई, नदीम, सीमा, फतेहवीर, रितेश और हाल ही में सृष्टि के साथ-साथ कई और खुशमिजाज प्यारे बच्चों की मौत बोरवेल में गिरने के कारण हुई है। कुछ को बचा लिया गया और कुछ इस गहरी, अंधेरी खाई में खो गए। बोरवेल दुर्घटनाएं हमारे समाज के लिए काली छाया हैं। जिससे निर्दोष लोगों की जान को गंभीर खतरा होता है। ऐसी घटनाओं से पूरे देश व परिवारों को असहनीय पीड़ा देती है। भूजल तक पहुंचने के लिए मूल्यवान संसाधन बोरवेल साइलेंट किलर बन गए हैं। बोरवेल में दुर्घटनाएं आमतौर पर लापरवाही, जागरूकता की कमी और अपर्याप्त सुरक्षा उपाय के कारण होती हैं।
व्यवस्थित और निरंतर प्रयासों की अत्यंत आवश्यकता
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए छोटे बच्चों के बोरवेलों और नलकूपों में गिरने के कारण होने वाली घातक दुर्घटनाओं को रोकने के उपाय करने सभी राज्यों को निर्देश जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश तथा केंद्र व राज्य सरकारों के दिशा-निर्देशों के बावजूद कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है। सरकार के लिए स्थिति की गंभीरता को पहचानते हुए व्यापक सुरक्षा उपाय के कार्यान्वयन को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। सख्त प्रवर्तन, नियमित निगरानी और उत्तरदायित्व उपायों के माध्यम से उनका पालन नहीं किया जाता है, तो केवल दिशा-निर्देश जारी करना अपर्याप्त है। इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्थित और निरंतर प्रयासों की अत्यंत आवश्यकता है।इसके अलावा बोरवेल से जुड़े जोखिमों और बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में समुदायों को शिक्षित करने जन जागरूकता अभियान संचालित किए जाने की आवश्यकता है। इन अभियानों को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में संचालित किया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। सूचना प्रसार के साथ व्यक्तियों को ज्ञान और संसाधनों के साथ सशक्त बनाने के प्रयास होने चाहिए। जिससे वे अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
सरकार को उठाने होंगे कड़े कदम
इसके अलावा, सरकार को बोरवेल दुर्घटनाओं को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए विशेष टीमों और पर्याप्त उपकरणों सहित एक मजबूत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली स्थापित करनी चाहिए। परिणामों को कम करने और सफल बचाव कार्यों की संभावनाओं में सुधार करने के लिए त्वरित और समन्वित कार्रवाई महत्वपूर्ण है। इस मुद्दे के समाधान की जवाबदेही सर्वोपरि है। सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए कि लापरवाही, गैर-अनुपालन या बोरवेल दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार किसी भी कार्य के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए और उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। यह एक निवारक के रूप में काम करेगा और सुरक्षा नियमों का पालन करने के महत्व होगा। संज्ञान याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने अनावेदको को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।