जनपद पंचायत के अधीन भूखंडों का मामला
अंधेर नगरी चौपट राजा वाली कहावत तो आप लोगों ने सुनी ही होगी उक्त कहावत लालबर्रा जनपद पंचायत के द्वारा व्यापारियों को नीलाम किए गए कच्चे भूखंडों को जनपद पंचायत से एनओसी लिए बगैर अपनी मनमर्जी से अपनी सुविधानुसार बड़े-बड़े शोरूम और बड़ी बड़ी दुकान है पक्का निर्माण कर बना ली गई है। यहां तक की भूतल के साथ-साथ प्रथम और द्वितीय तल भी बना लिया गया है अब सवाल यह उठता है कि बाजार क्षेत्र की एक के बाद एक दुकानों का पक्का निर्माण होता गया और जनपद पंचायत द्वारा कोई रोक नहीं लगाई गई। जिस पर कहावत चरितार्थ हो रही है बगैर जनपद के अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से यह कार्य मुमकिन नहीं है जनपद पंचायत द्वारा आवंटित किए गए कुल 289 भूखंडों पर बने कच्चे कोठे की नीलामी शर्तों के आधार पर 1 वर्ष के लिए की जाती है जिसमें भूखंड धारी द्वारा किसी प्रकार का पक्का निर्माण कार्य नहीं किया जाना यहां तक कि धूप और बारिश से बचने के लिए छावनी बांधना भी अतिक्रमण की श्रेणी में रखा गया है ऐसे भूखंड धारी को काली सूची में डाल कर पुन: भूखंडों का आवंटन नहीं किया जाना है। बावजूद ऐसा मामला आज तक प्रकाश में नहीं आया जनपद पंचायत द्वारा अतिक्रमण कारी भूखंड धारियों को ही प्रतिवर्ष पुन: कमरों का आवंटन किया जा रहा है एक ओर बेरोजगारों की संख्या में दिन प्रतिदिन इजाफा हो रहा है वहीं दूसरी ओर नगर के धन्ना सेठों ने अपने और परिवार जनों के नाम से एक से अधिक भूखंड आवंटित करवा लिए ऐसे में बेरोजगार व्यक्ति अपनी रोजी रोटी के लिए दुकान लगाना चाहे तो उसे कमरों का आवंटन नहीं हो पा रहा है और कभी बेरोजगार साथियों को अपना व्यवसाय खोलने के लिए भूखंड मिलेंगे भी नहीं क्योंकि यहां पर कोई नियम कानून नहीं चलते धन्ना सेठों के रसूख और पहुंच के आगे प्रशासन भी नतमस्तक दिखाई पड़ रहा है।
