Home सिवनीं न्यूज़ पैसा बचा रहा थर्मल पावर प्लांट

पैसा बचा रहा थर्मल पावर प्लांट

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पैसा बचा रहा थर्मल पावर प्लांट

 कीमत चुका रहे लोग

थर्मल पावर की आड़ में चांदी काट रहे नेता, प्रशासन की ऐश

सिवनी- सिवनी जिले के आदिवासी अंचल लखनादौन विधानसभा के बरेला(घंसौर) में स्थापित है जिले का एक मात्रा झाबुआ पावर लिमिटेड, जो एनटीपीसी के साथ संयुक्त रूप से मिलकर संचालित हो रहा है। इससे निकलने वाले धुए से जहां एक ओर वायु प्रदूषण हो रहा है तो दूसरी ओर कोयले के जलने से जो राख(डस्ट) निकल रही है वह भी आसपास के ग्रामीणों के लिए है हानिकारक।

प्लांट के प्रदूषण से हो रहा ट्यूबरक्लोसिस

हाल ही में  थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाले धुआ एवं फ्लाई एश मनुष्य के स्वास्थ्य पर हानिकारक असर डालने को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। जिसमें बताया गया कि किस तरह थर्मल पावर प्लांट यानी ऊष्‍मीय विद्युत संयंत्रों से निकलने वाला धुआं व फ्लाई ऐश लोगों के फेफड़ों को छलनी कर रही है। देश के हर उन जगहों पर जहां थर्मल पावर प्लांट हैं, वहां ट्यूबरक्लोसिस के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। बिजली बनाने के लिये कोयला जलाया जाता है, जिससे लाखों टन राखड़ निकलती है और अपने साथ घातक रासायनिक तत्व लेकर लोगों के फेफड़ों में प्रवेश करती है। सरकार ने पावर प्लांट से फैलने वाले प्रदूषण को रोकने के लिये तमाम एडवाइजरी तो जारी कर दीं, लेकिन प्रदूषण रोकने में नाकाम विद्युत संयंत्रों पर कोई ठोस ऐक्शन नहीं लिया।

बुलेट ट्रेन की नही प्रदूषण रोकने की जरूरत थी

ग्‍लोबल सब्सिडीज इनीशियेटिव (जीएसआई) ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया कि चार साल पहले बनाये गये सरकारी कानूनों को पूर्ण रूप से लागू करने में कितना खर्च आयेगा। इस ताजा अध्‍ययन में अनुमान लगाया गया है कि सेहत के लिये बेहद हानिकारक तत्वों – सल्‍फर डाई ऑक्‍साइड, नाइट्रोजन ऑक्‍साइड और पार्टिकुलेट मैटर को रोकने के लिये प्रौद्योगिकी संयंत्र लगाने में कुल खर्च 86,135 करोड़ रुपये  आयेगा। वहीं अगर 2027 में रिटायर होने वाले पावर प्लांट में अगर ये संयंत्र नहीं लगायें तो कुल खर्च 73,176 रुपए आयेगा।इस रिपोर्ट के आंकड़े और बुलेट ट्रेन की लागत की तुलना करें तो आप यही कहेंगे कि हमें बुलेट ट्रेन नहीं, नई टेक्नोलॉजी चाहिये। बुलेट ट्रेन की प्रस्‍तावित कीमत 1.1 लाख करोड़ है। जबकि प्रदूषण रोकने वाले संयंत्र की कीमत 86 हजार करोड़। यानी अगर मोदी सरकार बुलेट ट्रेन की कीमत का 75 फीसदी भी पावर प्लांट पर खर्च कर देती, तो शायद आने वाली जैनरेशन(पीड़ी) प्रदूषण की मार से बच पाती।

प्लांट कमा रहा रुपया खामियाजा भुगत रही जनता

इंटरनेशनल इंस्‍टीट्यूट फॉर सस्‍टेनेबल डेवलपमेंट (आईआईएसडी) के ग्‍लोबल सब्सिडीज इनीशियेटिव (जीएसआई) और काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवॉयरमेंट एण्‍ड वॉटर (सीईईडब्‍ल्‍यू) द्वारा किये गये इस अध्‍ययन में शामिल सीनियर एनर्जी इकोनॉमिस्‍ट विभूति गर्ग ने बताया कि हवा में घुल रहे प्रदूषण का खामियाजा हमारे समाज को भुगतना पड़ रहा है, ज‍बकि थर्मल पॉवर उत्‍पादक जरूरी उपकरण को लगाने की बहुत अधिक लागत की दुहाई देकर इस काम को करने में देर कर रहे हैं।

सवाल यह खड़ा होता है कि जब थर्मल पावर से निकलने वाले धुआं और डस्ट इतनी हानिकारक है, इसके बाद भी हमारे क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन ने आखिर क्यों चुप्पी साध रखी है जबकि जिले का घंसौर क्षेत्र पहले से ही बेरोजगारी का दंश झेल रहा है और अब प्लांट से निकलने वाला प्रदूषण लोगों को बीमार कर रहा है क्या अब इतना होने के बाद भी जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि कुछ कार्यवाही करेंगे या सिर्फ आश्वासन देंगे।

निरंतर जारी……….

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