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कांग्रेस के ईमानदार कहलाने वाले नेताओं पर टिकी सबकी नजरें

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कांग्रेस के ईमानदार कहलाने वाले नेताओं पर टिकी सबकी नजरें

भाजपा के नेताओ के खुलेआम प्याज़ काटने की चर्चा के बीच कांग्रेस नेताओं पर पीठ में छुरा डालने का आरोप सुर्खियां बटोर रहा

विधानसभा चुनाव का पहला चरण मतदान खत्म हो चुका है ,प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम मशीन में कैद हो चुकी है,जिसका खुलासा 3 दिसंबर को होने वाला है,कयास लगाए जा रहे हैं,आकलन और गुणा भाग लगाकर सभी पार्टियों के समर्थक और प्रत्याशी,जीतने का दम भर रहे हैं,इसी बीच टिकट मांगने से लेकर चुनाव संपन्न होते तक दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता और दावेदार के कार्यकलापों का आकलन भी पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारी के द्वारा किया जा रहा है,शिकवे शिकायतों का दौर शुरू हो चुका है, दोनो पार्टियों के जिला अध्यक्षों से शिकायत की जा रही है,किसी पार्टी के नेताओ ने खुलकर विरोध दिखाया तो किसी पार्टी में नेताओ ने अंदर ही अंदर पीठ पर छुरा डालने का काम किया  है ऐसा जन चर्चा का विषय बना हुआ है,इसी बीच चौक चौराहों में यह चर्चा चल रही है कि भाजपा के कुछ नेताओं ने प्रत्याशी की जमकर प्याज काटी है,तो वही लोग चटकारे लेकर यह बात भी कर रहे की भाजपा के नेताओं ने तो खुलकर प्याज काटी पर कांग्रेस के नेताओं ने पीठ पर छुरा डाला हैै।


क्या राजकुमार उर्फ पप्पू खुराना की बनाई गई टीम का दिखेगा असर ?

चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष राजकुमार उर्फ पप्पू खुराना ने कांग्रेस  संगठन को बहुत मजबूत किया था,इस बात से गुरेज नहीं किया जा सकता,उन्होंने जिस रणनीति से तैयारी की थी ,उसे देखकर यह लग रहा था कि इस बार कांग्रेस मजबूती के साथ चुनाव में टक्कर देगी,इसके पीछे कारण भी था की राजकुमार खुराना स्वयं टिकट  की इच्छा रखे हुए थे, परंतु पार्टी का निर्णय नवयुवक को टिकट दी गई,युवा प्रत्याशी को टिकट मिलने के बाद लगातार चुनाव का हल्ला सोशल मीडिया पर काफी दिखाई दिया  ,हालांकि यह पूरा हल्ला युवा प्रत्याशी की टीम का दिखाई दिया,परंतु कहीं पर भी राजकुमार खुराना के बनाये गए संगठन की मजबूती दिखाई नहीं दी,जितनी उम्मीद राजकुमार खुराना के द्वारा बनाए गए संगठन को लेकर की जा रही थी, क्या राजकुमार खुराना के द्वारा बनाई गई टीम इस चुनाव में कुछ नया कर दिखायगी ? अगर ऐसा नही हुआ तो संगठन की सक्रियता के कई मायने निकल कर सामने आएंगे।

क्या ब्रजेश लल्लू बघेल ने बटोरे होंगे सामाजिक वोट ?

बृजेश उर्फ लल्लू बघेल जो वार्ड नंबर 1 से जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत के उपाध्यक्ष थे,कुछ दिनों पहले ही उनका चुनाव शून्य हुआ है,लल्लू बघेल जो जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पप्पू खुराना के काफी करीबी माने जाते थे,जिला पंचायत का अध्यक्ष बनने के लिए उन्होंने खूब प्रयास किए पर जाति प्रमाण पत्र न होने की वजह से वह अध्यक्ष नहीं बन पाए,जिसका ढिकरा भाजपा के विधायक दिनेश राय मुनमुन के ऊपर फोड़कर समाज को एक संदेश भी देने की कोशिस कांग्रेस ने की,अब देखना यह है की क्या बघेल समाज को बृजेश लल्लू बघेल समेट पाए हैं या नहीं ?क्योंकि बृजेश  उर्फ लल्लू  बघेल भी टिकट की दावेदारी में अव्वल चल रहे थे,दावेदारी के समय ही इंदिरा भवन में उनके करीबी से विवाद की बात भी शोर मचाई थी और उसके बाद उनका दावेदारी से मोह भंग हो गया था,अब ऐसे में युवा प्रत्याशी को टिकट मिलने के बाद वह कई बार मैदान में दिखाई तो दिए पर परिणाम देखकर ही यह पता चल पाएगा कि उन्होंने कितनी मेहनत अपने समाज के वोटो को बटोरने में की है,क्योंकि 17 नवंबर को मतदान दिवस था और 16 नवंबर को ही बृजेश उर्फ लल्लू बघेल के चुनाव शून्य करने के आदेश  कमिश्नर न्यायालय से पारित हो गए थे,आवेदक, अनावेदक और उनके अधिवक्ताओं को इसकी जानकारी संभवत: रही होगी,परंतु इस मामले को उजागर नहीं करना भी कई तरह के प्रश्न खड़े करता है,क्योंकि यह आदेश अगर 16 तारीख को जनता के बीच आ जाता तो गलतफहमी पैदा कर हजारों की संख्या में सामाजिक वोट को पलट सकते थे,परंतु मतदान होने के बाद में यह आदेश जनता के बीच में आना बहुत से राज के ऊपर पर्दा डाल रहा है।

क्या मोहन चंदेल की नाराजगी से फर्क पड़ा होगा कांग्रेस को ?

मोहन चंदेल कांग्रेस के कद्दावर नेता है,लंबे समय से जनता से जुड़ाव होने के कारण 2018 में लगभग 78000 वोट पाकर  उन्होंने शिकस्त पाई थी, एक बड़ा वोट बैंक उन्होंने कांग्रेस को बनाकर दिया था,उसमें उनके सामाजिक और उनके निजी संबंधों के साथ-साथ राजकुमार खुराना के समय के 42000 वोट भी जुड़े हुए थे,इस बार उनकी दावेदारी भी मजबूत थी,परंतु उन्हें टिकट नहीं मिलने पर वह  नाराज भी थे,कमलनाथ की आमसभा में उन्होंने पूरे जोश के साथ अपनी नाराजगी हजारों की संख्या के बीच कमलनाथ को दिखाई थी,अगर मोहन चंदेल अपने क्षेत्र में ही पुराने वोटो को जिंदा कर लिए होंगे तो कांग्रेस को इस चुनाव में लाभ मिलने  से कोई नहीं रोक सकता है,अब देखना यह है की मोहन चंदेल ने जिस प्रकार कमलनाथ के सामने नाराजगी दिखाई थी,तो इस चुनाव में उस नाराजगी का क्या फर्क पड़ा ?क्या उन्होंने अपने वोट जिंदा कर पाए जिसे युवा प्रत्याशी को दिलवाना था? या फिर उनकी नाराजगी देख उनको मानने वालों ने अपना रास्ता बदल लिया ?

क्या राजा बघेल को टिकिट न मिलने से  कांग्रेस को नुकसान हुआ होगा ?

कांग्रेस के कद्दावर नेता राजा बघेल जो प्रदेश स्तर के नेता है,चुनाव लड़ने का हुनर उनके पास अच्छा खासा है ,राजनीति का अनुभव उनके पास है,वे भी टिकट की दावेदारी में प्रमुख स्थान पर बने हुए थे ,यहां तक की टिकट के आवंटन के वक्त  दिल्ली में ही आसन जमाये बैठे थे,यह बात स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी कि राजा बघेल को टिकट मिल जाएगी,राजा बघेल को टिकट मिलने पर वह चुनाव को एक नए परिदृश्य में ले जा सकते थे, ऐसा जनता के बीच चर्चाआम हो चुकी थी,अचानक से युवा प्रत्याशी को टिकट मिलने के बाद कुछ दिनों तक राजा बघेल कांग्रेस के खेमे में दिखाई नहीं दिए,हो सकता है टिकट न मिलने की वजह से उन्हें असहज महसूस हुआ हो, बात भी सही है उम्मीद लगाकर हर कोई रखता है टिकट किसी एक को मिलती है, परंतु उसके बाद भी राजा बघेल पूरी तरह सक्रिय नहीं दिखाई दिए राजा बघेल, बागरी समाज के जिला अध्यक्ष है, लगभग 40 हजार सामाजिक बंधुओ का प्रतिनिधित्व करने वाले राजा बघेल के पास युवा टीम भी तगड़ी है,पीड़ितों के लिए अधिकारियों से जूझकर लड़ने की ताकत और न्याय दिलाने का  जज्बा जनता जानती है,पर क्या अपने राजनीतिक हुनर,चुनाव लड़ने का अनुभव और अपने समाज के वोट सहीत अपनी युवा टीम का भरपूर उपयोग कर युवा प्रत्याशी के लिए वोट बटोरे होंगे ?  प्रत्याशियों की किस्मत 3 दिसंबर को खुलेगी,अब देखना यह है की राजा बघेल की टिकट काटने का कितना नुकसान कांग्रेस को झेलना पड़ेगा?,हालांकि राजा की टिकट काटने का श्रेय कांग्रेस के नेता सोहेल पाशा ले चुके हैं।

क्या सोहैल पाशा को टिकिट न मिलने से कांग्रेस को नुकसान पहुंचा  होगा ?

सोहेल पाशा नगर पालिका सिवनी के पार्षद और सभापति है,वे अध्यक्ष बनते बनते रह गए,सोहेल पाशा अल्पसंख्यक नेताओं में बड़ा नाम है,उनके कहे अनुसार कमलनाथ से उनकी डायरेक्ट बात होती है,बीच में उनका एक आॅडियो वायरल हुआ था,जिसमें उन्होंने अपना दुखड़ा रोते हुए यह बताया था कि राजा बघेल की टिकट उन्होंने कटवाए हैं, क्योंकि वह कौम का दुश्मन है,15 साल से वह मुस्लिम के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं,पर उन्हें टिकट नहीं मिली है,जबकि कमलनाथ ने खुद उन्हें तैयारी करने के लिए बोल दिए थे,और इस विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिलने के बाद वह सक्रिय भूमिका में भी कम ही दिखाई दिए है,जबकि अल्पसंख्यक नेताओं के बीच में उनका नाम चर्चित है, उनके पास युवा टीम बहुत मजबूत है,अगर इन्होंने युवा प्रत्याशी के लिए वाकई मेहनत कीये है,तो मुस्लिम वार्डों के मुस्लिम वोट कांग्रेस को मिलना चाहिए,परंतु अंदरखाने से यह बात भी निकल कर आई है,कि इस बार मुस्लिम वोटरों को कांग्रेस में वोट डलवाने के लिए जमकर मेहनत की गई है,परंतु  प्रत्याशी द्वारा की गई मेहनत में कहीं पर भी अल्पसंख्यक नेता का नाम नहीं आया है,ऐसे में अगर संतुष्टि पूर्ण अल्पसंख्यक मत कांग्रेस को नहीं मिलते हैं तो क्या यह माना जा सकता है कि अल्पसंख्यक नेता को टिकट नहीं देना  कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया है ?

क्या कांग्रेस के असल सिपाहीयों को नजरअंदाज करना कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया होगा ?

सूत्र बताते हैं कि इस चुनाव में  गिरधर भवन से लेकर इंदिरा भवन तक के असल कांग्रेस कार्यकर्ता का मन टूटा हुआ नजर आया,असल कांग्रेसी का मन फीका था और नकली कांग्रेसी चुनाव में ताकत झोंक रहे थे,सूत्रों की माने तो मजबूत संगठन बनाने के बाद एक बी टीम तैयार की गई थी,और यह बी टीम ऐसे लोगों को जोड़कर बनाई गई थी,जिसमे  कांग्रेस के सदस्य बहुत कम लोग थे, जो कांग्रेस के असल सदस्य थे उन कांग्रेस के असल सिपाहियों से जल्दबाजी में हर मोहल्ले, गली, कूचे और गांव से लिस्ट में नाम मंगवाकर उन्हें कागज में ही पद देते हुए जिम्मेदारियां दे दी गई थी,यहां तक तो ठीक था,असल कांग्रेसियों ने यह लिस्ट भी बनवा दी,पर उसके बाद चुनाव संचालन और उस संचालन को प्रतिरूप देने के लिए धन भी उन्ही नकली कांग्रेसियों के जेब में गया,इस बात की जानकारी अधिकांश असल कांग्रेसियों को नहीं दी गई और ना ही किसी प्रकार की कोई जिम्मेदारी दी गई,जब असल कांग्रेसियों को जानकारी लगी तो उनके मन फिके हो गए क्योंकि उनका कहना था कि धन उन्हें नही चाहिए ,वे तो पिछले 25 से 30 साल से अपने खर्चे पर अपने-अपने क्षेत्र में कांग्रेस वोटर और अपनी टीम को समेट कर रखे हुए हैं,परंतु जिन लोगों की लिस्ट उन्होंने आनन-फानन में बनाकर दी है,अब उस टीम के सदशयों को ऐसी जिम्मेदारी दी गई कि असल कांग्रेसी बड़े पद में होते हुए भी अब उनकी चौखट में जाकर अपने लिए जिम्मेदारी और काम कैसे मांगे,बस यह जरा सी चूक असल कांग्रेसियों के मन को ठेस लगा गई,वह असल कांग्रेसी है तो उन्होंने गद्दारी नहीं की ,पर किस हद तक काम किया होगा यह सोचनीय है,इन सब बातों को देखकर और सुनकर सवाल खड़ा होता है आखिर असल कांग्रेसियों को नजरअंदाज क्यों किया गया होगा ?क्यों अलग से बी टीम बनाई गई ?और अगर बी टीम बनाई गई और असल कांग्रेसी को नजरअंदाज किया गया ,तो असल कांग्रेसियों से इस चुनाव में क्या नुकसान होगा ?

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