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 तनख्वाह मध्यप्रदेश शासन देता है या अपराधी :हाई कोर्ट

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 तनख्वाह मध्यप्रदेश शासन देता है या अपराधी :हाई कोर्ट

हाईकोर्ट में झूठ बोल रहे हो तो नीचे क्या फितरत होगी

अपराधी को बचा रहे हो,ऐसा लग रहा है कि इस अपराध में शामिल हो

बचपन में कहानी सुनी थी की राजा महाराजा काल मे  कुछ ऐसे राजा होते थे जो तारीफ कराने के लिए भाट पालते थे, जिनका काम होता था केवल अपने राजा की तारीफ करना ,कहीं पर भी जाएं राजा के तारीफों के कसीदे बुनते रहते थे,और भाटो का पेट इसी से पलता था क्योंकि उनका काम ही भाट गिरी करना था,भले ही राजा कितना ही निर्दई और अत्याचारी क्यों ना हो, उसी परिपाटी को मानने वाले आज भी कुछ लोग दिखाई देते है, ऐसा नहीं कि भाट पालने वाले लोग ही दिखाई देते हो कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनमें भाट गिरी के गुण अभी भी जिंदा है, भले ही वह हर रूप से सक्षम हो, पर भाट गिरी किए बिना उनका पेट नहीं भरता है ,भाट रखने का गुण हो या भाटगिरी करने का गुण और जब ऐसे गुणवान लोग आपस में मिल जाते हैं तो फिर उस क्षेत्र की जनता के हाल हमेशा बुरे रहे हैं, इस बात को झूठलाया नहीं जा सकता, क्योंकि इतिहास पलटकर देखा जा सकता है की भाट पालने वाले राजा और भाटगिरी  करने वाले लोगों के कारण जनता हमेशा परेशान रही है, ऐसे भाट अपने आका की दलाली करने और भाटगिरी करने में ही अपना जीवन यापन करते हैं ,उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता की उनके शहर की जनता कितनी परेशान हैं, उनको शहर की जनता से कोई मतलब नहीं है कोई लेना देना नहीं है, उनको केवल जो भी अधिकारी कर्मचारी आए उनकी भाट गिरी कर अपना जीवन यापन करना है,ऐसे में साहब का स्थानांतरण हो गया है और भाट अनाथ हो गए हैं और भाट बिना सिरपैर की बात कर यह कोशिश कर रहे हैं कि राज्य सरकार से हुए स्थानांतरण को स्थानीय स्तर पर रुकवा ले, साहब ने इनको इतना भी नहीं बताया कि ऐसा नहीं होता है, धीरज रखो अब जो भी साहब आएंगे अगर मेरे जैसे  होंगे तो उनकी भाट गिरी कर जीवन यापन करना,वर्ना रोजगार गारंटी के काम तो खुले हैं, सहर के कुछ करोड़पति भी हैं भाटगिरी को अपनी उपलब्धि मानते हैं, पर चर्चा ऐसी चल रही है की सहाब के जाने के बाद जो भाट दलाली कर चांदी की चम्मच से खाना खाने लगे थे,अब वे ये भी भूल गए है कि आम काटकर खाना है या चूस कर खाना है, जाते-जाते साहब से पूछ लेते ।

क्या था मामला

जनवरी माह में मप्र, महाराष्ट्र राज्य के कार चोर गिरोह का पर्दाफाश हुआ था,जिसमे तीन कार सहित तीन आरोपी गिरफ्त में आये थे,कार चोर  हाइटेक तरीका इस्तेमाल कर डिकोडर डिवाइस के इस्तेमाल करते हुए कार चुराते थे, जानकारी के मुताबिक 12-13 जनवरी की रात सिवनी कोतवाली में शहीद वार्ड निवासी मोहम्मद आबिद अली की कार क्रमांक एमपी ६६ टी १४९५ अज्ञात चोरों द्वारा चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके अलावा जनता नगर निवासी अंजलि गजभिये ने थाना डूण्डासिवनी में अपनी कार क्रमांक एमएच ०५ बीजे ३०८७ चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिस पर पुलिस ने अज्ञात चोरों के विरूद्ध मामला कायम किया था। एसपी कुमार प्रतीक के द्वारा एडीशनल एसपी एसके मरावी एवं एसडीओपी पारूल शर्मा को थाना कोतवाली एवं थाना डूण्डासिवनी पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर चोरों की तलाश करने के आदेश दिए थे।कोतवाली थाना प्रभारी महादेव नागोतियां एवं डूण्डासिवनी थाना प्रभारी देवकरण डहेरिया के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने अज्ञात चोरों के सुराग तलाशने शुरु किये थे जांच के दौरान सायबर सेल से मिले तकनीकी सबूतों एवं मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने २१ जनवरी को आरोपी फरमान अली को सिवनी कार चोरी की घटना में प्रयुक्त कार एमएच ०९ ईके ०६५४ के साथ हिमांशु ढाबा खवासा के पास से हिरासत में लेकर पूछताछ की थी, पूछताछ में आरोपी फरमान ने अपने तीन अन्य साथियों मो. मूसा उर्फ ननकऊ, उदय पाटिल एवं सोहराब अली के साथ मिलकर तीन कार की सिवनी से चोरी किए जाने की बात कबूली थी, जिसके आधार पर पुलिस की अलग-अलग टीमें अन्य तीनों आरोपियों को तलाशने रवाना की गई थी, पुलिस के द्वारा आरोपी मूसा उर्फ ननकऊ को मोहगांव के पास कार क्रमांक एमएच ३४ एएम ६०३१ के साथ एवं आरोपी सोहराब अली को कुरई से कार क्रमांक एमएच ३४ एएम ३११५ के साथ हिरासत में लिया गया था,तीनों आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ करने पर पुलिस को उन्होंने सिवनी से दो कार चोरी करना बताया। इसके अलावा आरोपियों के द्वारा महाराष्ट्र के चंद्रपुर के रामनगर से एक सफेद रंग की कार क्रमांक एमएच ३४ एएम ६०३१, ब्रम्हपुरी से ग्रे रंग की कार क्रमांक एमएच ३४ एएम ३११५, पांढुर्ना से २ कार एवं महाराष्ट्र के पूना से २ कार चोरी करना बताया गया। आरोपियों के द्वारा कार चोरी में प्रयुक्त होने वाली डिकोडर डिवाइस हैदराबाद निवासी इमरान से ली गई थी, जो कि ८ कारों की चोरी के मामले में पहले से ही हैदराबाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार हो चुका है।आरोपियों के द्वारा सिवनी, पांढुर्ना एवं चंद्रपुर से चोरी की गई कारों को केके उर्फ मुस्तकीम खान निवासी लखनऊ को बेचना बताया गया। तीनों आरोपियों में से फरमान अली, इमरान के साथ हैदराबाद कार चोरी के मामले का फरार आरोपी था, चोरी की घटना का अन्य आरोपी उदय पाटिल निवासी कोल्हापुर महाराष्ट्र एवं केके उर्फ मुस्तकीम निवासी लखनऊ की तलाश पुलिस द्वारा की गई थी,आरोपियों से पुलिस ने तीन कार के अलावा, एक  डिकोडर डिवाइस एवं मास्टर चाबियां और ७० हजार रुपए नकद बरामद किए थे। पकड़े गए तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर चोरी की गई अन्य कार की तलाश व जांच की गई थी ,

थाना प्रभारी और SI सतीश उइके को जमकर लताड़ लगाई

बताया जाता है इस पूरे मामले में नागपुर के कोई पाटिल जो कि इस अपराध में शामिल था उसके बताए अनुसार पुलिस ने आरोपियों तो को गिरफ्तार तो कर लिया पर पाटिल को छोड़ दिया था और ऐसे में मामला हाई कोर्ट जबलपुर की माननीय हाई कोर्ट के समक्ष आया जिसमे सिवनी कोतवाली पुलिस की पोल खुली , सिवनी कोतवाली के प्रभारी महादेव नागोतिया और उनकी टीम झूठ बोलकर अपराधियों के साथ सांठगांठ कर थाना चला रहे हैं, माननीय न्यायाधीश महोदय के सवालों का जवाब देने में थाना प्रभारी और सबइंस्पेक्टर सतीश उइके की घीग्गी बंद गई थी, और हाईकोर्ट में भी माननीय न्यायाधीश के सामने झूठ पर झूठ बोल रहे थे, विवादित कार्यप्रणाली ,अपराधियों से सांठगांठ और तनख्वाह सरकार से लेने के बाद अपराधियों की मदद करने को लेकर माननीय न्यायाधीश ने थाना प्रभारी और SI सतीश उइके को जमकर लताड़ लगाई, यहां तक की माननीय न्यायाधीश जी ने यह तक कह डाले कि जब हाईकोर्ट में झूठ बोल सकते हो तो निचले स्तर पर तुम्हारी फितरत क्या होगी ? थाना प्रभारी को माननीय न्यायाधीश महोदय ने यह कहा कि क्या अपराध में तुम्हारी संलिप्तता है? अपराधी को बचा रहे हो, तनखा अपराधी देते हैं या मध्य प्रदेश शासन ,मध्य प्रदेश पुलिस को कटघरे में खड़ा करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर दाग लगाने के लिए महादेव नागोतिया ने कोई कसर नहीं छोड़ी ,अंततः इस पूरे मामले में माननीय न्यायाधीश ने सिवनी पुलिस अधीक्षक को SI सतीश उइके के ऊपर कार्यवाही करते हुए इस मामले को स्वयं की निगरानी में करने के निर्देश दिए और यह कह दिये की इन्वेस्टिगेशन की बारीकियां थानेदार नहीं समझते हैं।

वर्दी और वेतन अपराध खत्म करने मिलती है समाज सेवा का ढोंग करने नही

मध्य प्रदेश पुलिस विभाग ने खाकी वर्दी और वेतन देकर पुलिस को इसीलिए नियुक्त किया ताकि देशभक्ति और जन सेवा का नारा लेकर वह कमजोर और प्रताड़ित लोगों की मदद कर सकें, वह मदद हर तरीके से कर सकते हैं ,परंतु खाकी वर्दी की आड़ में मदद के नाम पर अपराधियों को शरण देना और समाज सेवा के नाम पर दलालों से घिरे रहने के कारण, थाना प्रभारी के रहते  क्राइम रेट को कम होने की बजाय क्राइम रेट बढ़ता गया, थाना प्रभारी की आड़ में चांदी काटने वाले दलाल और भाट बराबर चांदी काटते रहे और जब जब थाना प्रभारी की सच्चाई उजागर हुई  तब तब भाट और दलाल थाना प्रभारी की ढाल बनकर खड़े होते थे और थाना प्रभारी के गुणगान गाते है ,क्योंकि उन्हें पता है कि थाना प्रभारी जब चले जाएंगे तो इनका दाना पानी खत्म हो जाएगा और इन दलालों ने थानेदार की आड़ में अपराधियों को जो अभयदान देकर रखा हुआ है वह खत्म हो जाएगा, परंतु जब इस पूरे मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने थाना प्रभारी को लताड़ लगाई तो कोई भी भाट और दलाल सामने आकर थाना प्रभारी के पक्षधर नहीं बन पाये और जब थाना प्रभारी की कुंडली खुलना शुरू हुई तो भाट और दलाल विधवा अलाप कर रहे हैं , लूट खसूट को समाज सेवा का नाम दे रहे हैं परंतु मध्य प्रदेश सरकार ने वर्दी अपराध खत्म करने दी है अपने कर्तव्य से विमुख होकर समाज सेवा कर अपराध को बढ़ाने के लिए पुलिस की वर्दी नहीं दी गई है, परंतु इन अंगूठा छाप दलाल और भाटो को कौन समझाए कि भाटगिरी और दलाली करने वाले लोग ,बाहर से आए सरकारी नुमाइंदों को उनकी नौकरी कराने के बजाय शहर को खोखला करने के रास्ते क्यों मुहैया करा रहे हैं ? क्यों शहर की जनता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं? यह जितने भी दलाल और भाट हैं इन्होंने सरकारी नुमाइंदों  की तिजोरी भरी है और साथ ही साथ खुद ने चांदी काटी है, परंतु  समाज सेवा के नाम पर जो मदद की गई है उसमें भी कई राज दफन है, हम आपको बता दें कि मदद एक की हुई तो 9 का पैसा अंदर हुआ है, वरना रिकॉर्ड उठा कर देखा जा सकता है हालांकि इस मामले में बहुत से चटुए ,भाट और दलाल  अभी भी साहब की तारीफ के कसीदे अपने अपने साधन से बुनने की कोशिश कर रहे हैं, पर इस बात का सबूत नहीं दे पा रहे हैं कि क्राइम रेट कम हुआ है ,हम लगातार समाचार प्रकाशित कर यह बता रहे हैं की जिस काम के लिए खाकी वर्दी देकर तनखा दी गई थी उस काम को कितने अच्छे से किया गया है, समाज सेवा के लिए बहुत से एनजीओ सिवनी में काम कर रहे हैं जो निशुल्क काम करते हैं वेतन लेकर क्राइम खत्म करने के लिए थानेदार साहब को भेजा गया था ना कि समाज सेवा करने के लिए, पर जिनकी दाल रोटी साहब के भरोसे चल रही थी उनको इस बात से कोई मतलब नहीं कि सिवनी की जनता थाने की प्रक्रिया से कितने परेशान रहते हैं और अब जबकि सिवनी पुलिस को जबलपुर हाईकोर्ट ने लताड़ लगाते हुए यह बता दिया कि उनकी कार्यप्रणाली इतनी लचीली और अपराधियों को शरण देने वाली है  इस बात में संदेह नहीं की सिवनी में किस तरह से थानेदारी महादेव नागोतिया ने किए होंगे, शायद इस पूरे मामले को पढ़ने के बाद दलाल ,भाट और चापलूस सिवनी की जनता को बेवकूफ ना बना पाए और जनता भी समझ जाए की थाना प्रभारी वाकई में क्राइम रेट कम किए हैं या क्राइम को बढ़ावा दिए।

हाईकोर्ट ने महादेव नागोतिया सहित SI को लगाई थी फटकार

सिवनी थाना प्रभारी महादेव नागोतिया और सब इंस्पेक्टर सतीश उइके जब माननीय हाईकोर्ट जबलपुर में मुख्य न्यायाधीश श्री अग्रवाल जी के समक्ष पेश हुए तब माननीय न्यायाधीश ने सिवनी थाना प्रभारी से यह पूछा कि फास्टैग लगाकर गाड़ी चुराने वाले लोगों को गिरफ्तार क्यों नहीं किए तब थानेदार ने बताया कि वह आंध्र प्रदेश के सुब्बाराव की तलाश में उनकी टीम को भेजे थे जिसने अपने मालिक के फास्टैग का इस्तेमाल कर कार को चुराया था ,तब माननीय न्यायाधीश जी ने यह कहे कि क्या जिसका फास्टेग इस्तेमाल किया गया उस मालिक को आरोपी बनाया है या नहीं तो सिवनी कोतवाली पुलिस ने यह कहा कि आरोपी बनाया गया है ,माननीय न्यायाधीश जी ने यह कहा कि क्या सुब्बाराव और उसके मालिक को गिरफ्तार किया गया ,तो सिवनीं पुलिस बगले झांकते नजर आई ,थानेदार ने बताया कि  एक बार गए थे पर वह मिला नहीं, माननीय न्यायाधीश ने थानेदार और सतीश उइके की झकर उतारते हुए यह कहे कि क्या लोकेशन ली थी और अगर गिरफ्तार करने  गए थे तो फास्टेग में पता देखकर गए होगे, तभी तो उसकी पत्नी से मिले, और आरोपी नही मिला तो क्या आरोपी ड्राइंग रूम में बैठकर तुम्हारा इंतजार करेगा, आखिर तुम किसी को बचाने का प्रयास क्यों कर रहे हो? गिरफ्तार क्यों नहीं किए ?क्या इन्वेस्टिगेशन की बारीकी  को समझते नहीं हो? या इस अपराध में तुम भी संलिप्त हो ? थानेदार से माननीय न्यायधीश जी ने यह कहे कि क्या तुम्हारा कनिष्ठ तुम्हारा फास्ट्रेक इस्तेमाल कर सकता है और जब फास्ट्रेक से उसी दिन पता चल गया था की वह किसके नाम का है, उसकी पत्नी से मिलकर भी आ गए तो फिर उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किए? उसी दौरान माननीय न्यायधीश जी ने सब इंस्पेक्टर और थानेदार से यह पूछा कि फरारी पंचनामा बना है या नहीं, सब इंस्पेक्टर सतीश उइके  द्वारा यह कहा गया कि डूंडा सिवनी थाने ने पंचनामा बनाई है फिर यह कहने लगे कि मैंने बनाया था लेकर नहीं आया, यह जवाब दिया कि शिनाख्ती पंचनामा बनाया है मुख्य न्यायाधीश नाराज होकर थानेदार और सब इंस्पेक्टर सतीश उइके को  कहे की आप जो कहानी बता रहे हो इतनी कहानी हम पीछे छोड़ कर आए हैं, अगर पंचनामा बनाए हो तो कहां है ? झूठ बोलते रहे हो, इन्वेस्टिगेशन करना आता नहीं है, तुम्हारे महकमे को कोई चिंता नहीं है,  तुम्हें तनखा  मध्यप्रदेश शासन देता है या अपराधी देता है? तब थानेदार साहब यह कहते हैं कि मध्यप्रदेश शासन देता है मुख्य न्यायाधीश जी ने कहा कि पंचनामा कहां है उसी दौरान सब इंस्पेक्टर सतीश ने झूठ बोला कि उन्होंने पंचनामा लेकर नहीं आये और मुख्य न्यायाधीश जी कहते हैं झूठ बोल रहे हो, बनाए हो तो पंचनामा दिखाओ और वरना झूठ बोलोगे तो मुसीबत में आ जाओगे, कितनी बार विशाखापट्टनम गए हो?और सतीश उइके के द्वारा यह कहा जाता है की डूडा सिवनी थाने ने पंचनामा बनाई है, मुख्य न्यायाधीश जी कहते हैं कितनी बार लिखें तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा है, झूठ पर झूठ बोल रहे हो, क्या डीजी को बुलवाएं? ला इन आर्डर कितना खराब कर चुका है ? और झूठ बोल रहे हो कि पंचनामा बनाए हो क्या तुम्हें फरारी पंचनामा और शिनाख्ती पंचनामा में फर्क क्या होता है यह नहीं पता? हाई कोर्ट के सामने अगर झूठ बोल रहे हो तो तुम्हारी फितरत क्या होगी ?उसके बाद लताड़ लगते हुए मुख्य न्यायाधीश ने आदेश किया कि सिवनी एसपी अपने संज्ञान में लेकर इस मामले को इन्वेस्टिगेशन करवाएं और सतीश उइके के खिलाफ एक्शन लेने को भी सिवनी एसपी को लिखे , इस पूरे मामले में यह बात तो स्पष्ट हो गई कि सिवनी थानेदार महादेव नागोतिया और उनका पूरा स्टाप थाने को दुधारू गाय की तरह इस्तेमाल कर रहे थे , गाय को जिस प्रकार हरि घास, बरसिंग,खली चुन्नी दिखाकर दोहते है वैसे ही समाज सेवा के नाम पर थाने और खाकी के बदौलत दोहन करते रहे,जिसके चलते कई दलाल और भाट लोग भी इस मामले में संलिप्त नजर आए परंतु न्याय के मंदिर में पुलिस की जो छबि स्पष्ट हो गई कि ला इन आर्डर पूरी तरीके से खस्ता है और इसके जिम्मेदार कोतवाली के थाना प्रभारी है।

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