पुलिस की ईमानदारी पर सौरभ ने लगया प्रश्नचिन्ह
शराब तस्कर सौरभ ने किया सरेंडर ,छपारा पुलिस की नाकामी रही कि तस्कर को नही पकड़ पाई थी आज तक
घर पर रहकर ही काटा है फरारी- सूत्र
छपारा पुलिस को लाखो रुपये देने का दम भरने वाला शराब तस्कर जो बीते 2 महीने पहले शराब की बड़ी खेप पुलिस के द्वारा पकड़ी जाने पर पुलिस ने उसे फरार बताया था, जबकि सिवनीं न्यूज़ ने सच प्रकाशित कर बताया था कि सौरभ ठाकुर फरार हुआ या कराया गया थाने के कैमरे से पता चल जाएगा,पर पुलिस की ऐसी पोलिसिंग देखने मिली कि मुख्य आरोपी सौरभ पूरी फरारी घर पर ही काटा और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही, उसे अग्रिम जमानत का पूरा मौका दी, अगर माननीय न्यायालय जमानत खारिज नही करती तो आज सौरभ सरेंडर नही करता ,ये छपारा पुलिस की नाकामी है ,जो शराब तस्कर के सामने घुटने टेक दी, बताया जाता है कि आरोपी सौरभ ठाकुर फरारी के दौरान मोबाईल भी चलाता था पर पुलिस इसके बाद भी नहीं पकड़ पाई , छपारा क्षेत्र में शादी ब्याह और खेती बाड़ी का काम भी खुलेआम करता था पर छपारा पुलिस का सूचना तंत्र लखवाग्रस्थ था या पुलिस ही सेट थी जिस कारण पुलिस दो माह पूर्व छपारा थाना में पकड़ी गई शराब के मुख्य आरोपी सौरभ ठाकुर को नही पकड़ पाई और सौरभ ने जमानत खारिज होने पर थाना में सरेंडर किया है।अब सवाल यह पैदा होता है कि क्या छपारा थानेदार मुख्य आरोपी से ये पूछेंगे कि शराब कहाँ से लाए थे या आव भगत कर रस्म अदायगी करते हुए जेल रवाना करेंगे या फिर असल पुलिस की भूमिका निभाते हुए आरोपी की पुलिस रिमांड लेंगे।
क्या था मामला
छपारा थाना के द्वारा पकड़ा गया शराब तस्करी काण्ड में एएसआई मुकेश के भ्रस्ट कार्यप्रणाली के कारण थानेदार के ऊपर गाज गिरने की संभावना थी ,लग रहा था कि पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में आते ही हड़कंप मचेगा पर ऐसा कुछ नही हुआ था बल्कि थाने में लूटपाट बराबर जारी रही और शराब तस्करी के मामले में छपारा पुलिस के द्वारा जारी की गई, शराब तस्करी को लेकर पुलिस के द्वारा दी गई प्रेसनोट में गड़बड़ झाला भी पकड़ी गई थी जिसमे अवैध शराब को गौरपानी के जंगल से लाने का बताया गया था,पुलिस ने आरोपियों से पकड़ी गई शराब की पूरी जप्ती नहीं बनाई थी, पकड़ी गई 55 पेटी शराब और जप्त किया 19 पेटी शराब जांच का विषय था,मध्यप्रदेश का पहला जिला का पहला थाना छपारा ही था जहां की पुलिस अवैध शराब तो पकड़ती है पर अपराधियों को बचाने के लिये उक्त पकड़ी गई शराब को जंगल से लाना लिख दी ।छपारा पुलिस ने शराब तस्करों को पकड़कर केस को तोड़ मरोड़ कर गलत तरीके से अवैध रुपये कमाने का काम की थी, सूत्रों के मुताबिक दिनांक 18-04-2023 को छपारा पुलिस ने प्रेसनोट के अनुसार सालीवाडा जुबान रोड पर एक मैजिक वाहन में अवैध शराब पकड़ा था, पुलिस को मौके से मैजिक वाहन में चालक कपिल पटेल निवासी ख़ुर्शीपार और एक नाबालिग गट्टू मिले और मैजिक वाहन में 50 से 55 पेटी शराब रखी थी ।
सौरभ ठाकुर और शराब दुकान के मैनेजर से पहले ही हो गया था मामला सेट
विश्वसनीय सूत्रों ने बताया था कि छपारा पुलिस ने वाहन और उसमे भरी शराब को लेकर लगभग एक बजे रात को थाना लेकर आये थे।पकड़े गये वाहन चालक और नाबालिग ने पूछताछ में उक्त शराब छिन्दवाड़ा जिला के ग्राम हर्रई और सुरलाखापा की दुकान से छपारा निवासी सौरभ ठाकुर और छपारा निवासी विपिन बंजारा के कहने पर लाना बताया था,जिसका वीडियो भी एएसआई मुकेश उपाध्याय के द्वारा बनाया गया था।इसके बाद रात को ही छपारा पुलिस सौरभ ठाकुर को उसके घर से लेकर थाना ले आती है और विपिन बंजारा को तब तक खबर लग जाती है तो वो घर से फरार हो जाता है । छपारा पुलिस के जाँबाज एएसआई मुकेश उपाध्याय अपना दिमाग चलाता है और हर्रई एवं सुरलाखापा की शराब दुकान के सेल्समैनों को रात में ही उठाकर छपारा थाना ले आते हैं ।थाना में बैठकर एएसआई उपाध्याय थानेदार की मर्जी से पहले अपने प्यादे सौरभ ठाकुर से बातचीत कर उसे फरार कराने और पकड़े गये नाबालिग को छोड़ने की रकम लगभग ढाई लाख रुपया रात को ही बुलाकर जमा कराकर आरोपी सौरभ ठाकुर को थाना आने के बाद फरार करा देता है ।घटना की अलसुबह जिला छिन्दवाड़ा के हर्रई और सुरलाखापा शराब दुकान जो किसी सोम ग्रुप की बताई गई थी, उसका मैनेजर थाना छपारा आता है और एएसआई मुकेश उपाध्याय से बातचीत कर उसके आदमी को छोड़ने और जप्त शराब की मात्रा कम करने के लिये दो लाख रुपये देता है और दोनों सेल्समैनों को साथ में लेकर चला जाता है सूत्रों के मुताबिक छपारा पुलिस को मौके में मिले वाहन से 55 कार्टून मिले थे ,जो थाना आकर 19 कार्टून बन गये थे, ये सब काम एएसआई मुकेश उपाध्याय के द्वारा किया गया है । ऐसा सूत्र बताते है।
प्रेस नोट ही संदेह पैदा कर रहा है
हम आपको बताना चाहते हैं कि छपारा पुलिस के द्वारा माह जनवरी में पकड़ी गई शराब की प्रेसनोट में शराब कहाँ से लाई गई उसका उल्लेख ही नहीं है और दिनांक 18-4-23 को पकड़ी गई शराब के प्रेसनोट में आरोपियों के द्वारा लाई गई अवैध शराब को गौरपानी के जंगल से लाना बताया गया है ।पुलिस की प्रेसनोट ही पुलिस का भ्रष्टाचार की पोल खोल रही है । हमने कहा था आने वाले समय मे इस खबर को पुख्ता सबूत के साथ प्रकाशित करेंगे क्योंकि हमारे पास घटना की पूरी सत्यता और प्रमाण मौजूद थे तभी अखबार में जो सच था वही छपा । और आज सौरभ ने सरेन्डर किया इस बात की पुष्टि हो जाती है कि पुलिस ने सौरभ को इतने दिनों का मौका आखिर क्यों दिया ?और अब शराब का तस्कर सौरभ जब सरेंडर कर चुका है जो पुलिस के ऊपर सवालिया निशान खड़ा करता है क्योंकि सौरभ तो इस बात को जहां बैठता है वहीं पर कहता है कि वह लाखों रुपए पुलिस को दिया है वाकई छपारा पुलिस इमानदार है तो आरोपी पुलिस के पास है ऐसे में ठेकेदार के ऊपर मामला दर्ज करने के लिए और अपने आपको इमानदार साबित करने के लिए क्या पुलिस आरोपी की रिमांड लेकर शराब ठेकेदार का नाम उगलवाकर शराब ठेकेदार के खिलाफ मामला बनाएगी क्योंकि आज तक शराब की खेप तो पकड़ लेते हैं और प्यादों पर मामला बनाकर शराब ठेकेदार को बचाया जाता है अभी तक शराब ठेकेदार के खिलाफ शराब तस्करी का मामला नहीं बनाया गया है जब भी ऐसा मौका आता है तो रात के अंधेरों में चार चक्का वाहन सिवनी से जाता है 5 अंकों की राशि देता है और वापस आ जाता है इसकी पुष्टि सीसीटीवी कैमरे से की जा सकती थी परंतु किसी प्रकार की कोई जांच ऐसे मामलों में नहीं बैठाई जाती है जिसका परिणाम है की प्यादों पर मामला कायम कर रस्म अदायगी करने में पुलिस माहिर हो चुकी है।